अदालत अभिव्यक्ति आंदोलन औद्योगिकीकरण जल जंगल ज़मीन दलित पर्यावरण प्राकृतिक संसाधन मजदूर महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार राजकीय हिंसा राजनीति शासकीय दमन

रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चूंकि ख़ुद जेल जाने से डरते हैं इसलिए वे सोचते हैं कि सुधा जैसे शांतिप्रिय और संविधान में विश्वास रखने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी वो जेल भेज कर डरा देंगे लेकिन उन्हें शायद ये मालूम नहीं कि इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ देश की पूरी जनता है. : जनसंगठनों और राजनैतिक दलों का धरना .

रायपुर / 2.09.2018 

रायपुर के बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ की साथी अधिकवक्ता व ट्रेड यूनियन की नेत्री सुधा भारद्वाज सहित देश के अलग अलग हिस्से से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किए जाने के विरोध में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया था व महामहिम राष्ट्रपति महोदय को इस संबंध में ज्ञापन भी दिया गया।

एक दिवसीय इस धरने में प्रदेश भर से लोग व संगठन शामिल हुए। जिनमें छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, PUCL, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, मजदूर कार्यकर्ता समिति, रेला, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, दलित आदिवसी मंच,अखिल भारतीय किसान सभा, अम्बेडकर युवा मंच बिलासपुर, भारत जनांदोलन, दलित आदिवासी मजदूर संगठन, जनाधिकार संगठन कांकेर, गुरु घासीदास सेवादार संघ, विस्थापन विरोधी संघर्ष, हसदेव अरण्य बचाओ समिति, किसान संघर्ष समिति कुरूद, छत्तीसगढ़ महिला अधिकार मंच, महिला मुक्ति मोर्चा, आदिवासी मजदूर किसान संघर्ष समिति, जशपुर जिला बचाओ संघर्ष समिति ,आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया(माले रेड स्टार), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आदि राजनैतिक दल के लोग इसमें शामिल थे।

धरने में शामिल होने बस्तर से आई आदिवासी संघर्ष का प्रतीक व आम आदमी पार्टी की नेत्री सोनी सोरी ने कहा कि सुधा जैसी शख्शियत के बारे में ये दुष्प्रचार करना कि वो प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश में शामिल हैं, दुखद है। क्योंकि जब मैं जेल में यातनाएं झेल रही थी तब सुधा दीदी से मिलने पर गुस्से में जब कुछ बोलती, तो सुधा दीदी मुझे संवैधानिक दायरे में रहकर लड़ने के लिए प्रोत्साहित करती थी। सोनी सोरी ने कहा कि हम सब सुधा भारद्वाज है, ये सरकार क्या रिहा करेगी, हम सब उन्हें रिहा कराएंगे।
छत्तीशगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने कहा कि शहीद शंकर गुहा नियोगी से हमने वैचारिक संघर्ष और निर्माण की विरासत पाई हैं। नियोगी की हत्या के बाद भी मजदूरों ने शांति पूर्वक एवं संवैधानिक तरीकों से अपना संघर्ष जारी रखा। सुधा जी ने न सिर्फ मजदूरों के बीच रहकर उनके लिए कार्य किया बल्कि उनके अधिकारों के लिए न्यायालय में लड़ने वकालत की हैं। प्रदेश की समस्त जनआंदोलन सुधा जी के साथ हैं।

AAP के प्रदेश अध्यक्ष संकेत ठाकुर ने बोला कि सुधा जी संघर्ष का प्रतीक हैं ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए एक फोन करने पर दौड़ी चली आती हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो आने वाले 28 सितंबर को को शहीद नियोगी जी की पुण्यतिथि पर हम जेल भरो आंदोलन का आह्वान करेंगे।

संजय पराते ने कहा कि ये सरकार फासीवादी सरकार है। इस सरकार में मोब लिंचिग की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। शोषितों की आवाज़ दबाई जा रही है। यदि कोई शोषितों की आवाज़ उठाता है तो ये सरकार उसे इसी तरह परेशान करती है और झूठे मामले में फंसा कर जेल भेज देती है।

सारंगढ में किसानों के हकों के लिए संघर्षरत परिवेश मिश्रा ने कहा कि इस घटना की वो निंदा करते हैं तथा इस पूरे आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन देने की बात भी उन्होंने कही।

रायगढ़ के मानवाधिकार कार्यकर्ता और एक्टिविस्ट डिग्री चौहान ने कहा कि मोदी सरकार 2019 में होने वाले चुनाव में हार के भय से ये उल्टी सीधी हरकत कर रही है।

छत्तीसगढ़ के किसान नेता आनन्द मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चूंकि ख़ुद जेल जाने से डरते हैं इसलिए वे सोचते हैं कि सुधा जैसे शांतिप्रिय और संविधान में विश्वास रखने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी वो जेल भेज कर डरा देंगे लेकिन उन्हें शायद ये मालूम नहीं कि इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ देश की पूरी जनता है।


उन्हीने कहा कि आरएसएस ने कभी आज़ादी की लड़ाई मे हिस्सा नहीं लिया ये तो अंग्रेजों की खुशामत करते थे उन्हीं के नक्शेकदम पर चल कर ये bjp सरकार धर्म और जाति के आधार पर देश को बांट कर राज करना चाहती है। लेकिन देश की जनता अब उनकी इस साजिश को पहचान चुकी है। दो मोदी तो देश छोड़ कर भाग गए इस मोदी को जनता भागने नहीं देगी 2019 के चुनाव में सबक सिखाएगी।

इनके अलावा आलोक शुक्ला, भीमराव बांगड़े, पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, नन्द कश्यप, रिनचिन, एडवोकेट प्रियंका शुक्ल, डाक्टर लखन सिंह, तेजराम विद्रोही, सुरेश टिकाम, बंसी लाल, नरोत्तम शर्मा, रामाकांत, कलादास, राजेश्वरी साहू, लीलाधर साहू, राजेन्द्र सायन, लखन सुबोध, अनिल अग्रवाल, विश्वजीत हरोड़े, कन्हैया पटेल, गायत्री सुमन, राजिम तांडी, तुहिन देव, सौरा यादव, बिजेंद्र तिवारी आदि शामिल हुए व विरोध स्वरूप अपना वक्तव्यों को देते हुए सभा को संबोधित किया और सरकार द्वारा करवाये गए इस तनाशाह झूठी सरकार की कार्यवाही का विरोध किया ।

 

**

Related posts

लाल गलियारे से… विमोचन अवसर पर शामिल होंगे देश के कई दिग्गज

News Desk

आदिवासी परिवार का दो वर्षों से सामाजिक बहिष्कार

cgbasketwp

दस्तावेज़ ः तथ्यात्मक संदर्भों में ः गुरुघासीदास के पूर्व पेशवा मराठों के अत्याचार .ःः लखनलाल कुर्रे सुबोध .

News Desk