आंदोलन जल जंगल ज़मीन मजदूर

1 जुलाई शहीद दिवस पर भिलाई में विशाल रैली और जनसभा . जुलूस 11 . 30 बजे नियोगी चौक से शुरू होकर 1 . 30 बजे पावर हाऊस , बचत चौक पर आमसभा में परिवर्तित होगी .

दमन एवं निजीकरण के खिलाफ 1 जुलाई 1992 को भिलाई आंदोलन के दौरान 4200 मजदूरों ने जीने लायक वेतन , बेहतर काम के हालात और मजदूर नेता शहीद शंकर गुहा नियोगी की हत्या में न्याय की माँग करते हुये मजदूरों ने रेल रोको आंदोलन किया ।

हजारों की तादाद में मजदूर शहरों और गांवों से निकले , जव जन सैलाब रेल पटरी पर थे तब पुलिस ने बर्बर गोली चालन शुरू किया , 17 मजदूर साथी शहीद हुये और सैकड़ों घायल हुये । आइये इस 1 जुलाई में शहीदों को याद करने के साथ – साथ हम सब ऐसे राजकीय दमन , निजीकरण और हिंसा के खिलाफ मेहनतकश जनता के हुक और राजनैतिक कैदियों के रिहाई के लिये आवाज उठाये । साथियों मजदूरों की मांग क्या थी ? यही जो आज है स्थाई उद्योग में स्थाई काम दो , ठेका प्रथा बंद करो , जीने लायक वेतन दो , 28 वर्ष पहले और आज भी यहीं मांग जारी है और पूरे दुनिया के मजदूरों के लिये मांग बन गई है ।

मजदूरों की जो विशेष मांग रही है श्रम कानून लागू करो , पी . एफ . , ई . एस . आई . , न्यूनतम वेतन व सेफ्टी सुरक्षा लागू करो इत्यादि परंतु आजादी के बाद इतने वर्षों में आज भी मजदूरों की हालात नहीं है । आज जब चारों ओर से शोगित – पीड़ित आम जनता भयावह संकट के दौर से गुजर रही है ऐसे समय में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा समन्वय समिति द्वारा आंदोलन को जनविरोधी निती के खिलाफ आगे बढ़ने व संघर्ष तेज करने की प्रतिबद्धता जाहिर करती है और यहीं शहीदों का सपना है आज समरत मेहनतकश साथियों की जिम्मेदारी है कि शहीदों के सपनों को एक आशा की दृष्टि से देखते हुये हम मजदूर वर्ग के साथी शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी के बताये आंदोलन को याद कर उनकी राह पर चलने का संकल्प लेगें । साथ – साथ राष्ट्रीय आंदोलन में भाईचारा सुनिश्चित करेगें .

मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा करों ।

छत्तीसगढ़ में जनअधिकारों की लड़ाई में अगुवाई करने वाली वकील सुधा भारद्वाज ने पिछले 3 दशकों में जन आंदोलनों में अहम भुमिका निभाई हैं और एक वकील के रुप में उन्होंने अनगिनत मुकदमों में मेहनतकशों का पक्ष रखा है दुर्ग , भिलाई , बलौदा बाजार , हिरमी आदि जगहों में मजदूरों को न्यूनतम वेतन , बोनस और गैर कानूनी तौर पर उन्हें काम से बेदखल करना आदि प्रकरणों में उन्होंने अदालत से दलित शोषित वर्ग के पक्ष में ऐतिहासिक फैसले हासिल किये है कोरया , रायगढ़ , सरगुजा , बस्तर से लेकर राजनांदगाँव और रायपुर तक गैर कानूनी भूमि अधिग्रहण और वन अधिकार संबंधित मुकदमों में आदिवासियों और किसानों को न्याय दिलाया है । स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत रायपुर , भिलाई और अन्य जगहों में शहरी बस्तियों को उजाडकर लोगों को विस्थापित किये जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी है । अन्याय और दमन के खिलाफ जन संघर्षों में सुधा भारद्वाज ने सड़क और कोर्ट की लड़ाई में शामिल होकर साहस के साथ समर्थन दिया है ।

ए . सी . सी . होलसिम सीमेंट कंपनी के 500 श्रमिकों को स्थाई कर्मचारी के केटेगरी पर लाने में बहुराष्ट्रीय कंपनी से बातचीत कर मजदरों एनी मांग दिलाई । ऐरो संघर्षशील और जनहित में अपना पूरा जीवन लगाने वाली सुधा भारद्वाज को भाजपा की सरकार ने नक्सल सहयोगी के नाम पर गिरफ्तार किया है जिससे स्पष्ट है की जनता के हुक और अधिकार के लिये आवाज उठाने वालों को दमनकारी सरकारें गिरफ्तार करती है जो गैर लोकतांत्रिक है , गैर कानूनी है । छत्तीसगढ़ की एवं देश की मेहनतकश जनता मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने रिहाई की मांग पर एकजुट हैं । एक साथ है । वहीं संविधान को दबाने एवं संशोधन करने के घृणित कदम पर रोक लगाने के लिये और लोकतंत्र को बचाने के लिये हमें ऐसे समय में एक व्यापक और मजबूत अदोलन की आवश्यकता है ।

हमें यु . ए . पी . ए . जैसे अमानवीय और गैर लोकतांत्रिक कानूनों को रद्द करने की मांग के लिये आवाज बुलंद करनी है हमें एकजुट होकर साझे मकसद के साथ अपने संघर्षों में एकता लानी होगी । लोकतंत्र पर किये जा रहे हमलों पर रोक लगाने के लिये हमें एक जनआंदोलन का निर्माण करना होगा । बात केवल एक इंसान की रिहाई के लिये नही है सुधा भारद्वाज के रिहाई की मांग हम सबके मूल लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग के बराबर है , असहमति दर्ज करने के अधिकार के क्राबर है , आईये साथ में आवाज उठाकर कहे कि हम अपने अधिकारों को लेकर ही रहेगें ।

मजदूर आंदोलन को तेज करने की अहम जरूरत है .

नजर आंदोलन को कॉमरेड नियोगी के विचारों की अध्ययन करना होगा । वर्ग संधर्भ के इतिहास को समझना होगा । छत्तीसगढ़ में मजदूर वर्ग के लाखों लाख भाई बहन 12 महिने 24 घंटे लोहा , सीट , बिजली बनाते है कोयले , लोहे और चूना पत्थर के खदानों में उतरकर इन किमती संसाधनों को तरसते हैं ऐस और ट्रक चलाते हैं , सड़क , हाईवे , इमारते , कालोनियों , प्लांट और टाऊनशिप बनाते हैं ।

हमें सोचना हैं छत्तीसगढ़ के भविष्य के बारे में क्यों इसने संसाधनों के रहते हुरी अनेक निमारियों से उल्टी , टट्टी , मलेरियां से मौतें होती रही है । युवतियों का व्यापार में रहा है किसान आत्महत्या के लिये मजकूर है शहरों के गरीब मेहनलाश गंदी बस्तियों में गुजर पर रहे हैं ? क्यों यहा की महानदी शिवनाथ , अरपा और ईब नही से किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल पाता ? क्यों नई राजधानी स्मार्ट सिटी के नाम पर किसानों को और शहरी गरीबों की बरती को उजाड़ा जाता है ? क्यों बस्तर में नई खदानें और प्लांट खोलने वैक लिये फर्जी जन सुनवाई , आदिवासियों को जमीन हड़पने सत्तर हजार जवान बस्तर में तैनात किये गरी है रोज – रोज फर्जी मुठभेड़ और यौन हिंसा की खबरें आम हो गई है ? और क्यों आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता , पत्रकार , वकील , यूनिमय नेताओं पर फर्जी मुकदमें चलते है ? इसको बदलने के लिये शहीदों की शपथ लेते हुये मजदूरों , किसानों के मजबूत गठजोड़ से छत्तीसगढ़ के साथ – साथ पूरे देश में असली लोकतंत्र के लिये फिर से लड़ाई तेज करना होगा ।

निजीकरण , मेहतनकश जनता को तबाही की ओर ले जाने का षड़यंत्र वर्तमान में निजीकरणतेजी से बढ़ा , छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिनस्थ भिलाई होटल 25 एकड़ जमीन में फैला हैं जिसे केन्द्र सरकार द्वारा चुपके से इंडियन कॉफी हाऊस को थाली में परोस दिया है जो बहुत ही निंदनीय घटना है एक सार्वजनिक उपक्रम को से टुकड़ों में धीमी गति से निजीकरण की और थकेला जाता है इसकी जीती जागती मिसाल भिलाई है 90 के बाद आई आर्थिक नितियाँ और उसे लागू करने के बहानों की है । भिलाई इस्पात संयंत्र में 2 दशक में तेजी से विभागीय रतर पर लेकाकरण शुरू हुआ , वेंककरण , निजीकरण दिनों दिन बढ़ता जा रहा है केन्द्र सरकार तमाम सार्वजनिक उपक्रमों को निजी कंपनियों के हाथों बेचने से लिये योजना बना चुकी है देश में ऐसे कई अस्पताल , स्कुल निजीकरण पर चला गया है और जब – जब निजीकरण पर सार्वजनिक उपक्रम जाती है तब – तन बेरोजगारों की संख्या बढ़ती है क्योंकि मार्पोरेटों को अपने मुनाफे के लिये युवाओं के रोजगार के प्रति कोई जवाबदेही नहीं होती है । एयरलाइंस से लेकर कई जगहों पर लाखों – लाख युवा बेरोजगार हुये हैं जिससे आत्महत्या भी बढ़ी है.
छत्तीसगढ़ में ही थी . एन . सी . कॉटन मिल राजनांदगाँव जो देश के नामी मचाएवानी उत्पादक कंपनियों में से थी उसे भी बैचलर लोगों को रोजगार किया गया ।

भिलाई इस्पात संरात्र को बेचने की मुहिम शुरू हो गई है आजादी के बाद पहला उद्योग था भिलाई इस्पात संयंत्र और इसी संयंत्र के नाम पर णिलाई शहर को बताया गया जिसमें लाखों – करोड़ों लोगों को रोजगार मिला अब वह पूरी तरीके से छीना जायेगा और भूखमरी के फाए पर लोग खड़े रहेगें । निजीकरण का पूरजोर विरोध करना ही सार्वजनिक उपक्रम को बचाने का एकमात्र रास्ता है ।

आज हमारे देश में आंदोलन की बड़ी बड़ी लहरै उठ रही है क्या ये लहरें इस सड़ी – गली व्यवस्था को ध्वस्त कर पायेगी ? या यह हर व्यवस्था आंदोलन को कुचल डालेगी ? इसका निर्णय भी हम सबको करना होगा आज अगर लहरों की बागडोर सप्ति के निर्माता उत्पादह वर्ग ( मेहनतकशों ) के हाथों में रहेगी तो ही वर्तमान व्यवस्था यस्त हो पायेगी और ए असीम सय शांति की नई बावरा का निर्माण हो पायेगा । अगर यह लहरों की बागडोर पूंजीपति वर्ग के हाथ रहेगी तो दमनकारी व्यवस्था बरकरार रहेगी और जनवाद रस्त होती रहेगी । भूख , बेरोजगारी की काली छाया देश में फैलती रहेगी एवं उत्पादक वर्ग कमज़ोर होता जायेगा इसलिए मेहनतकश ही हाथों में बागडोर लाने की जरूरत है ।

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शहीद का रास्ता अमल की , 1 जुलाई के अमर शहीदों को लाल सलाम जुलूस 11 . 30 बजे नियोगी चौक से शुरू होकर 1 . 30 बजे पावर हाऊस , बचत चौक पर आमसभा में परिवर्तित होगी ।

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विनीत : छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ( समन्वय समिति ) . भीमराव माग , जनक सवार , मशी , लाल भा , भीरा , भगवंतन माई , लखन साह , बाजुम्लर साहू , रमाकांत में जी रु ४ी , तुलसी देवांगन , पुनाराम भादू , शीतन । यादव , दीप , पिला दारा चरा , रमेश निषाद , यांत साह , प्रेमनारायण वर्मा , परमेश्वर , सविन सोनवानी , भुपेन्द्र हिस्दनी , महोकि निषाद , सियाराम साहू , विणा यादव , सोम प धीर सा , छोरीलाल लोधी , गौना , कुमार , मोहन देवांगन , सरीबाटैगम , संतोष राजकपनमै १५ , हरदास , दिलीप पारकर , धरतीयामा , गोविंद निषाद , पुकाई माई गुरे , सिगौर , मंII + प्रागडे , लाला दान निव , मम सिंह , मोकन पशगत भारी , फलेशरम . नन भाई , रामगोपाल गोयल , ती घाण पाल , रगती माई , न मान , होरीलाल , तिल , गहभरी । । प्रबार नाह , मला मानिकपुरी थान सिंह , दामादरमते , ललित मोहनै भन अहिरे , एवन शाह , महेश साहू , पिनपिन , श्रेया , चारगती , पुनी , मल्याण पटेल , नल , उर्मिती कलादाराडेहरिया , चलिश राम , पेन्ट , सुरेन्द्र मोहंती , गंगोत्री , सावित्री शाह ।
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