कला साहित्य एवं संस्कृति

लेखकों की सृजनशीलता से ही विश्व का शोषित समाज मुक्ति की ओर बढ़ेगा,साहित्य हमें और अधिक मानवीय बनाता हैःः●बांगलादेश प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन से वापस आया भारतीय प्रतिनिधि मंडल● 

बिलासपुर / 27.03.2019

साहित्य हमारी कोमल अनुभूतियों को जागृत करने के दौरान मानवीय बनाता है। कला एवं साहित्य इसीलिए हमेशा सभी प्रकार की अमानवीयता, अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध मुखर हो उठते है। अमानवीयता के खिलाफ मानवीयता की लड़ाई इसीलिए ऐतिहासिक है। बांग्लादेश का मुक्तियुद्ध मानवीयता की लड़ाई  में मील का पत्थर  है। मुक्तियुद्ध की चेतना में हम आज भी लड़ाई किए जा रहे हैं धर्मांधता, साम्प्रदायिकता, मूलतत्ववाद व शोषण के खिलाफ। 

       बांगलादेश प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन में उक्त बातें उभर कर आई और इसे  प्रस्ताव के रूप में पारित भी किया गया । ढाका में हुए इस तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की ओर से प्रलेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ के महासचिव नथमल शर्मा तथा त्रिपुरा प्रलेस की उपाध्यक्ष संगीता देवानजी शामिल हुए । पारित प्रस्ताव में कहा गया कि  मानवमुक्ति का संघर्ष समाज व राष्ट्र में अन्याय-अविचार,  शोषण-उत्पीड़न के प्रति लेखकों-कलाकारों की मुक्तविचार  व मत प्रकट करने की लड़ाई के साथ जुड़ा हुआ है। लेखकों की सृजनशीलता ही सारे विश्व के उत्पीड़ित मनुष्यों के पक्ष में खड़े होकर मानवमुक्ति के संघर्ष को तेज कर पाएगी।                                         

 ढाका विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई । बांगलादेश के बेहद लोकप्रिय और वरिष्ठ कवि मोहम्मद रफ़ीक ने ध्वजारोहण कर सम्मेलन के उद्घाटन की घोषणा की ।ध्वजारोहण सर्वजीत स्वाधीनता   पार्क में हुआ ।  वहां से रैली निकाली गई जो प्रमुख मार्ग से होती हुई विश्वविद्यालय के सभागार में पहुंची।उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि बांगलादेश के प्रसिद्ध लेखक प्रो.शियाजुल इस्लाम चौधरी थे । मुख्य वक्ता भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे नथमल शर्मा थे । साथ में संगीता देवानजी और राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलाम किब्रिया पीनू, महासचिव शक्तावत टीपू,  उपाध्यक्ष शम्सुजमान हीरा ने संबोधित किया ।

मुख्य वक्ता श्री शर्मा ने कहा कि हमारी गंगा की धारा यहां आते ही पद्मा हो जाती है और जमुना की धारा बन जाती है मेघना नदी । भारत और बांग्लादेश की मिट्टी एक है, पानी एक है और हमारी दोस्ती बेमिसाल है । साहित्य हमें और ज्यादा मानवीय बनाता है। एक शोषण रहित समाज कैसे बने यह साहित्यकार की यह पहली जिम्मेदारी है । इंसान और इंसानियत को बनाए और बचाए रखना ही तो आज की सबसे बड़ी चुनौती है । कार्पोरेट कल्चर से उपजी आवारा पूंजी और क्रोनी कैपेटिलिज्म ने इस चुनौती को और बढाया ही है । हमें लेखन के जरिए इस चुनौती से निपटना है । श्री शर्मा ने कहा कि साहित्य कोई मनोरंजन का साधन नहीं,  महान लेखक प्रेमचंद की इस बात को याद रखने की जरूरत है ।सोद्देश्य साहित्य वही है जो समाज की पीड़ा से साक्षात कराए .

सम्मेलन के संयोजक प्रो इब्राहीम किब्रिया ने संचालन किया । सम्मेलन में 27 जिलों से करीब ढाई सौ साहित्यकार शामिल हुए । उद्घाटन सत्रके पश्चात हुए सांगठनिक सत्र में प्रत्येक जिला इकाइयों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की । इन सत्रों में दिए गए वक्तव्यों में आज के दुनिया के हालात पर चर्चा और चिंता करते हुए साहित्य की भूमिका पर बात की गई । काफ़ी विचार विमर्श के बाद ये प्रस्ताव भी पारित किए गए-  प्रत्येक लेखक एवं नागरिक  की विचार व्यक्त करने की आज़ादी सुनिश्चित करने के संघर्ष में बांग्लादेश प्रगति लेखक संघ दृढ़ रहेगा , प्रत्येक लेखक की व्यक्तिगत व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्र को उन्मुख करने की दिशा में प्रगति लेखक संघ अपनी भूमिका निभाएगा ,लेखकों को यथोचित मानदेय तथा किताबों की रॉयलटी सुनिश्चित करने हेतु  संघ सक्रिय हस्तक्षेप करेगा ,लोक एवं आदिवासी भाषा, साहित्य तथा संस्कृति  के संरक्षण एवं विकास हेतु प्रगति लेखक संघ समुचित रूप से उद्यमशील होगा , निर्धन तथा हाशिए पर के साधारण लेखकों को सहारा देने की दिशा में प्रगति लेखक संघ सचेष्ट रहेगा तथा दार्शनिक व वैचारिक धरातल पर लेखकों के विकास हेतु पाठागार तथा लघु पत्र-पत्रिका आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए  प्रगति लेखक संघ प्रतिबद्ध है।

तत्पश्चात  चुनाव हुए जिसमें  राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलाम किब्रिया पीनू तथा महासचिव   गौतम को सर्वसम्मति से चुना गया ।भारत से मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए भारतीय प्रतिनिधि मंडल के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया । अंत में पिछले साल हमारा साथ छोड़ गए साहित्यकारों भारत के नामवर सिंह,  तेजिंदर सिंह गगन सहित अनेक लेखकों  को श्रद्धांजलि दी गई । फिर मिलने के वादे के साथ सम्मेलन सम्पन्न हुआ । 

***

नथमल शर्मा की रिपोर्ट ,बांग्लादेश से वापस आकर .

Related posts

बांगलादेश प्रगति लेखक संघ ःः ○○ढाका में हुए तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित किए गए प्रस्ताव ○○

News Desk

तंत्र शास्त्र के अंतर्गत महाविद्या समूह की दस देवियों की उत्पत्ति , उनसे सम्बंधित विभिन्न मिथक और उनके आधार पर प्राचीन भारत मे मातृसत्तात्मक समाज और उसमे यौनिकता पर लवली गोस्वामी का विशद विश्लेषण . प्रस्तुति शरद कोकास .

News Desk

संगीत के पुरोधा खुमानलाल साव का चले जाना एक युग का अंत. उत्तम कुमार .

News Desk