कला साहित्य एवं संस्कृति

3. मसाला चाय : आज सुनते हैं शरद जोशी का यात्रा वृत्तान्त “रेल यात्रा”. भारतीय रेल की बदहाली पर ऐसा बारीक और सटीक कटाक्ष शायद ही किसी और ने लिखा हो : अनुज की आवाज़

शरद जोशी कहते हैं कि जब रेलें नहीं चली थीं, यात्राएँ कितनी कष्टतप्रद थीं। आज रेलें चल रही हैं, यात्राएँ फिर भी इतनी कष्टकप्रद हैं। यह कितनी खुशी की बात है कि प्रगति के कारण हमने अपना इतिहास नहीं छोड़ा। दुर्दशा तब भी थी, दुर्दशा आज भी है। ये रेलें, ये हवाई जहाज, यह सब विदेशी हैं। ये न हमारा चरित्र बदल सकती हैं और न भाग्यक।
भारतीय रेलें हमें जीवन जीना सिखाती हैं। जो चढ़ गया उसकी जगह, जो बैठ गया उसकी सीट, जो लेट गया उसकी बर्थ। अगर आप यह सब कर सकते हैं तो अपने राज्या के मुख्यरमंत्री भी हो सकते हैं। भारतीय रेलें तो साफ कहती हैं – जिसमें दम, उसके हम। आत्म बल चाहिए, मित्रो!

अनुज श्रीवास्तव ने मुबंई में.मसाला चाय की श्रंखला प्रारंभ की थी जिसमें वे देश के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार ,कवि और लेखकों की कहानी, कविता का पाठ करते है.यह श्रंखला बहुत लोकप्रिय हुई ,करीब 50,60 एपीसोड. जारी किये गये. सीजीबास्केट और यूट्यूब चैनल पर क्रमशः जारी कर रहे हैं. हमें भरोसा है कि अनुज की लयबद्धत आवाज़ में आपको अपने प्रिय लेखकों की कहानी कविताएं जरूर पसंद आयेंगी.

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