महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार राजकीय हिंसा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी छतीसगढ़ को दिया आदेश ,सुनीता पोट्टम और मुन्नी पोट्टम की शिकायत की व्यकिगत जांच करें औऱ उनके गरिमा की रक्षा भी करें .: पीयूसीएल छतीसगढ़ ने निष्पक्ष जांच और दोनों की सुरक्षा की मांग की . :


12.01.2018

**
बस्तर के आदिवासियों पर सुरक्षा बलों व् पुलिस द्वारा मानव अधिकारों के लगातार हनन के खिलाफ कोर्चोली गाँव (ज़िला बीजापुर, थाना गंगलूर) की दो आदिवासी युवतियां – सुनीता पोट्टाम (पिता आयतु, उम्र 20 साल) एवं मुन्नी पोट्टाम (पिता स्व. बुदू, उम्र लगभग 19 साल) लोकतान्त्रिक तरीके से आवाज़ उठा रही हैं. उनपर पुलिस की धमकियों और प्रताड़ना को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने 11 जनवरी 2018 को आदेश जारी किया है.

वर्ष 2016 में सुनीता और मुन्नी पोट्टाम ने WSS (“यौन हिंसा व राजकीय दमन के खिलाफ महिलाएं”) के साथ मिलकर बिलासपुर उच्च न्यायालय में, ज़िला बीजापुर में हुए 6 फर्जी मुठभेड़ों के मुद्दे पर जनहित याचिका लगाई थी। उसके बाद से वे अपने क्षेत्र में महिलाओं के साथ हो रहे शारीरिक व् यौन हिंसा के खिलाफ उनकी लड़ाई में उनका साथ दे रही हैं।
27 दिसम्बर, 2017 को उनपर लगातार हो रहे पुलिसिया दमन की एक गंभीर कड़ी तब जुडी जब उनको दो बार अलग-अलग पुलिस और सी.आर.पी.ऍफ़. अफसरों ने धमकियाँ दीं कि अगर वे इन मुद्दों को उठाती रहेंगी और पुलिस से जवाबदारी मांगती रहेंगी तो उनपर फर्जी नक्सली आरोप डालकर गिरफ्तार किया जाएगा. एस.पी. एन.के. अहिरे और ए.एस.पी. मोहित गर्ग ने उनको यह भी कहा कि उनके द्वारा लगाए गए जनहित याचिका के कारण पुलिस को काफी परेशानी हो रही थी, और उनपर नक्सलियों से मिली-भगत करने के बेबुनियाद आरोप लगाए।

10.01.2018 को अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए सुनिता और मुन्नी पोट्टाम मानव अधिकार आयोग, दिल्ली पहुंची। इन युवतियों पर पुलिस के लगातार दबाव के बारे में पहले भी 9.4.2016 को मानव अधिकार आयोग के समक्ष एक शिकायत दर्ज की गयी थी है जिसपर आयोग ने युवतियों को उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया था, और उनका कथन दर्ज करने के लिए नोटिस भेजा था. दोनों ने आयोग के समक्ष पेश होकर अपने कथन में 27.12.2017 की घटना का विवरण देते हुए अपनी सुरक्षा की आस प्रकट की. फलस्वरूप मानव अधिकार आयोग ने दिनांक 11.01.2018 को डी.जी.पी. को आदेश जारी किया है कि वे “मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करे और जिला पुलिस अधिकारियों को उचित निर्देश जारी करे ताकि पीड़िताओं को उनके जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करने वाले किसी भी तरह के उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़े”।

मुन्नी पोट्टाम और सुनीता पोट्टाम की सुरक्षा को लेकर एक अन्तरिम आवेदन, फर्जी मुठभेड़ के केस में, सर्वोच्च न्यायालय में भी दिनांक 10.01.2018 को लगाया गया। मुख्य न्यायाधीश श्री दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने आवेदन को 5.02.2018 को सुनवाई हेतु रखा है. उन्होंने यह भी आदेशित किया कि इस आवेदन की सुनवाई “नंदिनी सुन्दर व् अन्य” की जनहित याचिका के साथ की जाये।

**
डा. लाखन सिंह
अध्यक्ष

एडवीकेट सुधा भारद्वाज
महासचिव
पीयूसीएल छतीसगढ़

Related posts

8 साल पहले शहीद हुए बेटे का पिता डर डर भटक रहा है ,अपने बेटे का जीपीएफ लेने ले लिए

cgbasketwp

पारंपरिक आदिवासी महासभा में पारित हुए छ एतिहासिक प्रस्ताव , महासभा नें रद्द किया किया कुदरगढ़ का ट्रस्ट .

News Desk

मुझे डर लगता है , क्या करू क्या , आपको डर लगता है ?

News Desk