कला साहित्य एवं संस्कृति

आज प्रियंका अनुज की शादी हैं….

? आज प्रियंका की शादी है. ?

हमारी सबसे अच्छी और प्रिय मित्र प्रियंका शुक्ला की शादी हैं .

प्रियंका को बिलासपुर में कौन नहीं जानता ,जहां ,तहां ,यहाँ ,वहाँ हर जन संघर्ष की साथी 2014 में दिल्ली से बिलासपुर आईं थी विधि में स्नातकोत्तर पढने और सबके दिल और दिमाग पर छा गईं.मूलतः कानपुर की रहने वाली अब छत्तीसगढ़ में रचबस गईं हैं.
अनुजश्रीवास्तव ,स्टेज़आर्टिस्ट ,पत्रकार ,कवि ,लेखक और न जाने क्या क्या .
इन दोंनो ने ही एक दूसरे को खोजा है जीवन भर साथ रहने के लिये .
शादी में सब कुछ हैं ,लोक संगीत हैं , जन गीत है . नाट्यदल है और भरी सर्दी में गरम चाय का प्याला भी.
गैर पारंपरिक भी है और परंपराओं का निर्वाहन भी. हल्दी कुम कुम भी ,वरमाला बारात भी और किसी भी धार्मिक ग्रंथ से उत्तम भारत के संविधान की शपथ भी .
बिना किसी बड़े खर्च और आडंबर के भी शादी का शालीन तरीका भी.

आमंत्रण भी अद्भुत . लिखा है हम दोनो आंदोलन के साथी हैं ,गलत को गलत कहना और सही को सही के लिये लड़ना ,इसी से हमारा प्रेम पनपा और यही हमारे रिश्ते कि खुराक़ भी है.

न बैंड बाजा न धार्मिक संस्कार और न फेरे . न दहेज़ न भव्यता और न फूहड़ प्रदर्शन.न कोई मेहमान सब घराती कोई नाराज़ी की गुंजाइश खतम . चूलमाटी हल्दी की परंपरा में प्रियंका कहती है कि हम इस माटी में शराब भट्टी की मिट्टी भी लायेंगे जिसे हम सबने आंदोलन करके बंद करवाया था.

सचमुच प्रियंका ने कई फिजूल की परंपरा को तोड़ा है तो कई परंपरायें स्थापित भी की हैं.

हमारी सबकी शुभकामनायें और प्यार इस शानदार जोडे को.

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