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सीबीए की मांग:गारे पेलमा सेक्टर-2 की लोकसुनवाइ रद्द की जाए

आज रायगढ जिले के तमनार तहसील ग्राम डोलेसरा में महाराष्ट्र पावर जनरेशन कंपनी की कोयला खदान के पर्यावर्णीय स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई का प्रभावित 14 गांवों के 3000 से अधिक ग्रामीणों ने भारी विरोध किया। ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देते हुए छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने इस लोकसुनवाई को निरस्त करने की मांग की ।

इस खनन परियोजना का प्रभावित ग्रामीण शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। आज होने वाली लोक सुनवाई के स्थल को ग्रामीणों चारों ओर से घेर रखा था ताकि कंपनी के दलालों से धन लेकर कोई भी खदान के पक्ष में दलाली न कर सके। विदित हो कि भले ही खदान महाराष्ट्र सरकार की है परंतु इसके खनन विकास और संचालन (MDO, mine, develop, operate) का अधिकार गौतम अडानी की कंपनी के पास है।

लगभग 2500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले इस खदान आबंटन के खिलाफ प्रभावित सभी गावों की ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव पारित किया था, परंतु पिछली भाजपा सरकार और अडानी ने ग्राम सभाओं की अस्वीकृति को नजरअंदाज करते हुए वर्ष 2018 में लोकसुनवाई आयोजित करने की कोशिश की जिसके खिलाफ ग्रामीणों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था और उस आंदोलन का समर्थन करने वर्तमान मुख्यमंत्री और तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री भूपेश बघेल स्वयं तमनार आकर इस लोकसुनवाई और सम्पूर्ण खनन परियोजना को निरस्त की मांग रखी थी।

Posted by Alok Shukla on Friday, 27 September 2019

रायगढ़ जिले में तीन बड़े लौह संयत्र के साथ-साथ अनेक प्रदूषणकारी कारखाने हैं। साथ ही एसइसीएल जिंदल आदि की कोयला खदानें हैं जिससे आसपास का पूरा इलाका कोयले के महीन धूल और कार्बन डाइऑक्साइड कार्बन मोनो आक्साईड जैसे जहरीले गैसों से प्रदूषित है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने इस क्षेत्र मे अब एक भी नए कारखाने अथवा खदान न खोलने की सिफारिश की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावशाली उपाय किए बिना नए खदान नहीं खोलने के निर्देश दिए हैं।

परंतु अडानी के दबाव में केंद्र सरकार के साथ साथ अब छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भी 26 मिलियन टन सालाना क्षमता वाला नया खदान खोलने की कोशिस में है।

गारे पेलमा 2 कोल ब्लॉक की पर्यवर्णीय स्वीकृति हेतु आयोजित लोकसुनवाई का भारी विरोध । ग्रामीणों ने कहा प्रशासन अडानी के एजेंट की तरह कार्य कर रहा हैं।

Posted by Alok Shukla on Friday, 27 September 2019


जिस तरह दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा पर स्थित अमेजन के जंगल सांस लेने के लिए जरूरी है ठीक उसी तरह से भारत के लगभग बीच से गुजरने वाली कर्क रेखा के ईर्द गिर्द के घने जंगल देश का श्वसन तंत्र है और उत्तरी एवं उत्तर पूर्वी छत्तीसगढ़ के ये घने जंगल जिन्हे हसदेव अरण्य व मांड रायगढ़ क्षेत्र कहते हैं और जो नर्मदा नदी, गंगा बेसिन और महानदी बेसिन की नदियों का जलग्रहण क्षेत्र है, यदि यह जंगल कटते हैं तो नर्मदा सोन सहित हसदेव, मांड महानदी जैसी नदियां मर जाएंगी और इस क्षेत्र का तापमान भी 3-4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा।

गारे पेलम सेक्टर-2 कोल ब्लाक के अवैध आबंटन का विरोध करने जुटे 14 गाँवों के लोग

आज होने वाली गारे पेलमा कोल ब्लॉक सेक्टर 2 आबंटन का विरोध कर रहे ग्रामीणों को पुलिस सुनवाई स्थल के अंदर नहीं जाने दे रही है.आज ग्राम दोलेसरा, तमनार जिला रायगढ़ में 14 गांवो को प्रभावित करने वाली जनसुनवाई होने वाली है जिसके लिए दूर गांवों सैकडों ग्रामीण आए हैं. ये लोग जबरन हो रही इस जनसुनवाई का विरोध कर रहे हैं इसलिए पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें अंदर जाने से रोका जा रहा है. उनकी जमीन से उनको ही बेदखल किए जाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है. गांव की महिलाओं ने गेट को रोक के रखा है ताकि और कोई ना जाए.

Posted by सीजी बास्केट on Thursday, 26 September 2019

इस बात को स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के मदनपुर मे छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के मंच पर स्वीकार किया था। परंतु राज्य में सरकार बनने के बाद लगता है चुनावी धन के आगे पर्यावरण की चिंता नगण्य हो गई।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार से मांग करता है कि वह गारे पेलमा 2 की पर्यावरण जन सुनवाई रद्द करे और ग्राम सभाओं के प्रस्तावों का सम्मान करते हुए पांचवी अनुसूचित क्षेत्रो में खनन परियोजनाओं पर रोक लगाए।

नंदकुमार कश्यप, आलोक शुक्ला (छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन)

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