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अंबिकापुर ,रेहाना फाउंडेशन का आयोजन , गांधी सुमिरन ःः गांधी अंबेडकर और दलित विमर्श पर बात करने की जरूरत – आशुतोष

3.02.2019 / अंबिकापुर 

अंबिकापुर– विमर्श ही हिंदू धर्म का मूल तत्व है वर्तमान स्थिति में इस तरह का माहौल देश में बन गया है कि जहां आप को विमर्श करने नहीं दिया जाएगा लोगों को खांचे में बांट दिया गया है आप देशभक्त हो आप उदारवादी हो आप कम्युनिस्ट हो आप समाजवादी आप देशद्रोही हो। गांधी जी से पूछा गया कि आप कैसे हिंदू हैं बताइए तो उन्होंने तीन बातें कही थी कि मैं एक मै हिंदू परिवार में पैदा हुआ हूं दूसरा मैं वेदों और उपनिषदों को अपना धार्मिक ग्रंथ मानता हूं और उन्होंने सबसे बड़ी तीसरी बात कही थी कि गाय हमारी माता है और मै उसकी की रक्षा के लिए अपनी जान तक देने के लिए तैयार हूँ .

उक्त बातें देश के नामचीन और विख्यात पत्रकार आशुतोष जी ने अंबिकापुर में आयोजित रेहाना फाउंडेशन के कार्यक्रम गांधी सुमिरन में गांधी अंबेडकर और दलित विमर्श विषय पर ब्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा । आशुतोष ने कहा कि जिस धर्म सभ्यता संस्कृति और समाज का मूल सिधांत विमर्श हो दूसरे को परास्त करने की भावना या एक दूसरे को जीतने की भावना नही थी,हमारी परंपरा थी लोगो को जोड़ने की थी। परंतु आज की स्थिति संकुचित हो गई है गांधी अंबेडकर और दलित विमर्श बात करने की जरूरत इसलिए आज आन पड़ी है कि कुछ लोग कहते हैं कि गांधी और अंबेडकर एक दूसरे के विरोधी थे दुश्मन थे । 1932 में अंग्रेजों ने सेपरेट इलेक्टरेट की बात की थी।उस सेपरेट इलेक्टरेट के विरोध में महात्मा गांधी ने यरवडा जेल में अनशन किया और बाबा साहब अंबेडकर तो कहने लगे कि गांधी जी दलित विरोधी हैं और दलितों के सेपरेट इलेक्टरेट के पक्ष में नहीं है 1934 में पूना पैक्ट हुआ था अंबेडकर जी को सेपरेट इलेक्टरेट छोड़ना पड़ा उसकी जगह आरक्षण लेने की सहमति देनी पड़ी ।

उन्होंने आगे कहा गांधी जी और अंबेडकर जी एक दूसरे के शत्रु नहीं थे जबकि बल्कि पूरक थे। दोनों एक ही बात कह रहे थे कहने का तरीका अलग अलग था ।बाबा साहब उस जमाने में इतने पढ़े लिखे थे कि शायद ही कोई और लोग इतना पढ़ा लिखा होगा । उसके बावजूद उन्हें छुआछूत और अपमान का सामना करना पड़ा। बड़ोदरा में बड़े पद में रहने के बावजूद भी उन्हें घर से निकाल कर सड़क पर फेक दिया गया था । उस दिन उन्होंने निर्णय लिया था कि मैं पैदा हुआ था हिंदू धर्म में लेकिन मरूंगा नहीं उस दिन से बाबा साहब दलित आंदोलन में जुड़ गए थे । कुछ लोगों का कहना है कि बाबा साहब की दिलचस्पी स्वतंत्रता आंदोलन में कम और दलित आंदोलन में ज्यादा थी बाबा साहब अंबेडकर हजारों साल की गुलामी से आजाद करने की लड़ाई लड़ रहे थे वहीँ गांधीजी अंग्रेजों से देश को आजाद करने के लिए लड़ाई लड़ रहे थे ।

गांधी जी को भी मालूम था कि देश और समाज को अंग्रेजों ने कई भागों में बांट दिया है और जब तक सभी वर्ग को साथ में लेकर के आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक अंग्रेजों के डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी से मुकाबला नहीं कर पाएंगे । इसलिए अंग्रेज बखूबी जानते इसलिए मुसलमानों और दलितों को सेपरेट इलेक्टरेट देने की बात कह कर विभाजन की एक रेखा खीच दी थी । जिससे परे मत भिन्नता होने के बाद भी गांधी जी ने आजादी के बाद बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को देश का कानून मंत्री और संविधान सभा का अध्यक्ष बनाया था । वो जानते थे कि इनसे ज्यादा विद्वान व्यक्ति कोई नहीं है जो भारत के संविधान को सच्चे स्वरूप में लिख सकता है और बना सकता है ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कैबिनेट मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह जी ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी में जितनी जरूरत गांधी और अंबेडकर की थी उतनी ही जरूरत आज भी उनके संदेशों की है गांधी और अंबेडकर को छोड़ कर के यह देश आगे नहीं बढ़ सकता है सत्य अहिंसा के बताए मार्ग पर चलकर और अंबेडकर के बनाए संविधान की रोशनी में ही देश आगे बढ़ सकता है और तरक्की कर सकता है ।

गांधी की जितनी ज़रूरत उस समय थी उतनी ही ज़रूरत आज भी है जिससे अंतिम पंक्ति के लोगों तक को समाज की मुख्यधारा में लाया जा सके। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर डॉ अजय तिर्की ने मंडल कमीशन के समय की घटनाओं और तकलीफों को याद करते हुए कहा कि किस तरह की दुश्वारियां सहनी पड़ती थी।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्था के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने दिया।कार्यक्रम का संचालन जावेद खान ने किया वहीं आभार प्रदर्शन विशाल श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर नगर निगम सभापति शफी अहमद, वरिष्ठ पत्रकार हरिकिशन शर्मा, सुधीर पांडेय, साहित्यकार तपन बनर्जी, विजय गुप्त ,सुजाता सिंह, नीरज वर्मा, त्रिभुवन सिंह, प्रभु नारायण वर्मा, वंदना दत्ता ,आशा शर्मा,सुरेंद्र गुप्ता ,प्रोफेसर अनिल सिन्हा, अफरोज खान ,अमरेश्वर दुबे,हरिशंकर त्रिपाठी ,यास्मीन खान ,रेहाना फाउंडेशन के मोहम्मद शाहिद खान ,अफरोज खान ,दिनेश शर्मा ,केवल साहू अनुज शर्मा ,विशाल श्रीवास्तव,तृप्तराज सिंह धंजल, दिलीप गुप्ता सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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