कला साहित्य एवं संस्कृति

?? प्रपोज़ डे पर शरद बिल्लोरे को याद करते हुए : शरद कोकास

8.02.2019

शरद बिल्लौरे बहुत खूबसूरत था और कॉलेज के दिनों में एक लड़की से एकतरफ़ा प्यार करता था .. शायद पहला प्यार था उसका .. । शरद ने उस लड़की के साथ आकाशवाणी पर एक कार्यक्रम दिया था और वह उसे अच्छी लगने लगी थी .. लेकिन उस लड़की की दोस्ती किसी और के साथ थी ….हालाँकि वह उससे भी प्यार नहीं करती थी ..।

कॉलेज के दिन थे .. बहुत से युवा आकर्षण को ही प्यार समझ लेते थे .. शरद बाहर से तो बहुत शरारती था लेकिन भीतर से बहुत संकोची .. उसने कभी कहा ही नहीं उससे कि वह उससे प्यार करता है , आज की भाषा मे कहें तो कभी प्रपोज़ नहीं किया ।

हाँ उसके लिए उसने कुछ कविताएँ ज़रूर लिखीं और फिर एक दिन व्यर्थता बोध के साथ फाड़कर फेंक दी ..

यहाँ प्रस्तुत कविता उसके उस पहले एकतरफा प्यार के लिए नहीं है ..। फिर कॉलेज से निकलने के बाद एक और लड़की उसकी ज़िन्दगी में आई ..लेकिन वह प्रेम भी उसका असफल प्रेम रहा ।

शायद यह कविता उसके लिए उसने लिखी हो ..यह प्रेम कविता है या अभाव की कविता ..पता नहीं ..

*

अब जबकि तुम इस शहर में नहीं हो

हफ़्ते भर से चल रहे हैं
जेब में सात रुपये
और शरीर पर
एक जोड़ कपड़े

एक पूरा चार सौ पृष्ठों का उपन्यास
कल ही पूरा पढ़ा,
और कल ही
अफ़सर ने
मेरे काम की तारीफ़ की।

दोस्तों को मैंने उनकी चिट्ठियों के
लम्बे-लम्बे उत्तर लिखे
और माँ को लिखा
कि मुझे उसकी ख़ूब-ख़ूब याद आती है।

सम्वादों के
अपमान की हद पार करने पर भी
मुझे मारपीट जितना
गुस्सा नहीं आया

और बरसात में
सड़क पार करती लड़कियों को
घूरते हुए मैं झिझका नहीं

तुम्हें मेरी दाढ़ी अच्छी लगती है
और अब जबकि तुम
इस शहर में नहीं हो
मैं
दाढ़ी कटवाने के बारे में सोच रहा हूँ।

***

 शरद कोकास

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