कला साहित्य एवं संस्कृति

? कोल्हापुर -3 शहर के बीचो बीच 13 सौ साल पुराना / सातवीं सदी / महालक्ष्मी का पुरातात्त्विक मंदिर जिसे मंदिर समिति ने कमाई के चलते असुरक्षित कर दिया. .कन्नड़ के चालुक्य साम्राज्य के संपन्न अवशेष .इसे पूजा पाठ से मुक्त किया जाए .

13 .02.201

कोल्हापुर

गोआ से वापस होते समय विश्व विजय ने सुझाया की पूणे वापसी के समय कोल्हापुर होते चलते हैं , वहां शाहू जी महाराज का संग्राहलय और 7 वीं सदी का एक पुरातत्व मंदिर भी है , पहुचे तो और भी बहुत कुछ मिला
यह मन्दिर 1300 साल पुराना है ,एक बार भूकम्प आने पर यह ध्वस्त हो गया था जिसे 100 साल बाद दुबारा बनाया गया . आज इसकी भव्यता और पुरातन स्थिति को मंदिर समिति ने बर्बाद कर दिया है ,पूरे ढांचे को भोंडे और भडकीले रंगों से उसके सोंदर्य को खराब कर दिया गया हैं,.

 

 

मंदिर को पूजा पाट के लिये खोल देने की वजह से असुरक्षित भी हैं और असुन्दर भी.
मंदिर का शिल्प और पुरातन कला हमारी मूर्ति कला औऱ भवन निर्माण कला अद्भुत है .

कोटक महेन्द्र बैंक के आसिफ मुजावर मुझे यह मन्दिर दिखाने ले गए थे .

मंदिर की जो जानकारी मिल सकी व़ो यह हैं.

महालक्ष्मी मंदिर विभिन्न शक्ति पीठों मैं एक है और कन्नड़ के चालुक्य साम्राज्य के समय में या की करीब ७०० ऐडी में इस मंदिर का निर्माण हो ने का अनुमान किया गया है। एक काला पत्थर के मंच पर, लक्ष्मी की चार हाथ़ौ वाली प्रतिमा, सिर पर मकुट पहने हुए बनाया गया है और गहनों से सजाया हुआ मकुट लगभग चालीस किलोग्राम वजन का है। काले पत्थर में निर्मित लक्ष्मी की प्रतिमा की ऊंचाई करीब 3 फीट है। मंदिर के एक दीवार में श्री यंत्र पत्थर पर खोद कर चित्र बनाया गया है। देवी की मूर्ति के पीछे देवी की वाहन शेर का एक पत्थर में बना प्रतिमा भी मौजूद है। देवी के मुकुट में विष्णु के शेषनाग नागिन का चित्र भी रचाया गया है। लक्ष्मी के चारों हाथों में अमूल्य प्रतीक वस्तुओं को पकड़ते दिखाई देते है। निचले दाहिने हाथ में निम्बू फल , ऊपरी दाएँ हाथ में गदा के साथ ऊपरी दाई हाथ में एक ढाल (एक खेटका) और निचले बाएँ हाथ में एक कटोरे लिए (पानपात्र) देखें जातें है।

पश्चिमी दीवार पर एक छोटी सी खुली खिड़की मिलती है, जिसके माध्यम से सूरज की किरणें हर साल मार्च और सितंबर महीनों के 21 तारीख के आसपास तीन दिनों के लिये मूर्ति पर आती हैं .

इन प्रतिमाओं में से कुछ 11 वीं सदी के हो सकते हैं, जबकि कुछ हाल ही मूल के हैं। इसके अलावा आंगन में स्थित मणिकर्णिका कुंड के तट पर महादेव मंदिर भी स्थित हैं।

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डा. लाखन सिंह कोल्हापुर

8.02.2018

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