पर्यावरण

विश्व पर्यावरण दिवस , आइए गांधी के 150वीं जयंती वर्ष पर देश को पानीदार बनाने संकल्प लें। सादगी पूर्ण परंतु गुणवत्ता से भरपूर जीवन जीने का संकल्प लें – नंद कुमार कश्यप.

आज विश्व पर्यावरण दिवस है देश में कुछ प्रमुख नदियां मरणासन्न अवस्था में हैं ।बहुत सी नदियों ( नर्मदा सोन आदि) के उद्गम जंगल काट डाले गए हैं इसलिए उनके उद्गम स्थल पर कृत्रिम ढांचा खड़ा कर बोर्ड लगाना पड़ा है कि यहां से नर्मदा नदी निकलती थी, गोदावरी सूख चुकी है, मतलब उसकी सहायक नदियां और नाले सूख चुके हैं। आज देश के तीन चौथाई हिस्से में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन क्या समझदार लोगों ने इसके कारणों की पड़ताल की और उन्हें रोकने के लिए कुछ किया। उत्तर है बड़ा सा नहीं।ग्लैशियरों से निकलने वाली नदियों के अलावा अन्य नदियां घने जंगलों वाले पहाड़ों से निकलतीं हैं और इन नदियों को पानी से लबालब करने का काम छोटे बड़े नाले करते हैं।

विकास के नाम पर हम अपनी ऊर्जा खपत बढ़ाते जा रहे हैं,1980 की तुलना में एयरकंडीशनर की संख्या हजार गुना से ज्यादा है आज, यहां तक कि गांव में भी उसकी दरकार पड़ गया है। दोपहिया और चार पहिया वाहनों की संख्या और भी बढ़ गई है। ऊर्जा के लिए बिजली खनिज तेल चाहिए लोहा और बाक्साईड चाहिए। कोयला चाहिए। ये सब चाहिए तो जंगल कटेंगे। और जब तेज़ रफ़्तार चौपहिया वाहन हैं तो सिक्स लेन और आठ लेन सड़क चाहिए। तो बचे हुए वृक्ष भी काटिए।इन पक्की चौड़ी सड़कों पर पर पानी रुकना भी नहीं चाहिए। तो इन बड़े भूभाग में बारिश में भी भूजल का भराव नहीं होगा। जंगल कटे, लाखों हेक्टेयर में सड़कों का जाल बिछाया 130 करोड़ की आबादी भी है। गांधी और बुद्ध के इस देश में इतना असमान विकास कि मेहनतकश गरीब को पीने के पानी के लिए दूर जाना पड़े और बहुत थोड़ा सा सुविधासंपन्न वर्ग ठंडक में रहने के लिए पूरी पृथ्वी गर्म करे। लेकिन यह वर्ष कुछ ऐसा संकट लेकर आया है कि लोग कहने लगे हैं कि अब नहीं चेते तो आगे हम पानी से वंचित रहेंगे।

कबीर ने कहा है कि पानी गए न ऊबरे मोती मानस चून । हालांकि संदर्भ दूसरा है परंतु यह सच है कि यदि पानी नहीं रहा तो देश के भीतर विस्थापन की इतनी विकराल समस्या पैदा होगी जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। इसलिए आज हम कुछ नए संकल्प लें

1- आगे से कोई सिक्स लेन सड़क नहीं 2- सार्वजनिक परिवहन सभी के लिए अनिवार्य हो और निजी चारपहिया सवारी वाहनों पर कराधान बढ़ा उन्हें हतोत्साहित किया जाए 3-वर्तमान ताप ऊर्जा खपत को सीमित करते हुए वैकल्पिक ऊर्जा आगे बढ़ाया जाए 4- तमाम शहरों में सायकिल चलाना सुरक्षित बनाया जाए5 हम अपने आसपास वृक्ष लगाएं और कम से कम एयरकंडीशनर और कूलर का उपयोग करें ।

आइए गांधी के 150वीं जयंती वर्ष पर देश को पानीदार बनाने संकल्प लें। सादगी पूर्ण परंतु गुणवत्ता से भरपूर जीवन जीने का संकल्प लें।

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