कला साहित्य एवं संस्कृति

26 .आज मसाला चाय में सुनिए काका हाथरसी की व्यंग्य रचनाएं और उनके कुछ मज़ेदार दोहे.

1946 में काका हाथरसी की पहली किताब “काका की कचहरी” प्रकाशित हुई थी. धीरे-धीरे कवि सम्मेलनों में हास्य कवि के रूप में काका स्थापित होने लग गए थे. 1957 में दिल्ली के लाल किले में आयोजित कवि सम्मलेन में काका को आमंत्रित किया गया. चूंकि 1857 की क्रांति का ये शताब्दी वर्ष था इसलिए सभी आमंत्रित कवियों से क्रांति की रचनाएं पढ़ने को कहा गया. कई वीर रस के कवियों के बाद जब काका बारी आई तो उन्होंने अपनी रचना “क्रांति का बिगुल” पढ़ी, सदन तालियों से गूँज उठा. और काका हाथरसी का नाम देशभर में स्थापित हो गया.: अनुज.

अनुज श्रीवास्तव ने मुबंई में.मसाला चाय की श्रंखला प्रारंभ की थी जिसमें वे देश के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार ,कवि और लेखकों की कहानी, कविता का पाठ करते है.यह श्रंखला बहुत लोकप्रिय हुई ,करीब 50,60 एपीसोड. जारी किये गये. सीजीबास्केट और यूट्यूब चैनल पर क्रमशः जारी करने की कर रहे हैं. हमें भरोसा है कि अनुज की लयबद्धत आवाज़ में आपको अपने प्रिय लेखकों की कहानी कविताएं जरूर पसंद आयेंगी.

मसाला चाय के इस अंक में सुनिए.. काका हाथरसी की रचनायें ..

Related posts

मजदूर दिवस पर अजय चंन्द्रवंशी की ग्यारह कवितायें…

News Desk

बिलासपुर : ट्रेड यूनियन और जनसंघठनो ने शहीदों को दी श्रधांजली .

News Desk

जब सरकार तय करने लगे खबरें तब… राजनीति में आना ही ठीक.

News Desk