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सीताराम से खीजी शकुनि ब्रिगेड. : बादल सरोज

शास्त्रोंसे डरे_शकुनि

सीताराम_येचुरी द्वारा भोपाल और रीवा की सभाओं में मौजूदा खलमण्डली की तुलना रामायण-महाभारत के हिंसक दुष्टों से किये जाने पर (अम्मा के शब्दों में कहें तो) “सूप बोले तो बोले चलनी भी बोल उठी – जा में 72 सौ छेद”

सीताराम येचुरी ने भोपाल में अपने संबोधन में जो कहा उसके बहाने हिंसा, झूठ और फरेब के जरासंध अवतार हायतौबा मचा रहे हैं ।
सुनते है शकुनि के आधुनिक अवतार कारोबारी बाबा भी अपने प्रपंच के साथ कूद पड़े हैं ।
● कुल-गिरोह भड़भडी में है । अब उसे महाभारत और रामायण से भी डर लगने लगा है । उसे लग गया है कि सिर्फ ताजे इतिहास में काटा पीटी से काम नहीं चलेगा । महाभारत और रामायण, स्मृति और पुराण भी दोबारा लिखने होंगे । ताकि यह गिरोह अपनी जघन्य और बर्बर हिंसा पर आवरण डाल सके । आखिर सीताराम ने कैसे कह दिया कि हमारे शास्त्रों में भी हिंसा करने वालों का जिक्र है ।
● अब महाभारत पढ़ते में या तो कहना होगा कि सनातनी कंस हिन्दू नहीं था या फिर बताना होगा कि उसका अपनी बहन को कारागार में रखना, जेल में ही प्रसूति कराना, फिर एक एक करके अपनी नवजात भांजियों को जमीन पर पटक पटक कर मारना हिंसा नहीं थी – मामा के हाथों संपन्न 8 कुंडीय मोक्षप्रदायिणी यज्ञ थी ।
● कि न लाक्षागृह में पांडवों को जलाकर मार डालना (जिसमे दूसरे 5 मारे गये) हिंसा थी न दुर्योधन के भरे दरबार में द्रौपदी का चीरहरण हिंसा थी ।
● असल मे तो महाभारत का पूरा युध्द ही हिंसा नहीं है – कौरव पांडवों के साथ लूडो और पब्जी खेल रहे थे । भीष्म पितामह तो खेल की धीमी गति से बोर होकर मर गये थे ।
● कि रावण एक शुध्द अहिंसक हिन्दू थे । न सीता का अपहरण हिंसा थी, न जटायु की ह्त्या हिंसा थी, न पूरा युध्द हिंसा थी ।
(बाकी और भी है किन्तु फिलहाल यात्रा में हैं, इसलिये इतना ही ।)
● भोपाल से ठीक एक दिन पहले #रीवा की सभा में #सीताराम_येचुरी ने महाभारत के रूपक में कहा था कि देश के मौजूदा राजनीतिक हालात में कौरव अपने संख्याबल पर इतरा रहे हैं – वे भूल जाते हैं कि आखिर में जीते पाण्डव ही थे । उन्होंने कहा था कि होने को कौरव पूरे एक सौ भाई थे, मगर आम लोगों को सिर्फ दो नाम ; #दुर्योधन और #दुःशासन के ही याद हैं । इसी तरह आज के कौरवो में भी दो ही नाम याद है : #मोदी और #शाह ।
● कल से महाभारत का कौरव कुनबा सीताराम के पीछे पड़ा है । आज तो कारोबारी शकुनि भी कूद पड़े ।
● कितने डरते हैं ये आईने से ; शास्त्रों और पुराणों में भी कहीं अक्स दिख जाए तो बिलबिला उठते हैं । असल में मुसोलिनी से संगठन और फासिज्म, हिटलर से गणवेश, ध्वजप्रणाम और किताब लेकर आये ठगों को पौराणिक खलनायकों में उन्हें अपना अक्स दिखाई देता है । इन्हें डरने दीजिये । न इतिहास में कभी ये जीते हैं न भविष्य इनका है ।

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सीताके पीछे_पड़े

शास्त्रों से डरे_शकुनि

सीताराम_येचुरी द्वारा भोपाल और रीवा की सभाओं में मौजूदा खल मण्डली की तुलना रामायण-महाभारत के हिंसक दुष्टों से किये जाने पर (अम्मा के शब्दों में कहें तो) “सूप बोले तो बोले चलनी भी बोल उठी – जा में 72 सौ छेद” ।

● कारपोरेटी बाबा – 6 वेदों* और 128 उपनिषदो** के ज्ञाता – प्रातः, अपरान्ह, सांध्य, रात्रि सदैव अनस्मरणीय लाला रामदेव भी उछल पड़े कि हिन्दू परम्परा में हिंसा !! ना जी ना !!
● अपने जिस गुरु की कथित गुमशुदगी (ह्त्या) के मुकदमे वे लिप्त थे वह हिंसा थोड़े ही थी । वह असल में आश्रमकब्जासन था । इसकी जाँच को बन्द करवाने के लिए एन डी तिवारी से मोदी तक जो बार बार आका बदले वह सामवेद की ऋचाओं के अनुरूप किया गया अनुष्ठान है ।
● देवास के आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की ह्त्या सांस्कृतिक कार्यक्रम था जिसमे मालवी लोकगीतों की प्रतियोगिता के दौरान सुर न साध पाने के चक्कर में जोशी जी खेत रहे थे । वही जोशी जिनकी ह्त्या के मुकदमे में खुद भाजपा की शिवराज सरकार ने रामदेव की आराध्या और संघ की सिफारिश पर बनी भाजपा प्रत्याशी को गिरफ्तार कर “यातनाएं” दी थीं ।
● सावधान रहिये ; ठगों की इस हुआँ हुआँ के पीछे असली मंशा है जनता, अर्थनीति, विदेशनीति पर भेड़ियों के अपराधों को छुपाना । और इस तरह अपने जघन्य कर्मों के लिए हिन्दू हिन्दू चिल्लाकर हिंदुओं के 99% हिस्से की आड़ लेना ।
● चार चरण हो गये – पांचवां कल है, यह छल चलेगा नहीं ।
( *वेद चार ही हैं । दो एक्सट्रा तो लाला रामदेव के हैं ; सलवार वेद और धंधा वेद !! ** उपनिषद 118 ही हैं । बाकी 10 तो लाला के प्रोडक्ट्स हैं जिन्हें वे उपनिषद से कम नहीं मानते ।

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