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बोरगांव ,बस्तर ःः  एसी  हुई सबसे अनोखी शादी, 30 से 40 गांव के लोगों ने निभाई रस्में, जमकर झूमे.

By: Chandu Nirmalkar Feb, 18 2019 

कई तरह की शादी देखी होंगी लेकिन ऐसी शादी…

 

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आपने कई तरह की शादियां देखी होंगी जिसमें आपको कई पारंपरिक रंग देखने को मिले होंगे। लेकिन ऐसी अनोखी शादी न तो आपने कभी देखी होगी न ही इसके बारे में कभी सुना होगा। पुराणों में आपने देवी-देवताओं की शादी के बारे में सुना होगा। टीवी सीरियलों में उन्हें भव्य तरीके से होते देखा भी होगा। लेकिन शनिवार को ग्राम पांडे आठगांव में देवी देवता की एक ऐसी अनोखी शादी हुई जिसमें ग्रामीणों के साथ ग्राम के देवी देवता भी शरीक हुए और इस अनोखी शादी के साक्षी बने।

अब से तीन पीढ़ी पहले हुई थी ऐसी शादी

गांव के पटेल सेहड़ सिंह पांडे एवं माटी गांयता मि_ू राम मरकाम सहित ग्राम के वरिष्ठ बुजुर्गों का कहना है कि हमारे दादा परदादा से इस तरह की शादी के संबंध में हमने सुना था। हमारे पूर्वजों के अनुसार गांव के प्रमुख देवता कोसा कुंवर एवं देवी अंगार मोती का विवाह उन्होंने तीन पीढ़ी पहले करवाया था। अब उक्त देवी देवता के पुत्र बालकुवंर एवं फरसगांव बूढ़ा देव की पुत्री नेताम परिवार देवी फु ल सुंदरी का विवाह इस पीढ़ी में हमें करवाने का सौभाग्य मिल रहा है।

सपने में आकर विवाह का प्रस्ताव दिया

यह अनोखी शादी देखने में जितनी अजीब लगती है उतनी ही रोचक भी है क्योंकि इस गांव के माटी गायता का कहना है कि देवी फुल सुंदरी सपने में घुंघरू के रूप में आकर पांडे आठगांव के देवता बालकुवंर से अपनी शादी करवाने की इच्छा प्रकट करती है । माटी गायता द्वारा पांडे परिवार एवं गायता परिवार के सभी वरिष्ठजनों को उक्त बातों से अवगत कराया एवं इस सपने की बातों की पड़ताल सिरहा के माध्यम से की गई । फरसगांव के वधु पक्ष नेताम परिवार को इन सब बातों से अवगत कराया गया फिर बालकुंवर और फु ल सुंदरी की शादी की सहमति बनी और फिर शुरू हुआ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गुंज के साथ रीति रिवाजों से इस अनोखी विवाह की रस्मों का सिलसिला।

 

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उत्सव का माहौल

तीन पीढ़ी बाद ऐसी देवी देवताओं की शादी देखने परगना के 85 गांव में से लगभग 30 से 40 गांव के लोग उमड़ पड़े। बताया जाता है कि बरसों पहले पांडे परिवार से बिछड़े कई परिवारों का मिलन इस शादी के दौरान हुआ।

पांडे परिवार का इतिहास

पांडे परिवार के इतिहास की बात करें तो पांडे परिवार के बुजुर्गों का कहना है कि रियासत काल में बस्तर के विस्तार करने के उद्देश्य से तत्कालीन राज घराने द्वारा तेलंगाना के वारंगल से पांडे परिवार को लाकर ग्राम बड़ेडोंगर में बसाया गया था। तत्पश्चात पांडे परिवार के 3 पुत्र में से बड़े पुत्र को गद्दी का मालिक बनाकर ग्राम बरकई में और मंझले पुत्र को न्यायिक का मालिक बनाकर पांडे आठगांव में और सबसे छोटे पुत्र को ग्राम कमेला में देवी दुर्गा का मालिक बनाकर बसाया गया। उन्होंने आगे यह भी बताया कि रियासत काल में राज घराने में प्रधान, नेंगी, मांझी, मुखिया, चालकी के साथ पांडे भी न्यायिक की भूमिका निभाते थे।

इनके सहयोग से हुआ विवाह संपन्न

इस विवाह समारोह में मोहन सिंह पांडे, नोहर सिंह पांडे, धनराज पांडे, हीरामन पांडे, पिलसाय पांडे, सुकलाल पांडे, नरेंद्र पांडे, कार्तिक पांडे, घसियाराम मरकाम, बनसिंह मरकाम, चैतूराम मरकाम, रामधर मरकाम, हरी प्रधान, दलसाय नेताम, रामलाल सोरी, गणेश दीवान सहित पांडे परिवार एवं गायता मरकाम परिवार के सभी लोग सहित गांव के प्रत्येक व्यक्तियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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