अभिव्यक्ति दस्तावेज़ मानव अधिकार

ज़िंदादिल कॉमरेड राजेंद्र सायल की यादें

Rajendra Sayal

26 जनवरी 2020, छत्तीसगढ़ PUCL के अध्यक्ष रह चुके मानव अधिकार रक्षक राजेंद्र सायल की अस्पताल में मृत्यु हो गई. उनका चला जाना, छत्तीसगढ़ में मानव अधिकार आन्दोलन से जुड़े हर  व्यक्ति के लिए किसी अपने के चले जाने के बराबर है. पहले पहल तो इस बात का भरोसा ही नहीं हो रहा था. इस ख़तरनाक दौर में जब सरकार संविधान पर हमले तेज़ करती जा रही है, इस दौर में जब मानव अधिकार की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाहरी और अंदरूनी दोनों ही तरह के हमलों से कमज़ोर करने की साज़िशें हो रही हैं, ऐसे समय में राजेन्द्र सायल का तंदरुस्त होकर वापस मैदान में उतर आना आहूत ज़रूरी था.

रविवार 2 फरवरी की दोपहर रायपुर के पस्तोरल सेन्टर में छत्तीसगढ़ PUCL ने साथी राजेंद्र सायल की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. सभा में प्रदेश और प्रदेश के बाहर से भी संघर्ष के साथी इकट्ठे हुए. जो नहीं आ पाए उन्होंने अपना संदेसा भिजवाया.

सभा का संचालन CMM के कलादास भाई कर रहे थे.श्रद्धांजलि स्वरुप मौन और इन्कलाब के नारे से सभा शुरुर हुई.

कलादास भाई ने बताया कि कैसे एक बार कोर्ट के किसी गलत फैसले का विरोध करने के कारण सायल साहब को जेल हो गई थी. “हम उनके जज़्बों के थे कायल, जिसका नाम है राजेंद्र सायल” ये कहर कलादास ने बारी-बारी सभी वक्ताओं को बोलने के लिए आमंत्रित किया.

दुर्गा झा ने कहा सायल साहब अपने कार्यों के कारण अब भी हमारे बीच ही हैं और हमें उनके कार्यों को आगे बढ़ाना है.

साथी तुहिन देव ने कहा कि “1984 में जब BNC गोली काण्ड हुआ और सायल जी उसकी फैक्ट फैन्डिंग के लिए वहां गए तब से मैं उनके बारे में लगातार सुनता रहा. शुरुआत में उनको लेकर मेरे विचार कुछ अच्छे नहीं थे, मैं उन्हें बाकी NGO वालों की ही तरह समझता था. लेकिन ये सोच तभी तक थी जब तक मेरा उनके साथ ठीक से परिचय नहीं हुआ था. 97 में जब छत्तीसगढ़ PUCL की स्थापना हुई तब मैं उनसे ठीक से मिला और उन्हें बेहतर तरीके से जान पाया.  

साथी इंदु नेताम ने कहा “उनके साथ की इतनी ढेरों यादें हैं कि ज़िक्र करने के लिए किसी एक का चयन करना बहुत मुश्किल है, छत्तीसगढ़ हमेशा उनका ऋणी रहेगा”

डॉ.प्रवीण चटर्जी ने कहा कि वे अपने कॉलेज में आने वाली पत्रिका में राजू सायल जी के लेख और कविताएँ पढ़ते थे. बंधुआ मजदूरों के लिए किए जा रहे उनके कार्यों की ख़बरें उस पत्रिका में छपी होती थीं. 2007 में पहली बार मेरी उनसे मुलाक़ात हुई”

RCDRC के एसएस दीप ने कहा “मेरे लिए ये बहुत कठिन समय है. जिस संस्था से मैं आता हूं सायल जी उसके संस्थापक रहे हैं”

इसी तरह बहुत से वक्ताओं ने सायल जी के साथ  के अपने अनुभव और अपनी यादें साझा कीं. सभा का एक लंबा वीडियो भी हम इस खबर के साथ अटैच कर रहे हैं इसमें आप सभी वक्ताओं की बातें सुन सकते हैं.

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