मानव अधिकार राजनीति

संजली की हत्या और मानवाधिकार दमन ,किसान ,महिला और मजदूरों पर दमन के खिलाफ प्रदर्शन .ःः भिलाई

27.12.2018

 आम्बेडकर चौक पावर हाउस में प्रदर्शन किया गया ,प्रदर्शन में मुख्य रूप से आगरा के संजली की हत्या,केंद्र सरकार द्वारा ट्रेड यूनियन ,मानव अधिकार संगठन,किसान संगठन, महिला एवं क्षात्र सगठनों के ऊपर दमन सँविधान में पदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले के खिलाफ आवाज बुलंद किया,गया,जिस तरह संजली को मारा गया वही सरकार द्वारा बेटियों के सुरक्षा का पोल खुलता है सरे आम हत्यारा मार कर चला जाता और पुलिस एवं नेता कार्यवाही के लिए कोई ततपरता नही दिखाता है क़्यो?

वही सुधाभरद्वाज जिनका कार्य मजदूरो शोषित पीड़ितों के बीच रही है एक भी बच्चे को एक थप्पड़ नही मारा उसे प्रधानमंत्री के हत्या के साजिश में सामील का आरोप लगाया जाता है 1992 में भाजपा की सरकार ने मजदूरो के ऊपर बर्बर गोली चालन कराया जिसमे 17 मजदूर मारे गए उस समय मुक्ति मोर्चा में लाखों मजदूर किसान थे परंतु एक पत्थर भी नही फेका गया ,इतने लोकतांत्रिक तरीके से शांति से कार्य करने वाले संगठन के कार्यकर्ताओं को अर्बन नक्शल का नाम देकर फिर से दमन करने कारपोरेट परस्त मंसूबे को दरसाता है।

 

नई सरकार जिन लोहंडीगुड़ा गुड़ा के आदिवासियों के जमीन लौटाने का ऐलान किया है वहां के बेगुनाह आदिवासी आज जेलों के अंदर है,वो जेल से छूटेंगे तब न अपने जमीन पर काबिज होंगे ,पूर्व सरकार ने जो किया ,आशा करते है नई सरकार वैसा न करें, केंद्र की सरकार ने मजदूरो के पक्ष में जो श्रम कानून बना है उसे भी पुंजिपतियो के पक्ष में उनके हित के लिए श्रम कानून को बदल रहे है जबकिसबसे अधिक हासिये पर मजदूर है जो हर दिन काम ढूंढता है जिस जगह वो काम करते है वहां उनका ठेकेदार के मुह पँर नॉकरी है ऊपर से शोषण
इन तमाम गम्भीर विषयो को लेकर आज प्रदर्शन रखा गया था जिसमे संजली को श्रद्धांजलि देकर थाना प्रभारी छावनी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा गया

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