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सरगुजा ,अदानी : कोल_भ्रष्टाचार_कथा_अनंता : संजय पराते   .

https://www.bbc.com/hindi/india-47672198

 

◆ *Alok Putul* के जरिये *#बीबीसी* की तथ्यपरक रिपोर्ट को जरूर पढ़ें. चाहे कांग्रेस राज हो या भाजपा, यह कोयला क्षेत्र में पसरे भ्रष्टाचार की अनंत कथा कहती है.

◆ कांग्रेस-संप्रग के समय का कोलगेट कांड याद होगा आपको. भाजपा ने एक विपक्षी पार्टी के रूप में काफी हल्ला मचाया था. वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने कोयला खदानों को लेकर व्यवस्था दी थी कि कोयले का खनन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के नियंत्रण में ही किया जा सकता है.

◆ लेकिन इस निर्णय को लागू करने की जिम्मेदारी अब भाजपा-राजग पर थी. उसने कांग्रेसी खेल को ही जारी रखा और इसके लिए एमडीओ — माइन डेवलपर-कम-ऑपरेटर — का रास्ता निकाला. भाजपा की मोदी सरकार के दबाव में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने कोयला खनन में अनुभव का हवाला देकर इन निजी कंपनियों को एमडीओ बनाकर इन खदानों को सौंप दिया, जबकि एमडीओ का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भावना के ही खिलाफ था. इसका सीधा अर्थ है : कोयला खदान का आबंटन तो दिखावे के लिए सार्वजनिक क्षेत्र को कीट जाए, लेकिन खदान और खनन पर वास्तविक नियंत्रण निजी कंपनियों का ही होगा. कोलगेट-1 के खिलाफ लड़े सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव इसे कोलगेट-2 करार देते हैं.

◆ छत्तीसगढ़ में तब की भाजपा सरकार ने इस रास्ते का अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया. तब की विपक्षी कांग्रेस ने इसका तीखा विरोध किया और इसे अभी के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तब के मार्च 2016 में किये गए ताबड़तोड़ ट्वीटों में भी देखा जा सकता है.

◆ राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद सरगुजा के बाद अब कोरबा जिले की गिधुमुड़ी और पतुरिया कोयला खदानें भी बरास्ता एमडीओ अडानी को सौंप दी गई. इस प्रकार, अब छग की 5 कोयला खदानें उसके पास हैं. अडानी के लिए रास्ता साफ करने का अब यह काम उस कांग्रेस राज में हो रहा है, जिसने विपक्ष में रहते इसका तीखा विरोध किया था.

◆ लेकिन तब की भाजपा सरकार की तरह ही अब की कांग्रेस सरकार भी एमडीओ की दर व शर्तों को सार्वजनिक नहीं कर रही हैं. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के आंकलन के अनुसार, इन कोयला खदानों से अडानी को छत्तीसगढ़ में 12.5 लाख करोड़ रुपयों का मुनाफा होने और इतना ही सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का अनुमान है.

साफ_है_कि_निजीकरण_और_उदारीकरण_की_नीतियों_के_क्रियान्वयन_पर_दोनों_पार्टियों_में_कोई_अंतर_नहीं_हैं.
विरोध_का_दिखावा_तो_केवल_विपक्ष_में_रहते_होता_है.

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