आंदोलन महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार राजनीति

8 मार्च ,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को रायपुर में आमसभा ,प्रदर्शन और गिरफ्तारी .: महिला अधिकार मंच

8 मार्च 2019 अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

 संघर्ष को हम सब मिलकर आगे बढाएंगे जिसके लिए सभी संघर्षशील और प्रगतिशील महिलाओं को 8 मार्च 2019 को रायपुर मे एकत्रित होने के लिए आमंत्रित करते है। ग्राउंड मे आम सभा के बाद सभी साथियों द्वारा गिरफतारी दी जाएगी।

संघर्षशील महिलाओं का कूच राजधानी की ओर
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पूरे विश्व मे महिलाआें को सम्मान देने,सामाजिक से लेकर राजनितिक जीवन मे महिलाओं द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियों को मनाने और लिंग समानता पर बल देने के लिए मनाया जाता है। साथ ही यह एक एैसा दिन है जो महिलाओं के संघर्ष और आन्दोलनों को सम्मानित करता है और अपने अधिकार व सम्मान के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता है।

आजकल बाजार ने अपने फायदे के लिए इस दिन को त्यौहार के जैसा बना दिया है और अपना सामान बेचने के लिए महिलाआें का इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए जरूरी है कि हम इस दिन के इतिहास को लगातार याद करें।

पूंजीवादी,पित्रसत्तात्मक समाज और सरकारों द्वारा अलग-अलग रूपों मे हम पर हिंसा किया गया है,जिसमें जातिगत हिंसा की बहुत बड़ी भूमिका रही हैं।इसका विरोध हम महिलाएं ऐतिहासिक रूप से करती आई है। छत्तीसगढ के परिप्रेक्ष्य मे केन्द्र और राज्य की कॉरपोरेट परस्त सरकार द्वारा पिछले कुछ सदियों से संसाधनो की लूट और विकास के नाम पर ना सिर्फ आदिवासी जनता से उनके जल,जंगल,जमीन छीने बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का हनन भी किया, किसानों से उनकी कृषि भूमि छीन कर बडी-बडी कंपनियों को दे दिया हैं। किसी भी तरह के विरोध को गैरकानूनी बता कर कुचला गया है। आदिवासियों के नक्सल उन्मूलन के नाम पर फर्जी एनकाउन्टर,सरेंडर और गैर कानूनी गिरफतारियां होती रही है।

सुरक्षाबलों और पुलिसफोर्स द्वारा बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों मे महिलाओं के ऊपर हुए यौनिक हिंसा की घटनाएं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा सामने लाई गई है। हिंसा के अलग-अलग रूपो का जैसे- मजदूरों की आजिविका छीनना या उनको न्यूनतम वेतन ना देना, महिलाओं पर तेजाब छिडकाव, और महिलाओं के साथ हो रहे यौनिक शोषण का, व अत्यधिक संसाधनों के खनन का, तथा वंचितों के लिए लड रहें मानव अधिकार कार्यकर्ताओ की गिरफतारी का छत्तीसगढ साक्षी रहा है।

इस तरह की प्रताड़ना व दमनात्मक हिंसा को खत्म करने के लिए,हिंसा मुक्त समाज बनाने के लिए, और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए,हम राज्य की महिलाओं को एकजुट होने का आव्हान करते है। खासकर एैसे समय मे जब पुलवामा के नाम पर सियासी ताकतें जाति और धार्मिक हिंसा फैला रहें है,तब हम औरतें युद्ध और बदले की आग को आगे ना बढाकर समानता और न्याय की लडाई को आगे ले जाना चाहते हैं, हम देख रहे है किस तरह 2 मुल्को की लडाई मे बेंगुनाह लोग मारे जा रहे है। यह बहुचर्चित मसला हमारे सामने रख दिया गया है ताकि हम सुप्रिम कोर्ट के द्वारा 13 फरवरी को आए वनाधिकारिक पटटों के निरस्तीकरण के आदेश,जिससे कई लाख आदिवासी प्रभावित होंगे, उसे भूल जाय और मुल्कों की लडाई मे व्यस्त हो जाए,हालंकि इस पर अभी रोक लगा दिया पर यह भी एक चुनावी पैतरा है जिसे हम साफ देख सकते है .

एैसे मे हम अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए यह मांग करते है कि-

1) राज्य सरकार बस्तर में सुरक्षाबलों द्वारा हिंसा की सभी घटनाओं पर कार्यवाही करें और यौनिक शोषण से प्रताड़ित महिलाओं को न्याय दिलाया जाए व एैसे काम जिन्हें सिर्फ महिलाएं ही करती है, उदाहरण-सफाई कर्मचारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आदि, उन्हें उनका न्यूनतम वेतन दिया जाय।

2) हम राज्य सरकार से यह भी मांग करते है कि- राज्य सरकार देश भर में मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए केंन्द्र सरकार पर दबाव डालें।

3) UAPA , राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, राज्य में छत्तीसगढ स्पेशल पब्लिक सिक्यूरिटी एक्ट 2005 को वापस लिया जाए और धार्मिक दंगो पर रोक लगायी जाए। साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित करें की PESA कानून का उल्लंघन ना हों।

ऐसे संघर्ष को हम सब मिलकर आगे बढाएंगे जिसके लिए सभी संघर्षशील और प्रगतिशील महिलाओं को 8 मार्च 2019 को रायपुर मे एकत्रित होने के लिए आमंत्रित करते है। ग्राउंड मे आम सभा के बाद सभी साथियों द्वारा गिरफतारी दी जाएगी।

-महिला अधिकार मंच
स्थान- गांधी मैदान,नगर निगम के सामने (काली बाडी,रायपुर)
समय-प्रातः 11 बजें।

संपर्क-राजिम 6266145301,

रिनचिंन-9516665420

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