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2016 में हो चुकी महाजेनको की जन सुनवाई ! तो फिर 27 जून को क्या .- रमेश अग्रवाल

सुनने में अजीब जरुर लग सकता है लेकिन वास्तविकता यही है कि इस खदान के लिये तो जन सुनवाई 2016 में ही हो चूकी | यह खुलासा किया है जन चेतना सदस्य एवं ग्रीन नोबल प्राइज़ विजेता रमेश अग्रवाल ने | स्वयं महाजेनको ने अपनी ई.आई.ए. रिपोर्ट में इस बात को लिखा है कि जन सुनवाई 29.01.2016 को हो चुकी |


वैसे तो तमनार जिला रायगढ़ स्थित महाजेनको के गारे पेलमा सेक्टर २ की जन सुनवाई पूर्व में 17.04.2018 को आयोजित की गई थी | ग्रामीणों के तगड़े विरोध एवं तत्समय विपक्ष के नेता श्री भूपेश बघेल एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने जन सुनवाई स्थगित कर दी थी | अभी फिर से 27.06.2019 को जन सुनवाई का आयोजन किया गया है |
अब सवाल उठता है कि रायगढ़ जिले में जन सुनवाई हो और लोगों को मालुम न हो ये हो नही सकता | यंहा की जन सुनवाईयां तो ऐतिहासिक होती हैं |
अगर ऐसा नहीं हुआ है तो एक ही बात हो सकती है कि महाजेनको की ई.आई.ए. रिपोर्ट बनाने वाले ने किसी और कंपनी की ई.आई.ए. रिपोर्ट की कॉपी की है और “जन सुनवाई 29.01.2016 ” को डीलिट् करना भूल गये | वैसे ई.आई.ए. रिपोर्ट में कट एंड पेस्ट का खेल आम बात है | ये सभी करते हैं | इन ई.आई.ए. रिपोर्ट के आधार पर जन सुनवाई भी हो जाती हैं और पर्यावरण मंत्रालय मंजूरी भी दे देता है | मामला तब फंसता है जब कोई कोर्ट या एनजीटी चला जाता है |

रमेश अग्रवाल

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