अभिव्यक्ति

व्यंग ” सुनने की क्षमता रखिये .

किरीट ठक्कर


महाभारत की कथानुसार अभिमन्यु की श्रवण शक्ति अद्भुत थी , माँ के गर्भ में ही उसने चक्रव्यूह में प्रवेश का तरीका सुन कर सीख लिया था। हमारे बुजर्गो का भी कहना है ,की बोलना कम सुनना ज्यादा। पर इधर कोई किसी की नही सुन रहा , बेटा बाप की नही सुन रहा , नेता जनता की नही सुनते ,पड़ोसी पड़ोसी की नही सुनता। बहुतों की सुनने की क्षमता क्षीण हो चुकी है।


लद्दाख के सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल की उम्र वैसे तो 34 वर्ष है,किन्तु वे पिछले 72 वर्षो से सुनते आ रहे हैं , उनके सुनने की क्षमता अद्भुत है। इसीलिए वे विपक्षी सांसदों से बार बार सुनने की क्षमता रखने का आग्रह करते है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्र के लोंगो की सुनने की क्षमता का ह्रास हो रहा है , शहरी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण और क्लाइमेट इसके कारण है ,जबकि ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्र के लोंगो की श्रवण शक्ति दुरुस्त है इसीलिये वे सबकी सुनते हैं , नेताओ की ,अधिकारियों की ,अपनी, रिश्तेदारों की , शायद इसिलए कहा जाता है की भारत की आत्मा गांव में बस्ती है । नामग्याल भी पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्र से है ,सुनते सुनते उनकी सुनाने की भी क्षमता का विकास हो चुका है । शहरवासी आपाधापी में होते हैं सो किसी की नही सुनते ,जबकि गांवो में फुर्सत ही फुर्सत होती है ,उनके मनरेगा के काम जल्दी निपट जाते हैं , बल्कि कई जगह तो ये काम दस्खत या अंगूठा लगाने के साथ ही समाप्त हो जाते है, इससे ज्यादा अगर उन्हें करने कहा जाए तो पलायन कर जाते हैं , मनरेगा कार्य मनमाफिक किया जाता है ,लिहाजा फुर्सत ही फुर्सत .. सुनते हैं ,सुनाते हैं , सुनने की क्षमता रखते हैं ।


इधर कुछ दिनों से मेरी पत्नी कम सुन रही है मैं बड़ा परेशान हूँ ,दाल की जगह बाल और रोटी कहने पर बोटी परोस देती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मुआयने के बाद मुझसे कह दिया है , कि आपकी किस्मत खराब है , ये आपकी एक नही सुनने वाली , बस आप सुनने की क्षमता रखिये।


अक्सर देखा गया है की नेता जब तक सत्ताशीन होते हैं विपक्षियो की नही सुनते , और जब वही विपक्षी सत्ताशीन हो जाते है तब पूर्व के सत्ताशीनों की नही सुनते। जनता भी अब नेताओं का भाषण सुनने तैयार नही है , किंतु हमारे प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी बोलने में बड़े माहिर है ,लोग उनका भाषण ध्यानपूर्वक सुनते है ,कुछ लोगों को उनके भाषण से आनंद मिलता है , तो कुछ लोंगो को देशभक्ति की प्रेरणा मिलती है .. हो सकता है कुछ लोग पुनः नोट बंदी के खटके की वजह से उन्हें सुनते हो ?


कहतें है कई मामलों में जानवर इंसानो से बेहतर होते है , कुत्ते ,खरगोश ,हिरण आदि हल्की सी आहट पे चौकन्ने हो जाते है , इनकी सुनने की क्षमता तीव्र होती है , इधर हम इंसानो की सुनने की क्षमता लगातार क्षीण होती जा रही है। मेरे एक मित्र कहते है ,सुनने के साथ साथ बोलने की भी क्षमता रखिये , बोल नही सकते तो लिखने की क्षमता रखिये , और इनमें से कुछ ना हो तो कम से कम ऐसे लोंगो का साथ दीजिये जो सुन सकते हो ,बोल सकते हो ,लिख सकते हो।

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