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सोनी सोरी को दंतेवाड़ा पुलिस ने किया गिरफ़्तार

दंतेवाड़ा. सोनी सोरी को दंतेवाड़ा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. धारा 151 के तहत. एसपी का कहना है कि धरनाप्रदर्शन की अनुमति नहीं थी और उन्होंने नोटिस के जवाब नही दिए हैं. सोनी को अभी उन्हें दंतेवाड़ा लाया जा रहा है एसडीएम के समक्ष पेश करने के लिए.

वेब पोर्टल सबरंग इंडिया ने अपनी ख़बर में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य के दन्तेवाड़ा जिले में जिला पुलिस द्वारा आदिवासियों के बीच आम सभा करने पहुंचीं सोनी सोरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. सोनी सोरी द्वारा गिरफ्तारी वारंट मांगे जाने पर पुलिस ने वहां मौजूद आदिवासियों पर लाठीचार्ज किया और सोनी सोरी को गिरफ्तार कर लिया। यह जानकारी वहां मौजूद पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता लिंगाराम कोडोपी ने दी है.

Soni Sori's arrest on demand by arrest warrant Soni Sori and lathicharge by the police on the tribals.

Posted by Lingaram Kodopi on Saturday, 5 October 2019

लिंगाराम कोडोपी ने इससे पहले फेसबुक के जरिए जानकारी दी थी कि आम सभा को रोकने के लिए पुलिस द्वारा तरह-तरह से नौटंकी की जा रही है. पुलिस द्वारा सोनी सोरी को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रहीं हैं और थाना लेकर जाने को बोल रहे हैं. हजारों आदिवासी आम सभा के लिए आ रहे हैं. पुलिस रोकने की फिराक में है.

लिंगाराम कोडोपी ने आशंका जताते हुए कहा था कि हो सकता है, सोनी सोरी के साथ पुलिस द्वारा पुराने घटना को दोहराया जा सकता है। आप सब से मदद की उम्मीद में——– छत्तीसगढ़ राज्य की कांग्रेस सरकार की हकीकत सामने आ रही है —- देखते रहिये।

छत्तीसगढ़ राज्य के दन्तेवाड़ा जिला में जिला पुलिस द्वारा आदिवासियों के आम सभा को रोकने हेतु तरह-तरह के नौटंकी। पुलिस…

Posted by Lingaram Kodopi on Saturday, 5 October 2019

इस पोस्ट के दो घंटे बाद ही लिंगाराम कोडोपी ने सोनी सोरी को गिरफ्तार किए जाने की खबर दी है। वे वहीं मौजूद थे जिसका वीडियो भी उन्होंने शेयर किया है। लिंगाराम कोडोपी पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो अकसर आदिवासियों के बीच नजर आते हैं। सोनी सोरी भी आदिवासियों के दुख दर्द में हर जगह खड़ी नजर आती हैं। आज वे आम सभा को संबोधित करने वाली थीं जिसे रोकने के लिए जिला पुलिस प्रशासन पूरे प्रयत्न कर रहा था। 

बता दें कि आदिवासियों के साथ नाइंसाफी का सिलसिला काफी लंबे समय से चलता आ रहा है। हाल ही में सरकार बदली तो लगा कि शायद हालात बदलेंगे लेकिन, कुछ ही महीनों में आदिवासियों के साथ वही सिलसिला शुरू हो गया है जो भाजपा राज में हो रहा था। 

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