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समाजवाद: भगतसिंह से शावेज़  तक ःःपरिसंवाद  ,केनेरिस आर्ट गैलरी इंदौर मेंं कल ..

31 मार्च, 2019, रविवार।  शाम 4:30 से 7:30 बजे। 

केनेरिस आर्ट गैलरी,  577, 1 -ए,  ट्रेजर आइलैंड के सामने, महात्मा गाँधी मार्ग, इंदौर (मध्य प्रदेश) . 

सोवियत संघ के विघटन के बाद से पूँजीवाद ने अपने सभी नक़ाब उतार फेंके हैं और वह अपने असली क्रूर चेहरे के साथ सामने आ चुका है। अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, सूडान, यमन और सीरिया में तबाही मचाने और लाखों लोगों की जान लेने, विस्थापित करने और तहस-नहस करने के बाद अब उसके निशाने पर वेनेजुएला है।

हम भारत में भी पूँजीवाद समर्थक और अमेरिकी साम्राज्यवाद की पिछलग्गू ताक़तों को राजनीति में प्रभाव जमाते देख रहे हैं। झूठों और गलत मुद्दों में उलझाकर देशों को युद्ध के लिए उकसाया जा रहा है और एक ही देश की जनता को आपस में एक-दूसरे का दुश्मन बनाया जा रहा है। 

रोज़ा लग्जमबर्ग ने कहा था कि जब पूँजीवाद अपनी चरम अवस्था में होता है और यदि समाजवादी शक्तियाँ व्यवस्था बदलने की तैयारी में न हों तो पूँजीवाद दुनिया को फिर अंधेरे बर्बर युग में फेंक सकता है। इस कथन की रोशनी में ये जरूरी है कि हम “समाजवाद क्या है?” इसके बारे में ठीक समझ बनाने की कोशिश करें। क्या सिर्फ साम्प्रदायिकता का विरोध या जातिवाद, साम्राज्यवाद या पूँजीवाद का विरोध ही समाजवाद है?, या समाजवाद अपने आप में अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था है? 

अभी 23 मार्च को भगतसिंह का शहादत दिवस भी गुजरा है। भगतसिंह के विचारों से समाजवाद को समझने की उत्सुकता और दृष्टि मिलती है। उनके समय के समाजवाद के प्रयोग के बारे में जानना और तब से लेकर इक्कीसवीं सदी के समाजवाद की, ह्यूगो शावेज़  की अवधारणा को समझना, समाजवाद में दिलचस्पी रखने वालों के लिए जरूरी काम है। 

इस बड़े लक्ष्य की ओर एक छोटा शुरुआती कदम है यह परिसंवाद। परिसंवाद में शामिल होने का कोई शुल्क नहीं है चूंकि हमारे पास सीमित स्थान है अतः हम चाहते हैं कि इसमें वही लोग आएँ जिनकी समाजवाद में गम्भीर रुचि और गहरी उत्सुकता है।

अध्यक्षता- वसन्त शिंत्रे (वरिष्ठ वामपंथी कार्यकर्ता)

विषय प्रवेश- आलोक खरे – अरविंद पोरवाल (बैंक कर्मचारी-अधिकारी संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता)

विषय – भगतसिंह के समय में समाजवाद।

वक्ता- सुरेश उपाध्याय (वरिष्ठ लेखक, जनवादी लेखक संघ, इंदौर)

विषय – बीसवीं सदी के समाजवाद का मॉडल।

वक्ता- प्रोफेसर सी. सदाशिव [उपमहासचिव, अखिल भारतीय शांति एवम एकजुटता संगठन (AIPSO), दिल्ली]

विषय – इक्कीसवीं सदी के समाजवाद का मॉडल

वक्ता- जया मेहता (वरिष्ठ अर्थशास्त्री,जोशी-अधिकारी इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज, दिल्ली)

विषय – इक्कीसवीं सदी के समाजवाद के सामने मौजूद चुनौतियाँ और जवाब।

वक्ता- विनीत तिवारी (राष्ट्रीय सचिव, प्रगतिशील लेखक संघ, इंदौर)

*आयोजक*

अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन (AIPSO), इंदौर (9425314405)

सन्दर्भ केन्द्र, इंदौर (9893192740)

*अनुरोध :* अगर आप अपनी भागीदारी की पूर्व सूचना व्हाट्सएप, एसएमएस, फोन अथवा ईमेल से दे सकेंगे तो हमें व्यवस्था में आसानी होगी।

comvineet@gmail.comट

porwalarvind@gmail.com

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