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शासन प्रशासन की संवेदनहीनता के चलते ,महासमुंद से छतीसगढ उच्चन्यायालय के द्वार तक अनशनकारियो का पदयात्रा प्रारम्भ.


7.02.2018 /

छतीसगढ  किसान महासंघ के बैनर तले पांच किसान राधेश्याम शर्मा, जागेश्वर चंद्राकर, गजेंद्र कोसले, कौशल देवांगन और तिलक साहू अनसनरत हैं परंतु छत्तीसगढ़ सरकार अभी तक संवेदनहीन बने हुए है। शासन प्रशासन की संवेदनहीनता से छुब्ध होकर अनसनकारी किसान बिलासपुर उच्च न्यायालय तक अपनी बात पहुंचाने 7 फरवरी को महासमुंद से पदयात्रा दोपहर 2 बजे जनसभा कर शुरू कर दिया है।


स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों के ऊपज का लागत मूल्य किसान निर्धारित करें जिस पर 50% लाभकारी मूल्य जोड़कर समर्थन मूल्य में 12 माह धान खरीदी हो तथा महंगाई के अनुरूप 10प्रतिशतहर वर्ष वृद्धि और यह कानूनी रूप मिले साथ ही किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए लंबे समय से शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सत्याग्रह अनशन जारी रखते हुए शासन प्रशासन के साथ ही जनता को उसका हक दिलवाने आज 2:00 बजे से पैदल यात्रा शुरू किया है जो छै दिन की यात्रा पश्चात बिलासपुर उच्च न्यायालय के चौखट तक पहुंचेंगे। यात्रा के हर 15-20 किलोमीटर पर पड़ाव डाला जाएगा गांव गांव में रास्ते पर पड़ने वाली जगहों पर छोटी बड़ी सभाएं करते हुए बिमचा परसदा कौंदकेरा तुम गांव पटेवा झलप पिथौरा साकरा बसना सिंघनपुर सरायपाली सारंगढ़ बिलाईगढ़ शिवरीनारायण होते हुए उच्च न्यायालय पहुंचेंगे.

पदयात्रा में अनशनकारी गजेंद्र कोशले की धर्मपत्नी श्रीमती गितेश्वरी कोसले, माता जी श्रीमती पुन्नी कोसले, टीमन देवी साहू, जागेश्वरी जांगड़े, बिमला, श्यामाबाई कोसले, सुंदरिया कोसले, जीतू चंद्राकर, नंदकुमार चंद्राकर, दुर्गेश चंद्राकर, ईमरान खान, पारसनाथ साहू, रामगुलाम ठाकुर ,तेजराम विद्रोही, रूपन चंद्राकर, वेगेन्द्र सोनबेर, ललित कुमार साहू, झनक राम आवडे, लोकनाथ सहित तीन सौ से अधिक किसान शामिल रहे।

 

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तेजराम विद्रोही
संचालक मंडल सदस्य
छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

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