आंदोलन जल जंगल ज़मीन प्राकृतिक संसाधन शासकीय दमन

सरकार द्वारा वनवासियों के अधिकारों पर नीतिगत हमले के विरुद्ध देशभर में आंदोलन

फ़ाइल फ़ोटो

दिनांक 25 सितम्बर को “इज्जत से जीने का अधिकार अभियान” ने एलान किया कि आगामी 17 नवंबर 2019 को देश भर के राज्य की राजधानियों और अन्य शहरों में केंद्र सरकार की आदिवासी और अन्य परम्परागत वन निवासियों के खिलाफ बनाई जा रही जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जुलुस निकाला जायेगा. उल्लेखनीय है कि “इज्जत से जीने का अधिकार अभियान” आदिवासियों और जंगलवासियों का एक राष्ट्रीय मंच है. अभियान से जुड़े हुए संगठनों के द्वारा लगभग दस राज्यों जुलुस निकाले जाएंगे.

2019 में केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने दो बड़े नीतिगत कदम उठाए जिससे 10 करोड़ से ज्यादा जंगल में रहनेवाले आदिवासियों और अन्य जंगलवासियों के परंपरागत हक़ खतरे में आ गए हैं.  अंग्रेज़ों के ज़माने से आज तक किसी भी सरकार ने वन अधिकार पर इतना व्यापक हमला नहीं किया है जितना भाजपा सरकार करना चाह रही है.

10 मार्च 2019 को केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को एक पत्र द्वारा भारतीय वन कानून में संशोधन करने के लिए एक प्रस्ताव भेजा था. इस प्रस्ताव के अनुसार वन विभाग को अधिकार दिया जायेगा कि वे वन रक्षा के नाम पर गोली चला सकते हैं और अगर वे स्पष्ट करते हैं कि गोली कानून के अनुसार चलाई गई है तो उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होगी (धारा 66 (2)).

फ़ाइल फोतो

अगर प्रस्तावित संशोधन, कानून बन जायेगा तो वन विभाग के कर्मचारी किसी भी आदिवासी या जंगलवासी का अधिकार पैसे दे कर खतम कर सकेंगे, बिना वारंट गिरफ्तार या छापे मार सकेंगे, और किसी भी आदिवासी या जंगलवासी की सम्पति को जब्त कर सकेंगे. अगर वन विभाग किसी व्यक्ति पर आरोप लगाएगा और कहेगा कि उसके पास आपराधिक सामान था तो ऐसी दशा में उस व्यक्ति को खुद साबित करना पड़ेगा कि वह निर्दोष है. अगर यह प्रस्ताव कानून बन जाएगा तो, कानून का राज जंगलों में से खत्तम हो जायेगा. रेंजर या DFO के कहने पर किसी को भी पकड़ा जा सकेगा या गोली भी मारी जा सकेगी. जंगल में रहनेवाले लोगों के कोई भी हक़-अधिकार नहीं बचेंगे. इज्जत से जीने का अधिकार अभियान के लोगों ने कहा कि “हमारा शक है कि इस संशोधन जंगल वासियों को हटाकर वन क्षेत्र निजी कंपनियों को अपार मुनाफा कमाने के लिए सौंपा जाने की योजना है.”

2017 से फरवरी 2019 तक केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में वन अधिकार कानून के खिलाफ चल रही याचिका में खामोश रही, जिससे कोर्ट में याचिका कर्ताओं के झूठ का जवाब देने के लिए कोई भी आवाज़ नहीं उठाया गई, जिसकी वजह से विगत 13 फरवरी को कोर्ट ने लाखों परिवारों की बेदखली करने को आदेश दिया मगर देश भर में आंदोलन होने के बाद सरकार कोर्ट में फिर से जाने के लिए मज़बूर हुई तब भी उन्होंने न्यायपीठ से यह माँग नहीं की कि उक्त आदेश वापस लिया जाए. सरकार ने सिर्फ माँगा कि आदेश को कुछ समय के लिए स्थगित किया जाए. आज तक आदेश स्थगित अथवा पेंडिंग में. 12 सितम्बर को फिर से इस याचिका में सुनवाई हुई थी और केंद्र सरकार फिर से गैर हाजिर रही. याद रखने की बात है कि देश के किसी भी प्रदेश में वन अधिकार कानून का सही कार्यान्वयन होते नहीं देखा गया है.

अभियान के लोगों ने  बताया कि भोपाल, रायपुर, मुंबई, गढ़चिरोली,  भुबनेश्वर, उदयपुर, देहरादून, गांधीनगर और अन्य शहरों में प्रदर्शन किया जायेगा और 21 नवंबर को भूमि-वन अधिकार आंदोलन के बैनर तले दिल्ली में भी एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा.

Related posts

अरपा को बहने दो :अभियान कल पांच जून को अरपा व्यू पर सुबह 7 बजे से. आईये आप भी . विभिन्न आयोजन .

News Desk

दुनिया को जलवायु संकट से बचाने के लिए एक हजार अरब पेड़ों को लगाए जाने की जरूरत है.

News Desk

SECL के कोल इंडिया पालिसी के कारण पेड के नीचे जीवन यापन के लिए मजबूर – गेवरा ,कोरबा .

News Desk