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वन मण्डलाधिकारी की जांच रिपार्ट के मसौदे का माकपा ने की भर्त्सना : माकपा कोरबा . (हाथियों के हमले से होने वाली मौतों के संदर्भ में)

18.06.2018/ कोरबा .

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) के जिला सचिव सपुरन कुलदीप ने कोरबा के उप वनमंडल अधिकारी मनीष कश्यप के द्वारा हाथी के हमले में हो रही मौतों के लिए वनभूमि अधिकार के पट्टे को जिम्मेदार बताने पर कड़ी शब्दो में भर्त्सना किया है । माकपा नेता ने ( सलंघ्न लिंक के आधार पर ) कहा कि हाथी – मानव मुठभेड़ में लगातार ग्रामीणों की मौत हो रही है जिसे रोक पाने में सरकार और वनमंडल के अधिकारी असफल रहे है और हमले में मारे गए लोंगो के परिवार को सम्मानजनक मुआवजा तक नही दिया जा रहा है । फसलो को हाथियों के द्वारा नुक्सान पहुचाने पर उचित क्षतिपूर्ति राशि भी नहीं दी जा रही है और इन हमलों को रोकने के इंतेजाम भी पर्याप्त नहीं है । इसके उलट कोरबा के उप वनमण्डलाधिकारी श्री कश्यप ने अपने DFO को सौंपे गए रिपोर्ट में स्पष्ट कारण बताते हुए वनाधिकार पट्टा को ही जिम्मेदार बता दिया है। माकपा नेता ने वन विभाग के इस रिपार्ट का निंदा करते हुए कहा है वन विभाग अपनी असफलता की जिम्मेदारी ग्रामीणों और आदिवासी अधिकार कानून पर डाल रही है. सभी पात्रों को पट्टे मिले नहीं है. जिन्हें मिले हैं, उन्हें पूरे कब्जे के नहीं मिले हैं. जिन्हें आधे-अधूरे मिले हैं, उनसे पट्टे अवैध तरीके से छीने जा रहे हैं.

प्रदेश में वन भूमि का रकबा कम हो रहा है, तो आदिवासियों को वनभूमि के दिए गए पट्टे जिम्मेदार नहीं हैं. जिम्मेदार हैं वह वन विभाग, जो तस्करों के साथ मिलकर वनों की अवैध कटाई से जुड़ा है. जिम्मेदार है भाजपा सरकार की वे कॉर्पोरेटपरस्त नीतियां, जिसके कारण वनों सहित तमाम प्राकृतिक संसाधन लूट के लिए उन्हें सौंपे जा रहे हैं. वनों के नीचे दबे खनिज भंडार उन्हें सौंपे जा रहे हैं, इन भंडारों का अवैध दोहन हो रहा है, विस्फोट हो रहे हैं, नो-गो एरिया को ही बदला जा रहा है, हाथियों के प्राकृतिक निवास, पेयजल स्रोतों और उनके आवागमन के सहज रास्तों को बर्बाद किया जा रहा है, तो वे आदिवासियों पर हमले करेंगे ही.

इतिहास गवाह है कि वन्य-पशुओं और आदिवासियों में सह-अस्तित्व ही रहा है. इस सह-अस्तित्व को नष्ट करने के कारण ही आदिवासियों और वन्य-पशुओं दोनों का जीवन संकट में है. यदि वन्य-पशुओं को बचाना है, तो आदिवासियों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा करनी होगी, सदियों से उनके साथ हो रहे ‘ऐतिहासिक अन्याय’ को दूर करना होगा. यदि आदिवासियों को बचाना है, तो वन्य-पशुओं के जीवन की रक्षा करनी होगी, उनके पर्यावरणिक वातावरण की रक्षा के साथ ही अवैध शिकार से बचाना होगा.

ये सब नया ज्ञान नहीं है. नया ज्ञान वह है, जो कोरबा के उप-वनमंडलाधिकारी मनीष कश्यप सरकार, वन विभाग और कॉर्पोरेटों के ईशारे पर पेल रहे हैं. यह रिपोर्ट शुद्ध रूप से आदिवासियों को वनों से बेदखल करने के लिए ही तैयार की गई है. उन सभी ताकतों को, जो आदिवासियों के हितों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, एकजुट होकर इन मंसूबों के खिलाफ संघर्ष छेड़ना होगा.

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