राजनीति

मोदीजी ने किया है_भई !! बादल

बादल बरसे .

6.05.2019

पूरे चुनाव अभियान भर आम सवाल “प्रधानमन्त्री मोदी ने कुछ नहीं किया” के इर्दगिर्द घूमते रहे । वे भी इस से उस, उन्माद से बर्बरता के मुद्दे उछालते हुए अपरोक्ष रूप से “कुछ नहीं किया” को हवा सी देते रहे । यह दरअसल एक बड़ी चतुराई का हिस्सा है जो मोदी द्वारा किये पर पर्दा डालना चाहती है और इस तरह उन्हें उसके “श्रेय” से बचा ले जाना चाहती है


● जबकि असल में उन्होंने ऐसा ऐसा कर दिखाया जिसे 70 साल में आजादी के बाद की सरकारें तो छोड़िये चन्द्रगुप्त मौर्य से मुहम्मद बिन तुगलक और उनके बाद का कोई भी शासक नहीं कर पाया था ।


● बिना किसी भावनात्मक भटकाव के तथ्यों के आधार पर भी गिनें तो मोदी जी की उपलब्धियां कब्र पर चढ़कर बोलती हैं । चलिये, सारी नहीं कुछ एक को ही देख लें ;


● पहले भारत की गरीबी की दुनिया भर में थू थू होती थी । भला बताइये 1991 में इस देश में एक भी ऐसा बन्दा नहीं था जिसके पास 1 अरब डॉलर की संपत्ति हो । उदारीकरण की नीतियां भी 23 साल में मात्र 53 डॉलर अरबपति बना पायीं । मोदी जी ने अपने चार सालों में उनकी संख्या दो गुनी कर दी और 2018 में वे बढ़कर 121 हो गए । अभी 2019 की रिपोर्ट आने वाली है निश्चिन्त रहिये वे और बढ़ेंगे ।


● शास्त्र और पुराणों में भी अकेले एक कुबेर थे । मोदी जी ने हजारों साल की कुबेर की दादागिरी खत्म कर दी और 121 ऐसे कुबेर दिए जिनकी अमीरी भी ऐसी कि दुनिया शर्मा जाये । इन 121 के पास पूरे देश की जीडीपी की लगभग एक चौथाई दौलत जमा हो गयी । इतना अनुपात तो अमरीका तक के अरबपतियों के पास नहीं है ।


● कमाई की इतनी फटाफट दर कि खुद कल्पवृक्ष और कामधेनु शरमा जायें। मिसाल के लिए एक मुकेश अम्बानी जी को ही ले लें । अकेले 2017 की साल के 12 महीने में उन्होंने 16.9 अरब डॉलर (तब की एक्सचेंज रेट में 1 लाख 5 हजार करोड़ रूपये कमाये । ) पता है ये कितने हैं ? अगर प्रचलित मजदूरी दर पर कोई एक आदमी इतना कमाना चाहे तो उसे 1 लाख 87 हजार साल लगेंगे । कोई आसान बात है यह ?


● अम्बानी तो अम्बानी, युवाओं को भी असाधारण कमाई के अवसर दिए । अमित शाह मीटिंगों में लगे रहे तो क्या, उनके छोटे से बेटे जय शाह ने मात्र 50 हजार की चिल्लर पूँजी से काम शुरू किया और और एक साल में ही 80 करोड़ 50 लाख कमा लिए । मतलब 22 लाख 5 हजार 479 रूपये रोज !! है कोई ऐसी और मिसाल ? हैं थोड़ी सी । अब अगर वे सब के सब राष्ट्रवादी पार्टी के हैं तो इसमें चिढ़ने की बात क्या है । अंग्रेज कह गए हैं ; चैरिटी बिगिन्स एट होम ।


● यह मोदी का ही अथक श्रम था जिसके जरिये दुनिया के किसी भी देश मे जैसा नही था वैसा किया गया, ऊपर के एक फीसदी के पास देश की 58 प्रतिशत दौलत का ढेर लगा दिया गया ।


● कितने तो देश घूमे मोदी जी !! कब्भी अकेले नहीं गए । अम्बानी अडानी जैसों की पूरी बटालियन साथ ले गए । निस्वार्थ यात्राये कीं, एक मंगोलिया के खच्चर को छोड़ कुछ नहीं लाये । अपने सहयात्रियों की खदाने, दुकाने दुनिया भर में खुलवा आये ।


● बैंकों में जमा पैसा सड़ता रहता था । मोदी जी ने उसे बाहर निकलवाकर धूप दिखाई । बंटवाया । नीरव मोदी, विशाल मोदी, मंझले संझले मोदियों, मेहुल चौकुशी, माल्याओं जैसे पूँजी वराहों को दिया । अब इसमें से कोई 15 लाख करोड़ डूब गया तो मंगल ग्रह थोड़े ही चला गया । यहीं धरा पर धरा है । इस चक्कर में इतिहास तो रचा गया न, कुल जमा एक भारत छोडो आंदोलन था किताबों में । इस बहाने दूसरा तो हुआ !! ज्यादातर एक के बाद दूसरे देश जाकर बस गये । नाम भी हुआ एक नया देश लपेटे मे भी आया ।


● दो चार पांच भ्रष्टाचारों की जुगाली करता रहता था देश । कितना अकाल सा था । इतना बड़ा देश है तो घोटाले भी उससे ज्यादा नही तो कम से कम उतने ही हों । कर डाले ; ए से जेड तक हर अक्षर से ढूँढिये हजार मिल जाएँ ।


● पुराने देश होने के नाते कितने झंझट थे । जहां खोदो वहां कुछ पुराने सिक्के, सदियों सदियों पुरानी मुद्रा निकल आती थी । कबकी है किसकी है की पहचान की मुश्किल अलग से । मोदी जी ने एक झटके में नोट बन्द करके सारी मुद्रा जमा करा ली । अब इस चक्कर में जितने काले थे भी वे भी सफ़ेद हो गए तो क्या हुआ, आखिर फेयर एंड लवली टाइप की काले को गोरा करने वाली क्रीम सिर्फ मनुष्यों के लिए ही थोड़े ही है । अरबों के नकली नोट भी असली हो गये !!


● पढ़ाई लिखाई के पंगे अलग थे । जिसे देखो मुंह उठाये कालेज पहुँच जाए, पढ़ लिख कर काम मांगे । जिनकी औकात है अब वे ही पढ़ें इसके लिए जरूरी था नर्सरी से कालेज तक फाइव स्टार शिक्षा मॉल । सो खुलवा दिए । हजारों लाखों की फीस से सम्मृद्दि बढ़ी कि नही । मनु की कोई मानता ही नहीं था – लिहाजा यूं नहीं तो यूं सही । बन्द कर दिये द्वार । पुरानी परम्परा बहाल । अब मनु महाराज की हिदायत अमल में लाने की हिम्मत थी किसी में ? मोदी जी में थी ।


● संस्कृति, साँझा चूल्हा, सौहार्द्र, भाईचारा, धर्मनिरपेक्षता सहित न जाने कितने फिजूल के शब्द थे । शुध्दता कोई चीज है कि नहीं । पूरी ताकत से मोदी जी खुद लगे, अपने पूरे कुनबे को लगाया और फांक फांक कर दिए सदियों से एकजाई रहे, हिन्दू-मुसलमान, बामन-दलित, साहू-पटेल, आदमी-औरत और ये और वो । कितना मुश्किल था मगर काफी कुछ कर दिखाया । सदियों में हुए को महीनों में अनहुआ करना भला छोटा काम है ।


● सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स, आई बी, केँ चु आ, जिसे देखो वो तना तना खुदमुखत्यार बना घूमता था । सबको – काफी हद तक सुप्रीम कोर्ट को भी – लाइन से लगा दिया मोदी जी ने । इसी तरह सैना थी, बेचारी सीमा पर खड़ी रहती थी । चुनाव में कोई जिक्र ही नहीं करता था । मोदी जी ने उसे अपने चुनाव प्रचार में लगा दिया । कोई आसान काम था ।


● पूरी दुनिया भूखी मरती थी । बीफ कम पड़ जाता था । मोदी जी दुनिया को बीफ खिलाने के पुण्य काम में जुटे और तीन साल में ही भारत दुनिया में बीफ एक्सपोर्ट में नम्बर वन बना दिया । अपने लोग मशीनों से बीफ कटाई में लगाये । उन्हें गाय-भैंसें काटने के लियी खूब सारी सब्सिडी दी । और उधर अपने ही लोग पहलू खान, अख़लाक़ को निबटाने में लगा दिये ताकि चित्त भी मेरी और पट्ट भी मेरी हो जाये । बताइये तनिक कितना कठिन रहा होगा यह करना । मगर किया कि नही ।


● सारे अखबारों, चैनलों को एक सूत में घुटनो के बल खड़ा करना, लोकतंत्र को आईसीयू और संविधान को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर देना दृढ इच्छाशक्ति की मांग करता था । मोदी जी ने वह हिम्मत दिखाई । वाल्मीकियों को साधू बनाना पुरानी बात थी – मोदी जी ने आतंकियों को नेता बनाकर दिखा दिया ।


● ऐसे अनगिनत काम हैं जो उन्होंने किये । मोदी अनंत उनके काम अनंता । ये वामी और लिबरल और सिकुलर और अज्ञानी भारतीय इन्हें गिनते ही नहीं है । एक क्षेत्र बताइये हम उनके किये को गिना देंगे ।
● अब वे इतना कर चुके, बाकी सब भी उन्ही से कराएंगे क्या ? अब उन्हें आराम दीजिये ।

बादल सरोज

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