अभिव्यक्ति

टिप्पणी : अख़बारनवीसी की आड़ में आपसी रंजिश ठीक नहीं

बिलासपुर। ताकत कहिए, शक्ति कहिए, सत्ता कहिए या पद कहिए इन सभी के साथ ज़िम्मेदारी और विनम्रता का भाव साथ साथ पैरलल चलता है।

ग़ैरज़िम्मेदारी, अहंकार और ईर्ष्या का भाव अच्छे ख़ासे शक्तिशाली सामर्थ्यवान व्यक्ति को भी पतन की राह पर ले जा सकता है।

अख़बारनवीसी भी ऐसा ही ज़िम्मेदारी और ताकत से लबरेज़ पेशा है। आपसी रंजिश साधने के लिए इस पेशे को हथियार बनाना ठीक नहीं है। ख़बर वही है जो सामाजिक हित, सुधार या अव्यवस्था की बात करे।

एक ज़िम्मेदार अख़बारनवीस से ज़ाहिर है कई लोग रंजिश भी रखेंगे, दुश्मन भी बनेंगे लेकिन ये दुश्मनी प्रोफ़ेशनल हो, उसकी बढ़िया पत्रकारिता की वजह से हो तब तो कोई बात हो।

शहर के कुछ पत्रकारों की आपसी रंजिश लम्बे समय से शहर की ख़बर गलियों में गॉसिप का विषय बनी हुई है।

बीते दिनों शहर के एक पत्रकार साथी पर FIR दर्ज हुई, आरोप लगा कि उसने, सादे कपड़े पहने एक पुलिस कर्मचारी ने और कुछ अन्य लोगों ने एक अन्य पत्रकार साथी के साथ मारपीट और गालीगलौच की।

कुछ पत्रकारों ने चोरी के, बिना बिल का सामान खरीदने बेचने वालों के पक्ष में ख़बर चलाई ताकि वे उस कारोबारी के सामने अपनी वफ़ादारी साबित कर सकें।

एक बड़े बार में पुलिस ने रेड मारी तो वहां ख़बर बनाने पहुँचे पत्रकार साथी को जबरन बदनाम करने के लिए एक मीडिया संस्थान ने उसके खिलाफ़ भ्रामक ख़बर चलाई।

दरअसल एक प्रचलित तरीका है दुश्मनी निकालने का कि दुश्मन के करीबियों को भी परेशान किया जाए। ऐसी ही आपसी रंजिश वाला एक लेख पिछले दिनों पत्रकार साथी ने प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की ( बग़ैर नाम लिखे)।

किसी अधिकारी को सबक सिखाना हो तो उसके अनैतिक कार्यों को उजागर कर, दमदार ख़बर चलाकर उसकी काली करतूतों को(यदि हैं तो) सामने रखना ही आदर्श तरीका होता लेकिन मेरे विचार से व्यक्तिगत जीवन पर टिप्पणी करना तो किसी अख़बारनवीस का तरीका नहीं होना था।

आपकी कलम में ताकत है लेकिन आपके स्वभाव की विनम्रता भी आपके काम का अहम हिस्सा होती है। किसी अख़बारनवीस के अमर्यादित शब्द और उसका ऐरोगेंट बिहेवियर उसके अब तक के सारे हासिल को शून्य बना सकता है। इन व्यक्तिगत टिप्पणियों का अब रिएक्शन भी व्यक्तिगत आरोपों के रूप में ही सामने आने लगा है।

सूत्रों ने बताया कि बीती रात भी एक पत्रकार साथी की कार और ट्रक के बीच एक्सिडेंट हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रक ड्राइवर की ग़लती नहीं थी लेकिन पत्रकार साथी ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई।

इस पूरी कलमघिसाई का लब्बोलुआब बस इतना है कि अख़बारनवीसी की आड़ में आपसी रंजिश ठीक नहीं।

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