आंदोलन विज्ञान

सरकार शिक्षाकर्मियों की सभी जायज मांगों को अविलंब पूरा करें : शिक्षा कर्मियों के नाम पर राज्य के पढ़े लिखे युवाओ के प्रतिभाओ एवं उनकी योग्यताओ का शोषण कर रहीहै सरकार -छत्तीसगढ़ कांग्रेस.

23.11.2017

शिक्षा कर्मियों के नाम पर भाजपा सरकार राज्य के पढ़े लिखे युवाओं के प्रतिभाओं और उनकी योग्यताओं का 14 वर्षों से केवल और केवल शोषण कर रही है ।समान योग्यता और समान कार्य के बावजूद देय वेतन व अन्य समतुल्य शासकीय सुविधाओं को देने के मामले में सरकार का रवैया राज्य की 1 लाख 80 हजार शिक्षाकर्मियों के साथ असहयोगात्मक एवं पूरी तरह दमनात्मक है।

हम भाजपा और उनकी सरकार से पूछना चाहते हैं कि आपने खुद अपने 2003 की चुनावी घोषणा पत्र में शिक्षाकर्मी के सभी मांगों को तत्काल निराकरण करने की बातें कही थी यही नही 2008 के भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में शिक्षा – कर्मियों को शासकीय कर्मचारियों की तरह ही पूरा वेतन और अन्य सुविधाएं देने का वादा किया गया।किन्तु 14 साल तक लगातार राज्य में सत्तासीन होने के बावजूद शिक्षा कर्मियों को अपनी इन्ही जायज़ मांगों को लेकर बार-बार क्यो सड़को पर उतरना पड़ रहा है?, क्यों आप अपने ही किए हुए वायदों के मुताबिक शिक्षाकर्मी की समस्याओं का निराकरण नहीं करना चाहते हैं।14 साल के शासन काल में आपने शिक्षाकर्मियों की मांगों के निराकरण करने के नाम पर केवल और केवल कमेटी का ही निर्माण किया ह।

अब तक सरकार ने अपने 14 वर्षो के कार्यकाल में शिक्षा कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए 22 कमेटिया बना चुकी है किन्तु शिक्षा कर्मियों की समस्याएं आज तक वैसी की वैसी ही बनी हुई है।और अब सरकार की यह इस परिप्रेक्ष्य में 23 वी कमेटी है।कब तक सरकार राज्य के इन पढ़े लिखे युवाओ को आश्वासन के नाम पर कमेटी बनाकर शोषण करती रहेगी। उनकी मजबूरियों का नाजायज़ फायदा उठाते रहेगी।सही मायनों में राज्य के ये शिक्षाकर्मी मूलतःग्रामीण परिवेश से जुड़े हुए लोग है। इनकी आर्थिक स्थिति सुधरने से प्रदेश के 180000 परिवारो को मजबूती और सम्बलता मिलेगी। राज्य निश्चित रूप से इस निर्णय से धरातलीय रूप से मजबूत होगा।शिक्षा कर्मियों की मांगों को पूरा करने पर बजट का चाहे कितना बड़ा हिस्सा ही क्यो न खपाना पड़े, अन्य विभागो के बजटों में कटौती ही क्यो न करना पड़े ।सरकार को चाहिए बिना देर किए इन शिक्षा कर्मियों की सभी समस्याओं का निराकरण करना चाहिए ।ताकि इन शिक्षाकर्मियों को सरकार के नकारात्मक रवैये के चलते बार बार अपनी तकलीफों के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन न करना पड़े ।

शासन को समझने की जरूरत है कि इनके हड़ताल में चले जाने से प्रदेश के 54000 स्कूलों में ताले लगाने की नौबत आ जाती है।50 लाख से ज्यादा इन स्कूलों में अध्ययनरत राज्य के बच्चों का भविष्य अंधकार मय हो गया है.

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