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छत्तीसगढ़ में कस्टोडियल डेथ का एक और मामला: परिवार का आरोप कि पूछताछ के लिए ले गई थी पुलिस, पिटाई के बाद अस्पताल में हुई मौत

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले की लटोरी पुलिस चौकी में पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए लाए गए आदिवासी युवक पूनम कतमल की आज सुबह अस्पताल में मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस की बेरहम पिटाई से ही कतलम की जान गई है।

छत्तीसगढ़ में पुलिस कस्टडी में होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या पर छत्तीसगढ़ सरकार की चुप्पी आश्चर्य में डालती है। बिलासपुर के बालसुधार गृह में नाबालिग की मौत से लेकर अंबिकापुर के पंकज बेक कस्टोडियल डेथ मामले तक हर बार प्रशासन न सिर्फ चुप्पी साधे रहा है बल्कि आश्चर्यजनक रूप से इन मामलों में तथ्यों की अनदेखी भी की गई है।

भारत सम्मान समाचार में प्रकाशित खबर के मुताबिक सूरजपुर जिले में रहने वाले विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर पूनम कलम की आज सुबह तकरीबन 4:40 बजे अस्पताल में मौत हो गई। पूनम कलम के परिवार वालों का कहना है कि “पुलिस एक मामले में पूछताछ के लिए उसे थाने लेकर गई थी वहां पुलिस ने उसके साथ बेतहाशा मारपीट की और जब तबीयत बिगड़ने लगी तो उसे अस्पताल भेज दिया, वहीं उसकी मौत हो गई, यह मौत पुलिस की पिटाई से हुई है।”

गौरतलब है कि बीते सोमवार को लटोरी चौकी अंतर्गत करवा विद्युत सब स्टेशन के सामने मुख्य मार्ग पर तड़के सुबह एक युवक की नग्न लाश मिली थी जिसकी शिनाख्त गजाधरपुर निवासी 24 वर्षीय हरिश्चंद्र पिता धनेश्वर के रूप में हुई थी। सूचना पर लटोरी चौकी प्रभारी सुनील सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मृतक के शरीर पर चोटों के निशान व अन्य जानकारियों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत हुआ। मामले की विवेचना शुरू की गई।

जांच में पता चला कि मृतक बीती शाम विद्युत सब स्टेशन में ही मौजूद था।
वहां शराब को लेकर आपस में कुछ विवाद हुए था जिसमें विजय और जेई पूनम कतलम भी मौजूद थे। हत्या के इस मामले में मुख्य आरोपी विजय के साथ बतौर संदेही पूनम कतलम को भी पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही थी।

फिर कहानी गढ़ती नज़र आ रही है पुलिस

एक तरफ़ परिजनों का आरोप है कि पूनम कतलम के साथ पुलिस चौकी में मारपीट की गई और जब तबीयत बिगड़ी तब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनकी मौत हो गई वहीं दूसरी ओर पुलिस कप्तान सूरजपुर ने कहा है कि मृतक जेई पूनम कतलम को पुलिस चौकी में लाया ही नहीं गया था। उन्होंने कहा कि जेई शराब के नशे में थे उन्हें सीधे अस्पताल ले जाया जाया गया था जहां आज सुबह करीब 4:40 बजे उनकी मौत हो गई।

पुलिस कप्तान के इस बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि आजकल हत्या जैसे गंभीर मामलों में पूछताछ के लिए किसे थाने लाया जा रहा है और कार्रवाई की जा रही है इसकी जानकारी भी थाना प्रभारियों द्वारा आला अधिकारियों को नहीं दी जा रही है। जिसकी जो मर्जी हुई सो वो कर रहा है। कोई भी रहा है तो क्या ही फ़र्क पड़ता है।

थानों के cctv कैमरे बन्द क्यों ?

पुलिस अभिरक्षा में मौतों के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ प्रदेश सरकार ने भी प्रत्येक थाना चौकियों में सीसीटीवी कैमरा 24 घंटे चालू हालत में लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन लटोरी चौकी का सीसीटीवी कैमरा इस मामले के बाद बन्द पाया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीसीटीवी कैमरा मात्र 2 दिन चालू हुआ था फिर बंद हो गया आखिर क्यों और कैसे?

पुलिस कस्टडी में डेथ और वह भी एक शासकीय जिम्मेदार अधिकारी की, जो विद्युत विभाग में जेई के पद पर कार्यरत था, पुलिस अभिरक्षा का मृतक जिसे हत्या जैसे गंभीर मामले में बतौर आरोपी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया था उसके बारे में ये क्यों कहा गया कि उसे थाने लाया ही नहीं गया, विभाग के उच्चाधिकारियों को मामले की सही जानकारी क्यों नहीं थी? इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली स्वयं ही कई संदेह उत्पन्न कर रही है।

पुराने अनुभवों के आधार पर उम्मीद तो यही है कि पुलिस अभिरक्षा मौत का यह मामला भी पहले वाले सभी मामलों की तरह ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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