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लूटता रहा छत्तीसगढ़, सोती रही सरकार !

रमेश अग्रवाल
जन चेतना सदस्य व ग्रीन नोबल प्राइज विजेता

अपने आप को छत्तीसगढ़िया बताने का दंभ भरने वालों ने छत्तीसगढ़ को किस कदर लुटने दिया इसका उदाहरण है तमनार स्थित मांड-रायगढ़ कोलफिल्ड .

गारे पेलमा सेक्टर 1 छ.ग. सरकार के उपक्रम सीएमडीसी को आबंटित था , यह विशाल कोयला खदान 5739 हेक्टेयर में फैली है | कोयला घोटाला उजागर होने के बाद सन 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 214 खदानें निरस्त कर दी गई जिसमे गारे पेलमा सेक्टर 1 भी शामिल थी | पुनः जब खदानों का आबंटन हुआ तो इस विशाल खदान के बदले छत्तीसगढ़ सरकार के उपक्रम छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड “सीएसपीजीसीएल” को मिली गारे पेलमा सेक्टर 3 जिसका कुल क्षेत्रफल है मात्र 714 हेक्टेयर मतलब पहले से लगभग आठ गुनी छोटी खदान . छत्तीसगढ़ की यह गारे पेलमा सेक्टर 1 खदान मिली गुजरात सरकार के उपक्रम गुजरात स्टेट इलेक्ट्रीसिटी कारपोरेशन लिमिटेड “जीएसइसीएल” को प्रधान मोदी गुजरात से हैं और केंद्र में उनकी ही भाजपा सरकार थी और वर्तमान में भी है | चूँकि छत्तीसगढ़ में भी उस समय भाजपा की सरकार थी इसलिये भी शायद रमन सरकार ने छत्तीसगढ़ की विशाल कोयला खदान गुजरात सरकार के हवाले करने में कोई परहेज नहीं समझा और बदले में एक झुनझुना सी खदान लेकर खुश हो गये .


अगर यह गारे पेलमा सेक्टर 1 खदान, पुनः आबंटन के बाद छत्तीसगढ़ के पास ही रहती तो इसका जो फायदा होता वो अरबों खरबों में होता | अपने पॉवर प्लांट्स के उपयोग के बाद जो कोयला बचता उसे बेचकर छत्तीसगढ़ की माली हालत टॉप में हो सकती थी, जिसका सीधा फायदा यंहा के निवासियों को मिलता . न किसी से कर्ज लेने की आवश्यकता होती बल्कि छत्तीसगढ़ कर्ज देने की स्थिति में हो सकता था .विकासकी नई कहानी लिखी जा सकती थी .


किसी ने ठीक ही कहा है कि “हमें तो लूटा अपनों ने, गैरों में कहां दम था। हमारी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था” ।

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