आदिवासी जल जंगल ज़मीन

लोरमी : जमीन का पूरा हक पाने आदिवासी लगा रहे हैं अधिकारियों के चक्कर. बैगा आदिवासियों को जमीन का आधे से भी कम मिला वन अधिकार का पट्टा.

पत्रिका न्यूज

लोरमी . राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा आदिवासियों को वनविभाग के अधिकारियों ने ठग लिया है । क्योंकि कब्जे के आधार पर उनको पट्टा नहीं दिया गया है । वन अधिकार पट्टा मिलने के बाद बैगा आदिवासी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं और इसकी शिकायत कलेक्टर से करते हुये संबधित विभाग के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग है मिली जानकारी के अनुसार बिजराकछार , चकदा , ढूढ़वाडोंगरी , झिरीया , जमुनाही , बोईरहा , सरगढ़ी पट्परहा , औरापानी , मौहामाचा सलगी , मंजूरहा , बांटीपथरा व परसहापारा आदि .

14 गांव के बैगा आदिवासियों को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ . रमन सिंह के निर्देश पर वनअधिकार पट्टा वितरण हुआ था , जिसमें वन विभाग के अधिकारियों ने बैगा आदिवासियों का अधिकार ही कम कर दिया है । उनके पास जितनी भूमि है , उसके आधे से कम जमीन का वनअधिकार पट्टा दिया गया है । बैगा आदिवासियों साथ हो रहे इस छलावे की जानकारी वनवासियों को तब जब उनके कब्जे के अनुरूप मान नहीं मिली । किसी के 5 एकड़ कब्जे हैं तो उसे महज डेढ़ ही एकड़ भूमि का पट्टा दिया गया है तो किसी को एक एकड़ से भी कम । ऐसे में बैगा आदिवासी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं । अब अपने काबिज के आधार पर पट्टा पाने के लिए बैगा आदिवासी कलेक्टर सहित वनविभाग के उच्चाधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं । वहीं इस मामलेमें न तो कलेक्टर सुन रहे हैं और न ही संबधित विभाग के अधिकारी । इस ओर ध्यान दे रहे हैं । बैगा आदिवासी जब उनसे पूछते हैं कि आखिर हमारे साथ ऐसा क्यों किया तो अधिकारी यह बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि बाकी कब्जे की जो जमीन है , वह जंगल को काट कर बनाया हुआ है । उसका पट्टा कहीं नहीं मिलेगा । जबकि बैगा आदिवासी उक्त भूमि पर कई पीढ़ियों से निस्तारी कर रहे है । अधिकारियों के द्वारा बैगा आदिवासियों के प्रति बरती जार ही लापरवाही से वनवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

75 साल पुराना गवाह लाओ तभी दी जाएगी जमीन

अपनी हक की जमीन पर दुरुस्ती पाने के लिए भटक रहे बैगा आदिवासियों को वन अधिकारी 75 वर्ष का गवाह लाने की तहरीर दी जा रही है , जबकि जन्म – जन्मान्तर से

बैगा आदिवासी उक्त भूमि पर निवासरत हैं । ऐसे में वन अधिकारियों के इस बयान । पर बैगा आदिवासी हैरान परेशान हैं । क्योंकि 75 वर्ष से ज्यादा की आयु के

व्यक्ति या तो मौत हो गई है । या फिर जिंदा हैं तो चलने फिरने लायक नहीं हैं । ऐसे में बैगा आदिवासी आखिर गवाह लाये तो लायें कहा से समझ से परे है ।

50 से अधिक परिवारों को नहीं मिली पट्टा , . लगा रहे हैं अधिकारियों के चक्कर

सूत्रों के अनुसार विजराकछार , चकदा , दुवाडोंगरी , झिरीया , जमुनाही , योईरहा , सरगढी , पपरहा , औरापानी , मौहामाचा , सलगी , । मंजूरहा , बांटीपथरा व परसहापारा के निवासरत लोगों में ऐसे भी लोग हैं , जिन्हें आज तक पट्टा नही प्रदान किया गया है । पट्टा नहीं मिलने से उनके सामने काफी समस्या उत्पन्न हो गई है । अधिकारी उनको याहरी बताकर उनको पट्टा प्रदान नहीं कर रहे हैं , जबकि वे भी विगत कई पीदियों से निवास कर रहे हैं । इन बैगा आदिवासियों को यहकह कर जमीन नहीं दिया जा रहा है कि जो कब्जा है , वह अतिक्रमण । साथ ही वहां से उन्हें कभी भी पट्टा नहीं देने की भी बात कह रहे हैं ।

पट्टा देने का काम एसडीएम करते हैं । हमारे अधिकार क्षेत्र में जो आता है । हम उसे पट्टा दिए हैं । बैगा आदिवासियों का जितन में कब्जा है , उसी आधार पर पट्टा दिया गया है ।

कैके जायसवाल , रेंजर , खुड़िया |

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