मानव अधिकार

सुकमा पुलिस द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नाम का दुरूपयोग

सुकमा पुलिस ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नाम का उपयोग करके झूट फैलाया , पोडियाम पण्डा के बयान के खिलाफ उसकी पत्नी पोडियाम मुये के वकीलों को बदनाम करने के लिए गलत बयानी की .
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पिछले दिनों सुकमा पुलिस के में एएसपी  जितेन्द्र शुक्ल ने पोडियाम पण्डा द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपने आत्म समर्पण के सम्बन्ध में बयान दिया ,लेकिन सुकमा के एएसपी द्वारा तुरंत ही न केवल वादियों के वकील से अभद्र व्यवहार किया बल्कि उसी दिन शाम को शोसल मिडिया पर और पुलिस विज्ञप्ति में लिखा की पडा ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बयान दिया कि उसकी पत्नी को वकील सुधा भारद्वाज ,शालिनी गेरा ,ईशा खंडेलवाल और नंदनी सुन्दर ने  बंदी बना लिया है और इसकी शिकायत उसने पुलिस में भी की है .
दूसरे दिन ही  वकीलों  की संस्था आल इण्डिया लायर्स यूनियन ने प्रेस काफ्रेंस करके इसका खंडन भी किया और कहा की पुलिस वकीलों को डराना चाहती है जिससे कि वह आदिवासियों के पक्ष में खड़े न हों.

अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का उस दिन का  अंतिम आदेश प्राप्त किया गया है ,जिसमें पडा के बयान में एसा कहीं भी नही कहा गया है , ” सलंग्न ”

वकिलो ने इस अभद्रता की शिकायत सभी समुचित स्थानों पर कर दी है .
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कृपया आदेश पढ लीजिए .

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