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सायकल से छत्तीसगढ़ आ रहे मजदूर दंपत्ति को गाड़ी ने कुचला, दो बच्चे हुए अनाथ

लखनऊ में रोजी मजदूरी करने गए छत्तीसगढ़ के कृष्णा साहु और उनकी पत्नी अपने दो छोटे बच्चों के साथ लखनऊ से वापस घर आने के लिए सायकल से निकले थे. घर याने छत्तीसगढ़ आने के लिए निकले थे. और सायकल से इसलिए निकले थे क्योंकि हमारी सरकारें निकम्मी हैं, बेशर्म हैं.

बुधवार की रात लखनऊ के शहीद पथ पर कृष्ण साहू की सायकल को किसी अज्ञात गाड़ी ने कुचल दिया. दोनों पति पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई. उनके बच्चे अब अनाथ हो गए हैं. किसी ग़रीब के बच्चे का अनाथ हो जाना कितनी बड़ी त्रासदी है, हममें से अधिकतर शायद इस बात को समझ ही न पाएं.

फिलहाल दोनों बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं. लोहिया अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है, ख़बरों के मुताबिक मूल रूप से छत्तीसगढ़ का रहने वाला 35 साल का कृष्णा जानकीपुरम इलाके में झोपड़पट्टी में परिवार समेत रहता था.

पति-पत्नी राजधानी लखनऊ में अलग-अलग जगह पर जहां काम मिलता था वहां मजदूरी करते थे। लॉकडाउन का एक लंबा समय इस परिवार ने काट लिया था, लेकिन पैसे की किल्लत होने के चलते कृष्णा ने फैसला किया कि वह अपने घर छत्तीसगढ़ जाएगा। जिसके बाद साइकिल से ही अपनी पत्नी और दो बच्चों को लेकर जानकीपुरम से छत्तीसगढ़ के लिए निकल पड़ा।

फ़ोटो सौजन्य : रमा ब्रेकिंग

लखनऊ के शहीद पथ पर किसी अज्ञात वाहन ने कृष्णा की साइकिल में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। चारों साइकिल समेत उछलकर सड़क पर गिर गए।कृष्णा और प्रमिला को गंभीर चोटें आईं जबकि दोनों बच्चे भी घायल हो गए थे। वहां से गुजर रहे लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सभी को अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान कृष्णा और प्रमिला ने दम तोड़ दिया।

रमा ब्रेकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक डीसीपी ईस्ट सोमेन वर्मा ने बताया कि सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में शहीद पथ पर बुधवार देर रात का यह हादसा है, जिसमें मूल रूप से छत्तीसगढ़ निवासी कृष्णा और उसकी पत्नी प्रमिला की मौत हुई है. जबकि उसके दो बच्चे 3 साल का बेटा निखिल और 4 साल की बेटी चांदनी घायल हैं। दोनों को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

चंदा कर किया अंतिम संस्कार

ख़बरों के मुताबिक हादसे की सूचना पाकर कृष्णा के परिजन लखनऊ पहुंचे और शवों का अंतिम संस्कार कराया. कृष्णा के भाई राजकुमार के अनुसार लॉकडाउन के चलते कृष्णा के पास कोई काम नहीं था. उसके पास बचत के पैसे थे जो बीते दिनों खर्च हो चुके थे. राजकुमार के पास भी आर्थिक तंगी के चलते शवों के अंतिम संस्कार का पैसा नहीं था, तब कुछ मजदूरों ने चंदा करके 15 हज़ार रुपये जुटाए, जिसके बाद देर शाम गुलाला घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया.

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