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समलैंगिकता से जुड़ी धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, कल भी रहेगी जारी.

Jul 10, 2018 | 16:19 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

सुप्रीम कोर्ट ने सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में धारा 377 को निरस्त करने की मांग की गई है। धारा 377 ‘अप्राकृतिक अपराधों’ से संबंधित है। 

धारा 377  पर SC में सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में आईपीसी की धारा 377 को रद्द करने की मांग पर मंगलवार को सुनवाई हुई। ये सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। धारा 377 ‘अप्राकृतिक अपराधों’ से संबंधित है। धारा 377 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पांच जजों की पीठ सुनवाई कर रही है। सोमवार को पीठ ने सुनवाई स्थगित करने के केंद्र के अनुरोध को ठुकरा दिया था। केंद्र सरकार ने कहा था कि समलैंगिक संबंधों पर जनहित याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए और वक्त चाहिए। इस पर पीठ ने कहा, ‘इसे स्थगित नहीं किया जाएगा।’

पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा कर रहे हैं। जस्टिस आरएफ नरीमन, डीवाई चंद्रचुड़, एएम खानविलकर और इंदु मल्होत्रा इस बेंच में शामिल हैं। पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘लिंग और सेक्सुअल ओरिएंटेशन दो अलग-अलग चीजें हैं। इन दो मुद्दों को मिश्रित नहीं किया जाना चाहिए। यह पसंद का सवाल नहीं है।’ मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘यह अन्य बनाम संवैधानिक नैतिकता का मामला है। इस मामले में एक बड़ा विद्रोह है।’

याचिकाकर्ताओं में से एक के लिए उपस्थित हुए मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘धारा 377 किसी के मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है। यह मुद्दा केवल सेक्सुअल ओरिएंटेशन से संबंधित है और इसका लिंग से कोई लेना-देना नहीं है।’ रोहतगी ने कहा कि जैसे-जैसे समाज बदलता है, मूल्य बदलते हैं, हम कह सकते हैं कि 160 साल पहले जो नैतिक था, वो अब नैतिक नहीं हो सकता है। मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट से घोषणा चाहते हैं कि हमारे अधिकार अनुच्छेद 21 (जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता निजता का अधिकार) के तहत सुरक्षित हैं।’ 

उन्होंने कहा, ‘हम कह रहे हैं कि गे या लेस्बियन होना पसंद का विकल्प नहीं है। आप इसके साथ पैदा हुए हैं। यह सहज है इसलिए आप अपने लिंग के बहुमत से पसंद के मामलों में अलग-अलग प्रतिक्रिया करते हैं।’

सीजेआई ने कहा कि आज सवाल यह है कि धारा 377 आपराधिक है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘पहले धारा 377 को असंवैधानिक घोषित किया जाना होगा। यदि अन्य अधिकार सामने आते हैं तो उनको बाद में देखा जाएगा। न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि मौलिक अधिकारों पर बहस होगी।

सीजेआई ने पूछा, ‘अगर हम धारा 377 खत्म करते हैं, तो अगला सवाल यह होगा कि क्या वे शादी कर सकते हैं या लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं।’ इस पर रोहतगी ने कहा, ‘यदि कोई लिव-इन में है, तो लिव-इन पार्टनर को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत संपत्ति पर अधिकार मिलते हैं।

सुनवाई से पहले एलजीबीटी कार्यकर्ता, जया ने कहा, ‘हमें आशा है कि इस बार चीजें अच्छी तरह से काम करेंगी। जब कानून सभी के लिए एक निश्चित तरीका है तो इसे अकेले हमारे लिए अलग क्यों होना चाहिए? जिस तरह से हम अप्राकृतिक नहीं हैं।’ 

वहीं बीजेपी राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस पर कहा, ‘यह एक सामान्य बात नहीं है। हम इसे सेलिब्रेट नहीं सकते हैं। यह हिंदुत्व के खिलाफ है। हमें चिकित्सा अनुसंधान में रिसर्च करना चाहिए कि यह ठीक हो सकता है या नहीं। सरकार कोर्ट से 7 या 9 न्यायाधीशों की बेंच रखने की अपील करनी चाहिए।’ 

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