अदालत

सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के नाम नागरिकों का पत्र ” : महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप न्यायोचित और निष्पक्ष जांच की मांग “

24th April, 2019

प्रति,
भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के नाम,
नई दिल्ली.

To,
The Judges of the Supreme Court of India,
New Delhi.

विषय: महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप न्यायोचित और निष्पक्ष जांच की मांग:

CJI Sexual Harassment case: Seeking a fair and impartial enquiry in accordance with the Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition, and Redressal) Act 2013

भारत के सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीडन और आपराधिक अभित्रास झेलने की शिकायत पढ़कर हम, अधिवक्तागण, अध्येता, महिला समूहों और नगरीय समाज के सदस्य हैरान हैं.

माननीय सुप्रीम कोर्ट के 22 न्यायाधीशों को एक हलफनामा पेश कर इस पीड़ित महिला ने यौन उत्पीडन का विस्तृत विवरण दिया है, जो और किसी के द्वारा नहीं वरन भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया गया है. अपने 29-पन्ने के हलफनामे में इस महिला ने समझाया है कि कैसे वह मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर में नियुक्त की गई थी, व्यवस्थित तौर पर उसे घर और दफ्तर में फ़ोन और संदेशों द्वारा उसका पीछा कर परेशान किया गया; पहले तो शुरू में उसकी तारीफ करके, एहसान और ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान देकर प्रोत्साहित किया गया, और अंत में यौनिक छेड़-छाड़ कर.

और जब उसने मुख्य न्यायाधीश के द्वारा यौनिक छेड़-छाड़ का विरोध किया तो दोनों तरह से प्रशासनिक उत्पीडन का शिकार उसे होना पड़ा, एक तो उसको नौकरी से बर्खास्त कर, और दूसरा उसके और उसके परिजनों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर. हलफनामे में सूचीबद्ध आरोप तो चौंकाने वाले हैं ही, लेकिन इससे बढ़कर चिंता का विषय मुख्य न्यायाधीश की प्रतिक्रिया है: आरोपों से इनकार करने के अलावा उन्होंने इसे “न्यायपालिका की आज़ादी का हवाला देते हुए इसे महान सार्वजानिक महत्त्व” (“great public importance touching upon the independence of judiciary”) का मामला बताते हुए अन्य दो न्यायाधीशों के साथ एक विशेष पीठ का गठन कर 10:30 बजे सुबह सुनवाई की.

संशिप्त में कहा जाए तो उन्होंने अपने खिलाफ ही मुक़दमे की सुनवाई शुरू कर दी! विशेष रूप से गठित बेंच के सदस्य — न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और न्यायमूर्ति संजय खन्ना — ने कहा कि वे कोई आदेश पारित नहीं करेंगे. लेकिन इसके बावजूद, उन्होंने वही किया. आरोपों को “बे-सिरपर के और बदनाम करने वाले” (“wild and scandalous”) बताते हुए, उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसे आरोप न्यायपालिका की आज़ादी को नकारते हैं. उन्होंने मीडिया को समझाईश भी दे डाली कि इस मामले में संयम बरतें. अजीब बात तो यह है कि इस आदेश में मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी का उल्लेख कहीं नहीं है, जिनके इशारे पर यह विशेष पीठ बुलाई गई थी. इसके अलावा, इस आदेश में कहीं भी ऐसा ज़िक्र नहीं है कि इन न्यायाधीशों ने किसी सक्षम अधिकारी की जांच के आधार पर यह आदेश पारित किया हो.

हम इस बात पर और भी अचंभित हैं कि भारत के मुख्य न्यायाधीश और साथ ही विशेष बेंच ने उन आम आदमियों की तरह ही जवाब दिया, जो सार्वजनिक संस्थानों या अधिकार और सत्ता के पदों पर रहते हैं, और जिन पर यौन उत्पीडन का आरोप लगाया जाता है.

आरोपों का खंडन, शिकायत दर्ज करने वाले को बदनाम करना, पुराने इतिहास का हवाला देना, शिकायतकर्ता पर आरोप मढना कि उसकी नियत ठीक नहीं है, ऐसे जाने-माने हथकंडे हैं जो आरोपी पुरुष अपनाते हैं. इसी तरह, शिकायतकर्ता के खिलाफ बदला लेने की भावना से कदम उठाना जिसमें प्रशासनिक उत्पीडन और मानहानि का मुकदमा ठोंक देना, कुछ आम हथकंडे हैं, जो जग विदित हैं.

भारत के सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश ने अपने आचरण से कोई अनोखा उदाहरण पेश करने के बजाय, उन्होंने एक कदम आगे चलकर उस महिला द्वारा यौन उत्पीडन की शिकायत को ही गैर-कानूनी करार दे दिया : उन्होंने यह घोषित कर दिया है कि आरोप अपने आप में ही न्यायपालिका की आज़ादी को कलंकित करने का प्रयास है. ऐसा कदम बचाव करने योग्य तो है ही नहीं वरन साथ ही खतरनाक भी है. हमें समझ में नहीं आ रहा है कि यह मसला कैसे न्यायपालिका की आज़ादी के मुद्दे से जुड़ा है; जागरूक नागरिक होने के नाते हम न्यायपालिका की आज़ादी के प्रति कटिबद्ध हैं. लेकिन इसका कतई यह मतलब नहीं है कि न्यायपालिका की आज़ादी की अवधारणा को इस अंदाज़ में परिभाषित किया जाए कि जब भी ऐसे आरोप लगाये जाएं तो उनको जांच से परे रखा जाये, और आरोपी को प्रतिरक्षा प्राप्त हो (but this ought not to be interpreted to mean immunity from investigation when allegations are made.)

भारत की बार कौंसिल (Bar Council of India) ने यह कहकर इस शिकायत को रफा-दफा कर दिया है कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने का ही एक प्रयास है, और उसे राजनीति से प्रेरित बताया है. हम हैरान हैं कि विधिवत गठित पड़ताल या जांच के अभाव में बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया, अधिवक्तागण और न्यायाधीश कैसे इतनी जल्दी यह निष्कर्ष निकाल लेते हैं कि शिकायत झूठी, बे-बुनियाद और प्रेरित है.

24 अप्रैल को यह बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के अगले वरिष्टतम न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बोबडे को भारत के मुख्य न्यायाधीश ने एक समिति गठित करने को कहा है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीडन के आरोपों की जांच करेगी.

न्यायमूर्ति बोबडे ने एक समिति का गठन किया है, जिसमें वे स्वम इसके अध्यक्ष होंगे, और न्यायमूर्ति एन.व्ही. रमन्ना, और न्यायमूति इंदिरा बनर्जी इसके सदस्य होंगे. इस समिति का गठन जिसमें कोई भी बाहरी सदस्य नहीं है, अपने आप में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम, २०१३ का घोर उल्लंघन है.

मीडिया रपटों के अनुसार यह समिति शुक्रवार 26 अप्रैल 2019 से अपनी सुनवाई शुरू करेगी, लेकिन अपनी कार्यवाही समाप्त करने के लिए इस समिति ने कोई भी समय सीमा निर्धारित नहीं की है और कि यह समिति खुद अपने आप तैयार की गई प्रक्रियाओं का पालन करेगी, और किसी भी पक्ष को अपना कानूनी प्रतिनिधि पेश करने की इज़ाज़त नहीं देगी. हालांकि श्री रंजन गोगोई को किसी कानूनी प्रतिनिधि की ज़रुरत नहीं होगी, लेकिन इस प्रक्रिया से शिकायतकर्ता के खिलाफ संतुलन तो ज़रूर बिगड़ता है; और कि इससे एक बार फिर विशाखा फैसले (Vishakha Judgment) की भावना का ही उल्लंघन होता है, और साथ ही महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम, २०१३ का भी.

इन परिस्थितियों में, और शिकायत की भयावहता को ध्यान में रखते हुए, हम मांग करते हैं कि:

) विश्वसनीय व्यक्तियों की एक विशेष जांच समिति का गठन कर जल्द-से-जल्द एक गहन जांच कराई जाए, और एक ऐसा वातावरण निर्मित किया जाये जो पारदर्शिता के सिद्धांत और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए आत्मविश्वास पैदा करे;

) विशेष जांच समिति को जांच समिति के नियम-कायदों का पालन करना
चाहिए, और इसी पद्दत्ति पर अपनी जांच पूरी करनी चाहिए;

स) जांच पूरी होते तक भारत के मुख्य न्यायाधीश को अपने अधिकारिक
कर्तव्य और जिम्मेदरियों को निभाने से अपने को वंचित रखना चाहिए;

द) शिकायतकर्ता को अपनी पसंद के वकील को नियुक्त कर कानूनी मदद की
अनुमति मिलनी चाहिए;

) जैसा कि कानून में दर्शाया गया है, यह जांच ९० दिनों में पूरी होनी चाहिए.

इन्ही उपायों के ज़रिये न्यायपालिका की आज़ादी और गरिमा बरकरार रहेगी, और ख़ास तौर पर, न्यायपालिका में हर महिला का विशवास, और देश के सभी नागरिकों का विश्वास, बना रहेगा.

हस्ताक्षरकर्ता

1. Rama Melkote, Prof.(Retd) Osmania University
2. Amita Dhanda, Professor, Nalsar, Hyderabad
3. S Jeevan Kumar, Human Rights Forum
4. Flavia Agnes, Advocate
5. Labia, A Queer Feminist LBT Collective Mumbai
6. Chayanika Shah, FAOW
7. V.Geetha, Writer, Chennai
8. Vasudha Nagaraj, Advocate
9. Jayasree Subramanian, Visiting Faculty, HBSE,
Mumbai
10. Veena Gowda, Advocate
11. N. Vasanti, Professor of Constitutional Law,
Nalsar, Hyderabad
12. Mary E John, New Delhi
13. Veena Shatrugna, Former Deputy Director,
National Institute of Nutrition
14. Uma Chakravarti, Historian
15. Sandhya Gokhale, Mumbai
16. Ammu Abraham, Mumbai
17. Nandita Shah, Akshara, Mumbai
18. B. Girija, State Project Manager, Sakhi
Telangana
19. Kabi Sherman, Mumbai
20. Meena Gopalan, Mumbai
21. Hasina Khan, Mumbai
22. Shals Mahajan, Mumbai
23. Rohit Prajapati, Vadodara
24. Forum Against Oppression of Women, Mumbai
25. A. Suneetha, Anveshi Research Center for
Women’s Studies
26. Susie Tharu, Prof.(Retd) EFL University
27. K Sudha, Assistant Professor, DSNLU, Member,
Human Rights Forum
28. K Anuradha, Human Rights Forum
29. Janaki Nair, JNU
30. Sujata Patel, Indian Institute of Advanced Study
31. Sukla Sen, Mumbai
32. Kamayani Mahabal, Mumbai
33. Lara Jessani, Advocate, Mumbai
34. Dr J Vijayalakshmi, Advocate
35. Archana Pydah, Advocate
36. K. Kiran Mayee, Advocate
37. V. Naga Lakshmi, Advocate
38. Sneha Bhogle, Advocate
39. M. Mandakini, Advocate
40. Mohammed Shakeel, Advocate
41. Sherin. B.S, EFL University, Hyderabad
42. Ranjana, Women against Sexual Violence and State Repression, Bhubaneswar
43. Kalpana Karunakaran, IIT Madras
44. B. Girija,
45. Kavitha Muralidharan, Journalist, Chennai
46. Meera Velayudhan, Policy Analyst, Kochi
47. Prema Revati, Educationist
48. Rachana Mudraboyina, Telangana Hijra Intersex Transgender Samiti
49. Karuna, Researcher, Chennai
50. Dr Rukmini Rao, Gramya Resource Centre for Women, Hyderabad
51. Saheli, Women’s Resource Center, New Delhi
52. Vasudha Katju, Researcher, New Delhi
53. K. Satyavati, Bhumika, Hyderabad
54. Aisha Farooqui, Prof. (Retd) Osmania University
55. Swathy Margaret, Researcher
56. S. Ashalatha, Social Activist
57. Sajaya. K, Caring Citizens Collective
58. Vyjayanti Vasanta Mogli, Telangana Hijra Intersex Transgender Samiti
59. Asma Rasheed, EFL University, Hyderabad
60. Tejaswini Madabhushi, Hyderabad for Feminism
61. Uma Bhrugubanda, EFL University, Hyderabad
62. Radhika Khajuria, New Delhi
63. Purwa Bharadwaj, Delhi
64. Yenna Deepa Sai, Advocate
65. Ketki Ranade, Mumbai
66. Asha Achuthan, Mumbai
67. Vineeta Bal, Pune.
68. Anjali Rawat, Law Researcher
69. Anubha Rastogi, Lawyer, Mumbai
70. Madhu Bhushan
71. Aatreyee Sen, Forum for Human Rights and Justice, Himachal Pradesh
72. Pragnya Joshi, PUCL, Udaipur
73. Dr. Albertina Almeida, Advocate, Goa.
74. Vennela Madabhushi, Lawyer, Bangalore
75. Harini Karnamadakala, Content Writer
76. Nari Samata Manch
77. Anuradha Pati, Development Professional
78. Soma KP, Independent Research Scholar
79. Lata Singh, JNU
80. Urmilla Chandran, Principal Technical Writer
81. Sarah Mathews, Sankalp Women’s Support
Alliance
82. Nari Samata Manch, Pune
83. North East Network, Assam, Meghalaya,
Nagaland
84. Kaneez Fatima, Activist and Librarian
85. Kalyani Menon-Sen, Feminist Learning Partnerships
86. Masooma Ranalvi, We SpeakOut
87. Srinivas Vellikad, Senior Manager,
Documentation.
88. S. Seethalakshmi, Researcher
89. Lakshmi Lingam, Professor, Mumbai
90. Sunkara Rajendra Prasad, Advocate,Vijayawada
91. Supriya Jan, CORO India
92. Arundhati Dhuru, NAPM
93. Vahida Nainar, Mumbai
94. Karuna DW, Chennai
95. Sumi Krishna, Independent Scholar, Bangalore
96. Laxmi Murthy, Journalist, Bangalore
97. Meena Seshu, Sangram
98. Jayasree.A K., Professor, Community Medicine,
Govt. Medical College, Kannur,Kerala
99. Shaitan Singh, Law Student, Visakhapatnam
100. Anjana Ramanathan, Advocate
101. Piyoli Swatija, Advocate
102. VS Krishna, Human Rights Forum
103. Smita Gupta, New Delhi
104. North East Network, Assam, Meghalaya,
Nagaland
105. Saheli Women’s Resource Center, New Delhi
106. Geeta Seshu, Journalist
107. Lakshmi Krishnamurthy
108. Reva Yunus, Azim Premji University
109. Ritu Dewan, Vice President at Indian Society of
Labour Economics
110. Sarojini.N, New Delhi
111. Brinelle D’souza, TISS
112. Deeptha Achar, Professor, Baroda
113. Shilpaa Anand, BITS-Pilani,Hyderabad campus
114. Shefali Jha, University of Hyderabad
115. M. Madhavi, Assistant Professor, Presidency
University, Bangalore
116. Kumar Shubham Raj, Advocate, Bihar
117. Vedula Chitralekha, Advocate
118. Bushra Quasmi, Asst Prof, DSNLU,
Visakhapatnam
119. Madhumeeta Sinha, EFL University
120. B Syama Sundari, Dastakar Andhra
121. Abha Bhaiya, Jagori
122. Ambika Tandon, New Delhi
123. Anandhi.S, Researcher, Chennai
124. Dr. M. Ajay, Dermatologist
125. Sumitra, Ankuram
126. Shalini Gera, Advocate, Bilaspur High Court
127. Meera Sanghamitra, National Alliance of
People’s Movements, Telangana
128. Smita Gupta, New Delhi
129. Govind Kelkar, Senior Advisor – Women, Land & Productive Assets
130. Sharmila Sreekumar, IIT, Bangalore
131. P V Srividya, Journalist, Krishnagiri
132. Jayasree Subramanian, Visiting Faculty, HBSCE, Mumbai
133. K. Katyayani, Prof (Retd), Kakatitya University, Warangal
134. Deepa V health Activist, Delhi
135. Sunita Sheel, Forum for Medical Ethics Society, Mumbai; Vidhayak Trust, Pune
136. Anuradha Kapoor, Kolkata
137. Veena Johari, Advocate, Mumbai
138. Mumtaz Sheikh, CORO Mahila Mandal federation Mumbai
139. Rohini Hensman, Writer & Researcher
140. Dr Sagari R Ramdas, Veterinary Scientist
141. Tashi Choedup, Buddhist Monastic, Human Rights Activist
142. Poushali Basak, Mumbai
143. Aditi Joshi, Mumbai
144. Amarjit Singh, Mumbai
145. Kaveri Dadhich, Mumbai
146. Padma, Independent Researcher,Mumbai
147. Abhay. S
148. Cleophas. B
149. Leena. M
150. Sonakshi.K
151. Loshua. S
152. Anurita.P
153. Hitesh. F
154. Shakun Doundiyakhed, Ooty
155. R. Alphonso, Mumbai
156. Neha Singh, Mumbai
157. Shewli Kumar, Mumbai
158. Bharati Kapadia, Mumbai
159. Bindhulakshmi Pattadath, Mumbai
160. Bharathi. G
161. Catrinel Dunca, Ahmedabad
162. Sudhanva. V
163. Nirja Vasavada, Ahmedabad
164. Shumona Goel
165. Mani A., Kolkata
166. Kamaxi Bhate, Mumbai
167. Ariane. B
168. Mehernosh. B
169. Dhruvika. J
170. Haresh. T
171. Rajeev. C
172. Mridul Dudeja, Mumbai
173. Persis. S
174. Pallavi. G
175. Chandanathil. G
176. Lavanya.J
177. Pratishtha. P
178. Satjot. L
179. Margaret. G
180. Jogitha. J
181. Ajit. P
182. Eshvendar. R
183. Aapyayani. K
184. Kavinder. R
185. Doris. L
186. Moruni. M
187. Kavya. S
188. Jayaram. N
189. Ekta. S
190. Samir. P
191. Nandini Rao, Activist, New Delhi
192. Rakhi Sehgal, Labour Activist, New Delhi
193. Gayatri, Faculty, TISS, Hyderabad
194. Abhiti Gupta, Legal Activist, New Delhi
195. Maneka Khanna, Advocate, Delhi
196. Surabhi Dhar, Advocate, Delhi
197. Zeba Sikora, Advocate, Mumbai
198. Rupali Samuel, Advocate, Delhi
199. Payoshi Roy, Advocate, Mumbai
200. Archit Krishna, Advocate, Chattisgarh
201. Satnam Kaur
202. Reethika Ravikumar
203. Mini Mathew, Advocate
204. Sadhna Arya, University of Delhi
205. Fatima N, Tamil Nadu
206. V Rukmini Rao, Hyderabad, Telangana
207. Poorva Rajaram, Researcher, New Delhi
208. Vanessa Chishti, Jindal Law University, Sonipat
209. Esther Moraes, New Delhi
210. Niti Saxena, Lucknow
211. Tusharika Mattoo, Advocate, Delhi
212. Maulshree Pathak, Advocate Delhi
213. Shreya munoth, Advocate, Delhi
214. Sayali Kadu, Advocate, Delhi
215. Shuchi Dwivedi, Advocate, Delhi
216. Rhea Goyal, Advocate, Delhi
217. Sowjhanya Shankaran, Advocate, Delhi
218. Anushree Malviya, Advocate, Delhi
219. Sonal Sarda, Advocate, Delhi
220. Sanya Kumar, Advocate, Delhi
221. Shreya Rastogi, Advocate, Delhi
222. Harshita Reddy, Advocate, Delhi
223. Sanjana Srikumar, Advocate, Delhi
224. Avantika, Advocate Delhi
225. Ninni Susan Thomas, Advocate Delhi
226. Nidhi Rao Gummuluru, Advocate, Delhi
227. Vasundhara Majithia, Advocate Delhi
228. Meghana Sengupta, Advocate Delhi
229. Shailiza Sharma, Advocate, Delhi High Court
230. Kanika Sood, Advocate Delhi
231. Kruti Venkatesh, Advocate, Bombay High Court
232. Bhavana Sunder, Advocate, Bombay High Court
233. Rhea Jha, Advocate, Bombay High Court
234. Devyani Kulkarni, Advocate, High Court, Bombay
235. Khusboo Agarwal, Bombay
236. Sara Ahmed, Bombay
237. Surabhi Singh, Advocate, High Court at Bombay
238. Ronita Bhattacharya, Advocate, High Court, Bombay
239. Jahnavi Vishwanath, Chennai
240. Janaki Abraham, Delhi University
241. Dimple Oberoi Vahali
242. Vandana Mahajan, A Feminist Practitioner
243. Lalita Ramdas, Educator and Citizen, Alibag, Maharashtra
244. Bebaak Collective
245. Chitra Sinha, Centre for Gender Research, Uppsala University, Sweden
246. Sana Contractor, Public Health Researcher, New Delhi
247. Vasudha Sawaiker, Social Justice Action Committee, Goa
248. Amita Kanekar, Writer, Goa
249. Adsa Fatima, Health Activist, Delhi
250. Dr Mira Shiva
251. Dr. Saswati Ghosh, Academic and Activist, Kolkata
252. Amita Pitre, Consultant, Public Health and Gender Justice, Mumbai
253. Gayatri Singh, Senior Advocate, Bombay High Court
254. Nisha Biswas, Kolkata
255. Bindhulakshmi, Mumbai
256. Kiran Shaheen
257. Radhika Desai, Hyderabad
258. Ritu Dewan, Mumbai
259. Purnima Gupta, New Delhi
260. Shashi Sail, Chhattisgarh Mahila Jagriti
Sangathan, Raipur
261. Rajendra K Sail, HRD, Raipur

262. Dr. Lakhan singh Pucl chhattisgarh 

 

(अंग्रेज़ी मूल से अनुवादित. सुविधा की दृष्टिकोण से हस्ताक्षरकर्ताओं के नामों को अंग्रेजी मूल में ही दर्शाया गया है.) – rajendrasail@gmail.com

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