अभिव्यक्ति मानव अधिकार

लोक स्वतंत्र्य संगठन (पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़) की ओर से भारतीय जनता पार्टी द्वारा आदर्श आचार संहिता, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एंड भारतीय दंड संहिता के उल्लंघन के विषय में भारत निर्वाचन आयोग को शिकायत.

. व्ही. सुरेश, रवि किरण जैन / अप्रैल 16, 2019
(अंग्रेजी मूल से अनुवादित)*
प्रति,
भारत निर्वाचन आयोग,
निर्वाचन सदन, अशोक रोड,
नई दिल्ली 110001

complaints@eci.gov.in


विषय: भारतीय जनता पार्टी द्वारा आदर्श आचार संहिता, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एंड भारतीय दंड संहिता के उल्लंघन के विषय में भारत के निर्वाचन आयोग को शिकायत
Subject: Complaint t

Elction Commission of India against the Bharatiya Janata Party for violation of the Model Code of Conduct, Representation of Peoples Act and the Indian Penal Code.

महोदय गण ,

वर्तमान में जारी सन 2019 लोक सभा चुनावों में चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख सदस्यों द्वारा आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct), लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of Peoples Act) और भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code)  के घोर उल्लंघन से पी.यू.सी.एल. चकित है. सत्तारूढ़ भाजपा के प्रमुख नेताओं ने पिछले कुछ दिनों में अत्यधिक आपत्तिजनक (highly objectionable), सांप्रदायिक (communal), गैर-संवैधानिक (anti-constitutional) और नफ़रत उकसाने (hate inciting) वाले बयान दिए हैं, जो चुनावी अभियान की चिल्ला-चोपंड के हिस्सा बन गए हैं; जिनमें चुनावी दांव-पेंच की एक पतनात्मक खंदक (new depths of electioneering) दिखाई दे रही है; जो अविवादित, बेशर्मी से सांप्रदायिक और विभाजनकारी, उकसाने वाले और धमकी भरे भाषणों और नारेबाज़ी से पटी पड़ी है. 

पिछले दो दिनों में दी गई कुछ ऐसी ही आपत्तिजनक बयान-बाज़ी का विवरण नीचे दिया जा रहा है:

  1. भाजपा ने अपने अधिकृत ट्विटर खाते पर एक बयान जारी कर आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens) को पूर्णत: लागू किया जायेगा, और बौद्ध, हिन्दू, सिख को छोड़कर हर एक घुसपैठिये को खदेड़ दिया जायेगा ताकि एक “नए भारत” (New India) का निर्माण हो सके; https://twitter.com/bjp4india/status/1116246724119371776?s=21
  2. भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आसाम और बंगाल में चुनाव अभियान के दौरान वायदा किया कि इस देश से हर एक घुसपैठिये को निकाल दिया जायेगा और चिन्हित कर केवल हिन्दुओं और बोद्ध धर्म के लोगों को ही भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी.
https://wap.business-standard.com/multimedia/video-gallery/general/we-will-ensure-implementation-of-nrc-in-the-entire-country-amit-shah-in-darjeeling-82379.htm
  1. प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने, जो फिलहाल देश के सबसे शीर्ष पद पर पदासीन हैं, आश्वासन दिया है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक [Citizenship (Amendment) Bill] को लागू किया जायेगा, और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि किसी भी घुसपैठिये का नाम राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizens) में मौजूद न हो; और अपने भाषण के दौरान उन्होंने विभाजन (Partition) का ज़िक्र किया, और हिन्दुओं की रक्षा की बात भी रखी.
    https://m.timesofindia.com/elections/news/pm-modi-amit-shah-pitch-for-vexed-cab-nrc-on-campaign-trail-in-assam-and-bengal/articleshow/68837271.cms
  2. सुश्री मेनका गांधी,महिला और बाल विकास मंत्री, भारत सरकार ने, अपने पद पर बने रहते हुए, मुसलमान समुदाय के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वे उन्हें वोट नहीं देते हैं तो बाद में उनकी मदद लेने न पहुंचे, क्योंकि वह उनकी मदद नहीं करेंगी, जो अपने आप में और कुछ और नहीं बल्कि एक धमकी ही है.
https://www.news18.com/news/politics/maneka-gandhi-warns-muslims-wont-get-jobs-if-they-dont-vote-for-her-ec-are-you-listening-2100159.html
  1. उन्नाव से भाजपा उम्मेदवार और सांसद श्री साक्षी महाराज ने कहा कि जो उनको वोट नहीं देंगे उनको वह श्राप दे देंगे.
https://timesofindia.indiatimes.com/elections/lok-sabha-elections-2019/uttar-pradesh/news/sakshi-threatens-to-curse-those-who-wont-vote-for-him/articleshow/68857881.cms
  1. कर्णाटक की विधान परिषद् में विपक्ष के नेता और भाजपा उम्मीदवार श्री के.एस. ऐश्वारप्पा ने भाजपा द्वारा मुसलामानों और ईसाईयों को चुनाव में टिकट न देने को जायज़ ठहराया, और कहा कि उन्हें इसलिए टिकट नहीं दिया गया क्योंकि वे राष्ट्र के प्रति वफ़ादार नहीं हैं (they are not loyal to the nation).
https://navbharattimes.indiatimes.com/video/news/after-muslims-bjp-leader-eshwarappa-targets-christians/videoshow/68859254.cms
    ऊपर दिए गए सभी बयान राजनीतिक रूप से विभाजनकारी और विडंबनापूर्ण भाषण, नारे और एस.एम्.एस. (संदेश) हैं जो भाजपा और उसके नेताओं द्वारा दिए गए या भेजे गए, और यह उनका महज़ एक नमूना हैं. वे न केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनावी कानूनों का व्यापक स्तर पर उल्लंघन करते हैं, वरन भारतीय संविधान पर सीधा-सीधा प्रहार भी करते हैं. यह बयान लोकतंत्र की आन्तरिक भावना और बहुलतावाद (pluralism), समावेशिता (inclusivity), धर्मनिरपेक्षता (Secularism), समानता (equality), अहिंसा (non-violence) और न्याय (justice) के पोषित मूल्यों का भी उल्लंघन  हैं।

       यह सभी बयान जो भाजपा और उनके मंत्रियों द्वारा चुनावी अभियान के दौरान खुले आम जारी किये गए हैं, वह भी ऐसे समय में जब आदर्श आचार संहिता लागू है; इन्हें विडियो पर रिकॉर्ड किया गया है; सरकारी रिकॉर्डिंग/ सोशल मीडिया पोस्ट में कैद कर लिया गया है; और इन्हें राष्ट्रीय टेलीविज़न और सोशल मीडिया पर प्रसारित भी किया गया है. यह बयान स्पष्ट तौर पर धर्म के नाम पर वोट मांग रहे हैं, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत एक भ्रष्ट आचरण के रूप में सूचीबद्ध है.  ख़ास तौर पर भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए यह बयान, जिनमें प्रधान मंत्री शामिल हैं, चुनावी अपराधों (electoral offences) और भ्रष्ट आचरण (corrupt practices) की श्रेणी में आते हैं जैसा कि लोक प्रतिनिधत्व अधिनियम, 1961 की धारा 123 के तहत परिभाषित है: 

………………………………………………..
(1) Sec. 123(1)(A)(b) – Bribery – any promise by a candidate or his agent … to any person with the object, directly or indirectly of inducing an elector to vote or refrain from voting;

(१) धारा १२३ (१) (अ) (ब) –

“रिश्वत” अर्थात :–

  1. किसी अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता द्वारा अथवा किसी अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता की सम्मति से किसी अन्य व्यति द्वारा किसी भी व्यक्ति को, वह चाहे जो कोई भी हो, किसी परितोषण का ऐसा दान, प्रस्थापना या वचन, जिसका प्रत्यक्षत: या परत: यह उद्देश्य हो कि —
  2. किसी व्यक्ति को निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में खड़ा होने या न खड़ा होने के लिए या अभियार्थ्ता ( वापस लेने या न लेने के लिए), अथवा
  3. किसी निर्वाचक को किसी निर्वाचन में मत देने या मत देने से विरत रहने के लिए उत्प्रेरित किया जाये,

(2) Sec. 123(2) – Undue Influence … any direct or indirect interference … with the free exercise of any electoral right with threat of, amongst other things, “divine displeasure or spiritual censure (sec. 123(2)Proviso (ii))

(२) धारा १२३ (२) – असम्यक असर डालना, अर्थात किसी निर्वाचन अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग में अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता की या [अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता की सम्मति से] किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किया गया कोई प्रत्यक्षत: या परत: हस्तक्षेप या हस्तक्षेप का प्रयत्न:

(3) Sec. 123(3): The appeal by a candidate or his agent … to vote or refrain from voting for any person on the ground of his religion, race, caste, community or language.

(३) धारा १२३ (३) : किसी व्यक्ति के धर्म, मूलवंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए मत देने या मत देने से विरत रहने की अभ्यर्थी या उसके अभिकर्ता दवा या अभ्यारती या उसके निर्वाचन अभिकर्ता की सम्मति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपील या उस अभ्यार्थी के निर्वाचन की संभाव्यताओं को अरसर करने के लिए या किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए धार्मिक प्रतीकों का उपयोग या उनकी दुहाई या राष्ट्रीय प्रतीक तथा राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय संप्रतीक का उपयोग या दुहाई:
(4) Sec. 123(3A): Promoting feelings of enmity or hatred on grounds of race, caste, community or language.

(४) धारा १२३ (३क) किसी अभ्यार्थी या उसके अभिकर्ता या अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन अभिकर्ता की सम्मति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस अभ्यार्थी के निर्वाचन की सम्भ्व्यताओं को अग्रासन करने के लिए या किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए शत्रुता या घृणा की भावनाएं भारत के नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच धर्म,मूलवंश,जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर संप्रवर्तन या संप्रवर्तन का प्रयत्न करना.
इसके साथ ही, ऐसे बयान धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी, अविश्वास और नफ़रत पैदा करने का काम करते हैं, और इसलिए यह हिंसा भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने का काम भी करते हैं, जो भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ के तहत एक दंडनीय अपराध है.

         यहां यह इंगित करना उचित है कि यह बयान आदर्श आचार संहिता के सामान्य व्यवहार (अध्याय १) के तहत १, ३ और ४ में दर्शाए प्रावधानों का भी उल्लंघन हैं, (https://eci.gov.in/mcc/) जहां यह निर्धारित है कि:
  1. No party or candidate shall include in any activity which may aggravate existing differences or create mutual hatred or cause tension between different castes and communities, religious or linguistic.

१. किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक और भाषायीं समुदायों के बीच विधमान मतभेदों को बढ़ाये या घृणा की भावना उत्पन करे.

  1. There shall be no appeal to caste or communal feelings for securing votes. Mosques, Churches, Temples or other places of worship shall not be used as forum for election propaganda.

३.मत प्राप्त करने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जानी चाहिए. मस्जिदों,गिरजाघरों, मंदिरों या पूजा के अन्य स्थानों का निर्वचान प्रचार के लिए मंच के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.

  1. All parties and candidates shall avoid scrupulously all activities which are “corrupt practices” and offences under the election law, such as bribing of voters, intimidation of voters, impersonation of voters, canvassing within 100 meters of polling stations, holding public meetings during the period of 48 hours ending with the hour fixed for the close of the poll, and the transport and conveyance of voters to and from polling station.

४. सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यों से ईमानदारी के साथ बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि के अधीन “भ्रष्ट आचरण” और अपराध हैं जैसे मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को अभित्रस्त करना, मतदाताओं का प्रतिरूपण पोलिंग स्टेशन के १०० मीटर के भीतर मत देने का अनुरोध संयाचना करना, मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय को समाप्त होने वाली ४८ घंटे की कालावधि के दौरान सार्वजानिक सभाएं करना और मतदाताओं को सवारी से पोलिंग स्टशनों तक ले जाना और वहां से वापस लाना.

सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं द्वारा किये गए यह अपराध गंभीर हैं, और इनमें स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों को तहस-नहस करने और उन्हें प्रभावित करने की क्षमता है, जब कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग का यह कर्तव्य बनता है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराये. चुनाव अभियान के दौरान दिए गए यह बयान धार्मिक भेदभाव से नागरिकों को कानूनी सुरक्षा, कानून की दृष्टि में समानता का अधिकार और कानून से समान सुरक्षा प्रदान करने वाली संवैधानिक गारंटी का खुला उल्लंघन हैं.

ऐसे बयान जो उन मंत्रियों द्वारा दिए जा रहे हैं जो वर्तमान में वरिष्ट मंत्री पद संभाले हुए हैं, चाहें वे केंद्र सरकार व् राज्य सरकार में हों, सांवैधानिक पदाधिकारियों के अधिकार और पद के घोर दुरूपयोग के दायरे में आते हैं, और भारत के संविधान में निहित मूल्यों के प्रति उनका अनादार है.

यहां ध्यान देने लायक बात यह है कि अपने घोषणा-पत्र में भी भाजपा ने मतदाताओं को साम्प्रदायिक आधार पर प्रभावित करने की दृष्टि से सांप्रदायिक, भेदभावपूर्ण और गैर-संवैधानिक वायदे किये हैं. सांप्रदायिक, गैर-संवैधानिक और नफरत उकसाने वाले बयान जो ऊपर दी गयी सूची में क्रमांक 1, 2 और 3 में दर्शाए गए हैं, वे क्रमांक 12 में एक बार फिर दोहराए गए हैं, जहां नागरिक (संशोधन) विधेयक का तमगा लगाया गया है, और क्रमांक 7 और 8 में जहां भाजपा की चुनावी घोषणा-पत्र 2019 (https://images.indianexpress.com/2019/04/bjp-election-2019-english.pdf) के तहत घुसपैठ पर जवाबी कार्यवाई करने का ज़िक्र है. यह उन प्रावधानों का उल्लंघन है जो आदर्श अचार संहिता में चुनाव घोषणा-पत्रों से सम्बंधित दिशानिर्देशों (अध्याय VIII) में दर्शाई गई है.

  1. (i) The election manifesto shall not contain anything repugnant to the ideals and principles enshrined in the Constitution and further that it shall be consistent with the letter and spirit of other provisions of Model Code of Conduct.

३.(i) चुनाव घोषणा-पत्र में ऐसी कोई भी सामग्री नहीं रहेगी जो संविधान में प्रतिष्ठापित आदर्शों और सिद्धांतों के प्रतिकूल हो, और कि वह आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों की शब्दः और भावना से सुसंगत होगा.
(ii) The Directive Principles of State Policy enshrined in the Constitution enjoin upon the State to frame various welfare measures for the citizens and therefore there can be no objection to the promise of such welfare measures in election manifestos. However, political parties should avoid making those promises which are likely to vitiate the purity of the election process or exert undue influence on the voters in exercising their franchise.

(ii) संविधान में प्रतिष्ठापित राज्य की नीति के निर्देशक सिद्धांत राज्य को आदिष्ट करते हैं कि नागरिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी उपायों की रूपरेखा तैयार करें, और इसलिए चुनाव घोषणा-पत्रों में ऐसे कल्याणकारी उपायों के वादे पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती है. लेकिन, राजनितिक दलों को ऐसे वादे करने से बचना होगा जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को प्रदूषित करती हैं या अपने मताधिकार का उपयोग करने में मतदाताओं पर अवांछित प्रभाव डालती हैं.
हम यहां इस बात पर ज़ोर देना चाहेंगे कि ऐसे अहंकारी चुनाव सम्बन्धी उल्लंघन भाजपा नेताओं द्वारा बेशर्मी से किये गए हैं, जो अति उत्साही या जोशीले कार्यों के परिणामस्वरूप नहीं वरन सांप्रदायिक तौर पर ध्रुवीकरण और मतदाताओं को विभाजित करने के लिए एक सुनियोजित और जानबूझकर तैयार की गई योजना का एक अंग है.

यह बात और भी स्पष्ट रूप से उजागर होती है जब भाजपा द्वारा उन तस्वीरों के निंदक इस्तमाल से और सैनिक बलों के हवाले से दावा ठोंका जाता है कि सीमा पार के हमले जैसे सैनिक अभियान का श्रेय उन्ही को मिलना चाहिए; और कि सैनिक बलों को “मोदीजी की सेना” के नाम से बुलाया जाता है. चुनाव सम्बन्धी मंच उन पार्टी कार्यकर्ता से खचा-खच भरे होते हैं, जो सैनिक वर्दियों को पहनकर और हाथ में सैनिक बलों के जवानों की तसवीरें और पोस्टर लेकर प्रचार-प्रसार कर रहे होते हैं, जिसमें भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान की तस्वीर शामिल है — जिसे पकिस्तान में पकड़ लिया गया था, जब उसके विमान को मार गिराया गया था, और बाद में उन्होंने उसे रिहा कर दिया था.

यहां पर यह बताना भी ज़रूरी है कि पार्टी को मीडिया सर्टिफिकेशन और मोनिटरिंग समिति (एम्.सी.एम्.सी.) का भी फायदा मिला जिसे भारत के चुनाव आयोग ने “राजनीतिक मकसद के साथ नायब विज्ञापन” (`surrogate advertising with political overtones’) की संज्ञा दी है, जो मोदी के जीवन पर बनी फिल्म (Modi Biopic) के रिलीज़ होने से सम्बंधित प्रचारक संगीत और विडियो फिल्मों के रूप में है. इस फिल्म के निर्माताओं, टी-सीरीज म्यूजिक कंपनी, और इसका ट्रेलर चला रहे यू-ट्यूब चैनल को और उन अखबारों के प्रकाशकों को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है, कि एम्.सी.सी. के अध्याय 15, भाग 2 और भारतीय दंड संहिता की धारा 121-एच के प्रावधानों का यह उल्लंघन है, जिसके चलते अंततोगत्वा इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया. (link 1 and link 2)

यह समान रूप से उल्लेखनीय है कि नमो टी.व्ही. (NaMo TV) को एम्.सी.एम्.सी. से बिना प्रमाणीकरण के कोई भी राजनितिक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया गया है. हालांकि यह कार्यवाई स्वागतयोग्य है, लेकिन अत्यंत अप्रयाप्त है, क्योंकि सीधे और खुले सांप्रदायिक और पतित चुनावी दांव-पेंच के चलते देश के अल्पसंख्यकों और अन्य नागरिकों के दिलों में इसने भय पैदा कर दिया है. भारत निर्वाचन आयुक्त को इस पार्टी के व्यवहार को ध्यान में रखना होगा ताकि भारत के सबसे बड़े चुनाव की मर्यादा, निष्पक्षता और गरिमा बरक़रार रहे.

इस वक़्त यहां यह बता देना ज़रूरी है कि सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा सांप्रदायिक विभाजन भड़काने और समुदायों के ध्रुवीकरण के निर्लज्ज और जानबूझकर किये गए इन कामों के ज़रिए चुनाव अभियान के सन्दर्भ के परिवेश में देश भर में व्यवस्थित तरीके से प्रभाव डाला जा रहा है; और इसके कारण अल्पसंख्यक समुदायों के कई वर्गों के बीच भय की भावना बढ़ रही है, और उनको लगता है कि उनके लिए खतरे की घंटी बज रही है, ख़ास कर मुसलमानों और ईसाईयों के बीच. प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के नेता अमित शाह द्वारा कई जगहों पर खुलेआम ऐलान करना कि अगर पार्टी को सत्ता में वापस बैठा दिया गया तो वह यह सुनिश्चित करेगी कि सभी घुसपैठियों को – मतलब उनका इशारा खासकर मुसलमानों और ईसाईयों की तरफ है — भारत से बाहर निकाल दिया जायेगा, जिसके फलस्वरूप माने या न माने, इन समुदायों के सदस्यों के बीच स्पष्ट रूप से डर पैदा कर दिया गया है, और वे खतरा महसूस कर रहे हैं कि आखिर उनका भविष्य क्या होगा.

इस सामुदायिक अधिभारित परिस्थिति (communally surcharged situation) के विषय पर हम अपनी चिंता व्यक्त करना चाहते हैं, जो धीरे-धीरे भारत के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले रही है, जो कि सत्तारूढ़ भाजपा और उसके नेताओं द्वारा सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकरण और विभाजनकारी चुनाव अभियान (communally polarizing and divisive election campaign launched) चलाने के फलस्वरूप है.

भारत निर्वाचन आयोग को भाजपा नेताओं के खिलाफ तत्काल संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव एक ऐसे सांप्रदायिक सद्भावना और शांति के वातावरण में, और स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न हों.

भारत निर्वाचन आयोग, और मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पी.यू.सी.एल. आव्हान करता है कि वे तत्काल और अविलम्ब निम्नलिखित कार्यवाई करें:

१.भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह को नोटिस जारी करें कि लोक 

प्रतिनिधित्व अधिनियम, १९५१, चुनाव की आदर्श आचार संहिता, और भारतीय दंड संहिता और अन्य कानूनों के प्रावधानों के कथित उल्लंघनों के लिए क्यों न भाजपा के खिलाफ कार्यवाई की जाये, जिसमें पार्टी के उम्मीदवारों को रोकने और/अथवा अयोग्य घोषित करना शामिल हो.
२. कथित गैर-संवैधानिक और सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाले बयानों के लिए भाजपा मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की कार्यवाई प्रारंभ करें, जो सीमित न होकर प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, श्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष, सुश्री मेनका गाँधी, महिला और बाल विकास की केन्द्रीय मंत्री, श्री साक्षी महाराज, सांसद और श्री के. एस. एश्वाराप्पा, कर्णाटक के विपक्ष के नेता को शामिल कर कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत दी गई प्रक्रिया के अनुरूप हो.
३. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को आदेश दें कि वे सांप्रदायिक तौर पर विभाजनकारी भाषणों, विज्ञापनों, पोस्टरों, आदि को प्रकाशित/, निर्वासित/ या प्रसारित न करें.

  1. ऐसी सभी कार्यवाई करें जो कानून के अंतर्गत करना ज़रूरी हो, जिसमें उन सभी दलों और राजनेताओं के खिलाफ अपराधों को तुरंत पंजीबद्ध करें जिन्होंने आदर्श आचार संहिता का घोर उल्लंघन किया है;
  2. ऐसी सभी कार्यवाई करें जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को करने के लिए कानून के अंतर्गत ज़रूरी हैं;
  3. चुनाव आयुक्त द्वारा एक सख्त दिशानिर्देश जारी किया जाये जिसमें सभी राजनितिक दलों को चुनाव अभियान के दौरान धर्म, जाति या समुदाय या अन्य विभाजनकारी भाषा को उपयोग करने से बचना चाहिए; जिस पर अमल न करने की हालत में उन पर सख्त कार्यवाई की जाएगी जिसमें उम्मीदवार को अयोग्य घोषित करना शामिल हो;
  4. चुनाव आयुक्त को सभी चुनाव अफसरों और पुलिस तंत्र/महकमे को दिशानिर्देश जारी करना चाहिए कि वे धार्मिक और अन्य अल्पसंख्यकों की प्रयाप्त रक्षा और सुरक्षा करें, ताकि वे अपने वोट देने के अधिकार का उपयोग प्रतिरोध के डर के बिना करें.
  5. उन सभी दलों और राजनेताओं के खिलाफ दृढ़, स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्यवाई प्रारंभ करें जो आदर्श आचार संहिता, लोक प्रतिनधित्व अधिनयम के प्रावधानों, और अन्य कानूनों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, और जो जाति, समुदाय और अन्य विभाजनकारी नारों और नफरत फ़ैलाने वाले अभियान के आधार पर वोटरों से अपील करते हैं. हितकर और त्वरित सुधारात्मक कार्यवाई ही भारत के संविधान में सभी दलों की आस्था को सुनिश्चित करेगी, और चुनावी अभियान के दौरान आदर्श आचार संहिता को सख्ती से पालन करने और देश के कानून के पालन के लिए बाध्य करेगी.

एक स्वतंत्र, संवैधानिक निकाय होने के नाते, हम भारत निर्वाचन आयोग से अपेक्षा करते हैं कि वे भारतीय संविधान में निहित लोकतान्त्रिक मूल्यों को बरकार रखेंगे. ऐसा करने से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संचालन के प्रति, भारतीय संविधान की प्राथमिकता, और संवैधानिक भावना, और भारत के चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता के प्रति नागरिकों के सभी वर्गों के बीच विश्वास बहाल करने में मदद मिलेगी.

हस्ताक्षरकर्ता,

श्री रवि किरण जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, पी.यू.सी.एल.
डॉ. व्ही. सुरेश, राष्ट्रीय महासचिव, पी.यू.सी.एल.

*(अंग्रेजी मूल से अनुवादित – राजेंद्र सायल) rajendrasail@gmail.com

अंग्रेजी मूल के लिए देखें: http://pucl.org/writings/complaint-election-commission-india-against-bharatiya-janata-party-violation-model-code


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