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हड़ताल चौक में हुई विस्थापितों की महा बैठक-लारा संघर्ष

नियमित रोजगार पुनर्वास एवं मुआवजा पर हुई समीक्षा. भूमि अधिग्रहण हुआ 2012 में तो आयु में भी 7 साल की छूट मिले. बीते 7 सालों में भू-विस्थापितों को हुए नुकसान का आंकलन सेवानिवृत्त जज से हो . पिछली बीजेपी सरकार के ऑपरेशन “”दमन”” से प्रताड़ित आंदोलनकारियों ने न्यायिक जांच की मांग की.

एनटीपीसी लारा परियोजना भू-विस्थापितों के न्याय एवं संघर्ष के स्थल हड़ताल चौक छपोरा में आज सैकड़ों की संख्या में विस्थापित एकत्र हुए। कारण था एनटीपीसी लारा पर योजना के खातिर उत्पन्न हुए समस्या के बारे में विस्तृत चर्चा करना। जिसमें सैकड़ों की संख्या में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं, भू-विस्थापित व परियोजना प्रभावित सम्मिलित हुए।


बैठक के क्रम में सर्वप्रथम एनटीपीसी लारा परियोजना के कारण बिते 7 सालों में उत्पन्न हुई समस्या के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें प्रमुख रूप से मुआवजा, पुनर्वास एवं नियमित रोजगार के संबंध में सभी विस्थापितों ने अपनी समस्याओं को दोहराया एवं समाधान हेतु आगे की रणनीति के लिए गहन चिंतन मनन किया। विदित हो कि लारा-संघर्ष के बैनर तले एनटीपीसी लारा परियोजना विस्थापित लगातार संघर्षरत है तथा सरकार के बदलने से उनके संघर्ष को नया आयाम मिला है। सरकार के कड़े तेवर ने एनटीपीसी लारा प्रबंधन को बैकफुट पर खड़ा कर दिया है तथा रोजगार एवं मुआवजा संबंधित समस्याओं के निपटान के लिए विवश कर दिया है। परंतु विस्थापितों का कहना है कि जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार के कार्य नहीं हुए तथा पुनर्वास नीतियों के अंतर्गत जिस तरह से अधिकार एवं सुविधा मिलनी थी, वह एनटीपीसी लारा प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा रही है।

यही कारण है कि प्रबंधन के ढुलमुल रवैया से एनटीपीसी लारा परियोजना प्रभावितों के समस्या का समाधान नहीं हुआ।
आज इन्ही सभी विषयों को लेकर विस्थापितों ने महाबैठक बुलाई थी और सर्वसम्मति से कई विषयों पर विस्तृत चर्चा किया गया और कई विषय प्रस्तावित किया गया‌। जिसमें 7 माह के अनवरत आंदोलन को दमन करने वाली प्रशासनिक एवं एनटीपीसी अधिकारियों द्वारा निर्दोष ग्रामीणों को जेल भेजने तथा उन पर मुकदमा दायर करने के मामले पर निष्पक्ष जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की मांग की गई।

वर्तमान में जारी हुई भर्ती विज्ञप्ति की विसंगतियों को दूर करने व अधिग्रहण के समय को आधार मानकर उम्र निर्धारण करने की भी मांग की गई। तथापि पुनर्वास राशि लेने वाले भू-विस्थापितों के संबंध में एनटीपीसी एवं प्रबंधन द्वारा स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की गई। इसके साथ साथ पीएपी कार्ड, बेरोजगारी भत्ता तथापि मुआवजा संबंधी भुगतान को यथा शीघ्र पूर्ण करने की भी मांग की गई।


इन सभी के निराकरण के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में अलग से काउंटर खोलने की मांग की गई, जिससे समस्या का त्वरित निराकरण हो सके। यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक समस्या का निराकरण नहीं हो जाता तब तक एनटीपीसी का गेस्ट हाउस तथा वाहन जैसे किसी प्रकार की सुविधा प्रशासनिक अधिकारियों ना लेवे चूंकि इससे प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल की सरकार के प्रशासन पर दाग न लगे। इसके साथ साथ सीएसआर के कार्यों को सार्वजनिक करने तथा बाहरी व्यक्तियों के पुलिस वेरिफिकेशन जैसे मुद्दों को उठाया। साथ ही हड़ताल चौक के धरना स्थल पर स्मारक बनाने के साथ इस आंदोलन में खुलकर सहयोग करने वाले सभी साथियों का सम्मान स्मारक स्थल के पूर्ण होने पर किया जाएगा का निर्णय लिया गया।


लारा-संघर्ष के द्वारा आज की अपनी बैठक में पारित प्रस्ताव से संघर्ष के साथी व किसान पुत्र भूपेश बघेल मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ को भी आगामी जनदर्शन में मिलकर अवगत कराया जाएगा के पूर्व श्री बघेल के नाम से ज्ञापन कलेक्टर, रायगढ़ को सौंपा जाएगा और मांग पूरी करने के लिए अनुरोध किया जाए.
लारा-संघर्ष

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