अदालत महिला सम्बन्धी मुद्दे

सीधे सादे प्रेम विवाह को सबने मिलकर अपने अपने हिस्से का ज़हर बो कर नष्ट कर दिया.हाईकोर्ट ने किया हस्तक्षेप.

बिलासपुर / युवक ( मो.इब्राहिम) और युवती दोनों एक दूसरे से प्रेम करते है ,युवक मुस्लिम से अपना धर्म परिवर्तन आर्य समाज में जाके किया और अपना धर्म परिवर्तन कर अपना नाम आर्यन आर्य रख लिया

धर्म परिवर्तन करने के बाद वह रायपुर आर्य समाज में पिछले वर्ष जाकर विवाह कर लिया युवती से , जब युवती के पिता को यह पता चला की उसकी लड़की ने युवक से प्रेम- विवाह कर लिया है

तो पिता अपनी लड़की को घर ले लाया और जब युवक अपनी पत्नी को जब लेने गया तो ससुराल वाले नही ले जाने दिए बलपूर्वक रोक लिये

और रोके जाने पर लड़की के पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दिया ।

युवक ने कहा की मैंने हिन्दू धर्म अपनाने के बाद आर्य समाज मंदिर में शादी की है

युवक ने कहा कि लडक़ी के पिता मेरी पत्नी को बंधक बनाकर रखा हैं , पत्नी को मुक्त कराने की युवक ने बात कही ,कानून कार्यवाही करने के लिये आगे आया.

बिलासपुर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर युवती को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया ।

सुनवाई होने के बाद हाईकोर्ट ने स्थिति साफ नही होने तक युवती को बिलासा कन्या महाविद्यालय के हॉस्टल में रहने का आदेश दिया ।

परिवार वाले युवती को हास्टलों से फिर साथ ले गए .इसी मामले को लेकर पति ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी पेश किया ।

लडक़ी के पिता इसी मामले को लेकर हाइकोर्ट में तीन अलग अलग याचिका दाखिल किया

पिता ने कहा की लड़की की मानसिक स्थिति ठीक नही का चिरपरिचित बहाना बनाया.
तो कोर्ट ने तीन विशेषज्ञ डॉ. की टीम से जाँच की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया ।

लगभग मामला शान्त लगने लगा था की
फिर युवती की छोटी बहन ने हाइकोर्ट को पत्र लिखकर बताया की पिता बड़ी बहन को एक कमरे में बन्द कर रखा है तथा उसे प्रताड़ित किया जा रहा है,जिससे युवती मेंत्रकी जीने के इच्छा समाप्त हो गयी है .

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने पत्र को बड़ी गंभीरता से लिया और सच्चाई जानने प्रेम-विवाह को लेकर पेश किये हुए सभी मामलो को सुनवाई के लिए रखने तथा युवती को पेश करने का आदेश दिया था .

सुरक्षा के मध्य युवती को कोर्ट के आदेश पर चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की डीबी में पेश किया गया। सीजे ने अपने कक्ष में अधिवक्ताओं की उपस्थिति में युवती से बात की ।

युवती ने साफ सब्दो में कहा की मुझे नही जाना माता-पिता के साथ इस पर कोर्ट ने अच्छे से विचार करने के लिए समय देते हुए युवती को सखी सेंटर में रखने का आदेश दिया है।
हांलाकि यह तो प्रश्न बनता ही हैं कि जब युवती अपने पिता के साथ जाना नही चाहती थी तो दुबारा सोचने के लिये 15 दिन का समय का औचित्य क्या है.

लड़की को 8 अगस्त को पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अब इस साधारण प्रेम विवाह को युवती के पिता ने ज़हर बना दिया और एक जिम्मेदार अखबार ने बार बार लव जिहाद लिखा ।

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