आदिवासी आंदोलन औद्योगिकीकरण महिला सम्बन्धी मुद्दे राजनीति शासकीय दमन

विस्थापन के खिलाफ कल कोरबा में सैंकड़ों पीड़ित-आदिवासी करेंगे पैदल मार्च, घेरेंगे कलेक्टोरेट

25.02.2019

छत्तीसगढ़ किसान सभा, जनवादी नौजवान सभा और जनवादी महिला समिति के बैनर तले कल कोरबा में पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर सैंकड़ों आदिवासी, नौजवान, महिलाएं और भूमि-विस्थापन से पीड़ित लोग गंगानगर से कोरबा तक 25 किमी. लंबी पदयात्रा करेंगे और कलेक्टोरेट का घेराव करेंगे. इस आंदोलन की अगुआई अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते, जनवादी नौजवान सभा के राज्य संयोजक प्रशांत झा, जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव धनबाई कुलदीप, माकपा नेता सपूरन कुलदीप, सीटू नेता एस एन बेनर्जी व जनकदास कुलदीप, किसान सभा नेता सुखरंजन नंदी, सोनकुंवर, राकेश चौहान, टी सी सूरज आदि करेंगे. आदिवासियों और किसानों की इस पदयात्रा को विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी अपने समर्थन की घोषणा की है.

इस आंदोलन के स्थानीय संगठनकर्ताओं सपूरन कुलदीप, प्रशांत झा और सुखरंजन नंदी ने बताया कि वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों और गरीब किसानों को बेदखल करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस आंदोलन का महत्व और बढ़ गया है. कोरबा जिले में पिछले पांच दशकों में कोयला खनन के नाम पर हजारों गरीब किसानों से जमीनतो छीनी गई है, पुनर्वास और रोजगार के लिए आज भी वे भटक रहे हैं. कथित रूप से जिनका पुनर्वास किया गया है, उन्हें फिर खनन के लिए बेदखल करने का कुचक्र रच जा रहा है. उन्होंने कहा कि वनाधिकार मान्यता कानून को निष्प्रभावी बनाने के लिए ग्रामों और वनों को शहरी क्षेत्रों में शामिल कर लिया गया है और अब उन्हें व्यक्तिगत और सामुदायिक पट्टे देने से इनकार किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि वनों में रहने वाले आदिवासियों और भू-विस्थापित किसानों की समस्याओं को हल करने की मांग को लेकर कई बार जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से बात की गई है, लेकिन नतीजा सिफर रहा है. इस पदयात्रा का भी यदि प्रशासन ने कोई सकारात्मक प्रत्युत्तर नहीं दिया, तो कोरबा से रायपुर में मुख्यमंत्री निवास तक पदयात्रा का कार्यक्रम बनाया जाएगा.

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