अदालत

30 साल बाद मिला न्याय , लेकिन फरियादी सुनने दुनिया में नहीं . छतीसगढ़ हाईकोर्ट.

हाईकोर्टः एमपी के समय का मामला , कोर्ट ने कहा सभी देयकों व लाभ का 90 दिनों में करो भुगतान

बिलासपुर . हाईकोर्ट से सेल विभाग के क्लर्क को 30 वर्ष न्याय मिला है । लेकिन कोर्ट आदेश सुनने के लिए फरियादी दुनिया में नहीं , उसकी7 वर्ष पूर्व चुकी है । जस्टिस पीसैम कोशी एकलपीठ ने सेल टैक्स विभाग वर्ष पूर्व बर्खास्त लिपिक परिजनों की ओर से याचिका सुनवाई करते हुए बर्खास्तगी नियम विरुद्ध बताया एकलपीठ ने सेल टैक्स विभाग निदेर्शित किया है कि पीड़ित

सेवा व देयकों का भुगतान 90 दिनों समयसीमा में की जाए साथ ही पेंशन का निर्धारण नए कर भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित की तत्कालीन मध्यप्रदेश सेल टेक्स विभाग में कार्यरत लोअर डिविजन क्लर्क सीएस ठाकुर को टोल नाका अनाधिकार प्रवेश व वाहनों की तरीके से जांच करने जुर्माना व पास किए जाने पर विभाग मई 1986 सस्पेंड कर दिया था सस्पेंशन खिलाफ ठाकुर 1986 1988 में विभाग में दोबार अपील गई लेकिन अपील नजरअंजदाज कर विभाग ने एकपक्षीय कार्रवाई हुए फरवरी1989 को सेवा से बर्खास्तगी आदेश जारी कर दिया बर्खास्तगी के खिलाफ याचिकाकर्ता ने स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में अपील किया , वहां से अपील खारिज होने 2005 में हाईकोर्ट में अपील लेकिन उक्त अपील पर निर्णय हुआ ।

इसी बीच 22 मई सीएस ठाकुर का निधन हो गया उनके निधन के बाद रायपुर कुशलपुर पुरानी बस्ती में निवासरत पत्नी निर्मला राजपूत उम्र 55 वर्ष अभिषेक राजपूत 26 वर्ष व ठाकुर 25 वर्ष ने अधिवक्ता अनिमेष मिश्रा व महेश मिश्रा हाईकोर्ट में याचिका लगाई । याचिका में अपने पति के बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी गई मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने विभागीय जांच कई सवाल खड़े किए तथा लगाए गए आरोपों से इंकार करते हुए प्रकरण न्याय किए जाने की मांग गई ।

जस्टिस पीसैम कोशी एकलपीठ ने तथ्यों व दस्तावेजों अध्ययन के बाद विभागीय जांच नियम विरुद्ध पाया एकलपीठ अपने आदेश में सेल टैक्स विभाग याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी लेकर सेवाकाल तक समय मिलने वाले सभी लाभ का भुगतान दिनों में करने का निर्देश दिया ही याचिकाकर्ता के पेशन निर्धारण नए सिरे सेकर परिजनों भुगतान करने को कहा है ।

पत्रिका न्यूज़

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