अदालत महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार

सीजेआई ने की खुद दाखिल याचिका ,न्यायमित्र नियुक्ति : 6 माह में 24000 बच्चियों से रेप , सख्त दिशा – निर्देश की तैयारी मेंं .

patrika . com

नई दिल्ली . देशभर में 2019 के शुरुआती छह महीनों में ही बच्चों से बलात्कार के 24000 मामले सामने आने से आहत सीजेआई रंजन गोगोई ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है । मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील वी गिरी को न्याय मित्र नियुक्त किया ।

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी सुनवाई में मदद करने का निर्देश दिया । याचिका की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई , जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ करेगी । अदालत ने रजिस्ट्री को मामले का रिपाट किए गए बाल बलात्कार की घटनाओं की संख्या में फिर से खतरनाक वृद्धि के शीर्षक से दर्ज करने का निर्देश दिया । देश के सभी हाईकोर्ट से आंकड़े भी मंगवाए हैं । पीठ ने कहा कि मामले में किसी प्रकार से हस्तक्षेप मंजूर नहीं होगा । कोर्ट ने गिरी को बाल बलात्कार के आंकड़े देकर कहा है कि वे इनका अध्ययन करके सोमवार को इसक बारे में सुझाव दें कि कोर्ट क्या निर्देश जारी कर सकता है ।

मात्र 4 % मामलों में फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस वर्ष के शुरुआती 6 माह में बच्चों से दुष्कर्म के 24 , 212 मामले सामने आए , इनमें से 11 , 981 में अभी जांच चल रही है । 12 , 231 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है , लेकिन मात्रा 6 , 449 मामलों में ही सुनवाई शुरू हो सकी है । जबकि 4 , 871 मामलों में अभी सुनवाई शुरू होनी है । निचली अदालतों में मात्र 911 मामलों में ही फैसला हुआ है जो मात्र 4 है

पुलिस की लापरवाही भी जिम्मेदार

बच्चों से रेप के संवेदनशील मामलों में पुलिस की लापरवाही को भी जिम्मेदार बताया गया है । बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के 50 फीसदी से ज्यादा यानी 1779 मुकदमों की जांच तक अभी पूरी नहीं हो सकी है । इस सूची में मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है , लेकिन पुलिस 1841 मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है । प्रदेश की निचली अदालतों ने 247 मामलों में तो ट्रायल भी पूरा कर लिया है ।

छत्तीसगढ़ में 1285 केस

युपी 3 . 457 ( सबसे ज्यादा ) ,
मप्र 2 , 389 ,
राजस्थान 1 , 992 ,
महाराष्ट्र 1 , 940 ,
प . बंगाल 1 , 551
, छग 1 , 285 ,
कर्नाटक 1 , 113
, गुजरात 1 , 124
, तमिलनाडु 1 , 043 ,
केरल 1 , 012 ,
ओडिशा 1 , 005
तेलंगाना 928 ,
असम 904 ,
नगालैंड 9 ( सबसे कम ) .

मंजूरी : 18 राज्यों में खुलेंगी 1023 फास्ट ट्रैक अदालतें.


उधर , केंद्रीय महिला एवं बाल । विकास मंत्रालय ने 18 राज्यों में 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने । के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है । इन्हें स्थापित करने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के पास होगी , ये अदालतें अगले साल तक काम करना शुरू कर देंगी । इनमें महिला के यौन उत्पीड़न और बाल अपराधों से जुड़े पॉक्सो एक्ट के मामलों की सुनवाई होगी । फिलहाल , देश में 664 फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रही हैं ।

कानून का डर नहीं रहा

राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय 5 मीडिया में हालिया रिपोर्टों से जाहिर है कि ऐसे मामलों में दोषियों को सजा दिलाने व कानून लागू करने में विफलता । से कानून का डर गायब होता जा रहा है । –

सीजेआई गोगोई

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