औद्योगिकीकरण पर्यावरण

विषैले पानी से झुलसी फसल ! ग्राम सभा एनओसी फर्जी की संभावना ! गुरुश्री इंडस्ट्रीज पर मेहरबान रायगढ़ पर्यावरण विभाग !

पर्यावरणविद् रमेश अग्रवाल की रिपोर्ट

रायगढ़ । रायगढ़ जिले के देलारी ग्राम में गुरु श्री इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी फेरो वैनेडियम बनाती है । इस फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं और अपशिष्ट जल एवं पदार्थ रसायनिक तौर वैनेडियम पेंटाक्साइड ( V . 05 ) पाया जाता है । की स्वास्थ्य के काफी घातक होता है । इसके धुंए में त्वचा संबंधी बीमारियां होती है । इस फैक्ट्री से निकलने वाला पानी पेड़ – पौधे जीव और खेतों के लिए भी काल के समान फैक्ट्री ने सन 2012 से देलारी के ग्रामीणों का जीना दुर्भर कर रखा चिमनियों से घातक धुंवा निकलता है जो ग्रामीणों की सासों में समाकर अनेक बीमारियों को कर रहा है । फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गन्ध से ग्रामीणों का घरों में रहना दुश्वार हो गया है । यही नहीं फैक्ट्री से बाहर छोड़े जाने वाले विषाक्त पानी से पेड़ पौधे जल गये हैं ।

ग्रामीणों द्वारा लिखा गया शिकायती पत्र

रायगढ़ पर्यावरण विभाग द्वारा पर्यावरण नियमों के पालन में कमी पाए जाने पर इस फैक्ट्री को जून माह में ही बंद करने का आदेश जारी किया था मगर यह फैक्ट्री बेधड़क जारी है । फैक्ट्री लगने के लिये ग्राम पंचायत से एनओसी लिया गया था । जिस की कॉपी विभाग में जमा कराई गई थी । जब इस बारे में ग्राम पंचायत से संपर्क किया गया तो उन्होंने ऐसे किसी भी एनओसी का रिकॉर्ड होने की बात को एक सिरे से नकार दिया । ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जब ग्राम पंचायत में एनओसी को लेकर कोई रिकॉर्ड नहीं है ।

वर्तमान सचिव श्री इनसेना भी इस बात से नकारते हैं कि ऐसी कोई एनओसी 2012 दी भी गई है या ऐसा कुछ ग्राम सभा से पारित किया गया है । तो फिर इस NOC की सत्यता पर भी प्रश्नचिन्ह उठते हैं ? ? जो वाकई जांच का विषय इस पूरे मामले में रायगढ़ पर्यावरण विभाग की निष्क्रियता को लेकर सोशल मीडिया में भी काफी शोर हुआ था । मामला आगे बढ़ और ग्रामीणों ने भी हिम्मत जताई ।

ग्रामीणों ने अपनी झुलसी हुई फसलों को देखा । यह फसल इसलिए झुलस गए थे । क्योंकि खेतों में फैक्ट्री का रासायनिक जहरीला पानी छोड़ा गया था । 14 अगस्त को उन्होंने रायगढ़ पर्यावरण कार्यालय में जाकर इसकी लिखित शिकायत भी दर्ज कराई । विभाग ने भी चमत्कारिक रूप से मात्र दो ही दिनों में याने की 16 अगस्त को नुकसान का जायजा लेने के लिए विभाग के सैंपलर समरजीत सिंह को भेजा । अब समझ में नहीं आ रहा है कि विभाग ने इस बात को गंभीरता से लिया हल्के में ? ? 2 दिन में कार्यवाही जहां गंभीरता दिखाती है , वहीं जांच के लिए किसी अधिकारी रैंक के व्यक्ति को ना भेजना एक बहुत बड़ा क्वेश्चन मार्क और साबित करता है कि इस मामले में कितना गंभीर है या बात कुछ और ! उनकी गंभीरता एक और प्रश्नवाचक चिन्ह इस बात से भी लगता है की . .

निरीक्षण प्रतिवेदन में इस बात का कोई उल्लेख नहीं किया गया कि फैक्ट्री चालू हालत में मिली ! न ही इस बात का उल्लेख किया गया कि इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन कटा हुआ है या नहीं ! जबकि जाहिर सी बात है कि जब निरीक्षण अधिकारी ने फैक्ट्री के विषैले पानी से खराब हुई फसलों के लिये मुआवजा की बात अपनी रिपोर्ट में की है तो फैक्ट्री का चालू रहना लाजिमी बात है ।

बहरहाल ग्रामीणों के प्रति दरियादिली और फैक्ट्री के प्रति रहमदिली दिखाते हुए निरीक्षणकर्ता ने फैक्ट्री प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच फसल नुकसान का मुवावजा की सहमती करवा दी ।

अब इतने सारे सवाल है कि विभागीय कार्यवाही इस जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही कम और प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच कुशलता और कुशाग्रता से किया गया सेटलमेंट ज्यादा लगता है ! अहम् सवाल ये है कि जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग क्या वास्तव में फैक्ट्री बंद करवाना चाहता है या कि ग्रामीणों के गंभीर बीमारियों ग्रस्त हो जाने पर नींद से जागेगा !

**

Related posts

बैलाडीला : रात 12 बजे तक के अल्टीमेटम के बाद भी डटे रहे आंदोलनकारी .एक तरफ संगीनों के साथ सैकड़ों जवान तो दूसरी तरफ नृत्य करते गाना गाते और बीच रोड पर सोते रहे आदिवासी .15 को बस्तर बंद का एलान .

News Desk

बैलाडीला पहाड़ बचाने के लिये आदिवासीयों का आंदोलन पांचवें दिन भी पूरे जोश के साथ जारी मिल रहा है हर वर्ग का सक्रिय समर्थन. एक को चुनिये आदिवासी या अदानी.

News Desk

बलरामपुर छतीसगढ : जगन्नाथपुर में महान -3 कोल परियोजना के खिलाफ़ निर्णय किया ग्राम सभा ने .: पहले खदान समर्थक व्यक्ति को अध्यक्ष बनने के प्रयास को बहुमत से रोका .

News Desk