आदिवासी आंदोलन औद्योगिकीकरण किसान आंदोलन जल जंगल ज़मीन पर्यावरण प्राकृतिक संसाधन शासकीय दमन

रायगढ़ ; तमनार की हवा में घुल रहा है ज़हर , एनजीटी ने दिया आदेश, कमेटी की नियुक्त . जिला प्रशाशन के साथ मिलकर करेगी नियंत्रण .

 

15.09.2018 / केलो प्रवाह से आभार सहित .

एक याचिका पर सुनवाई के बाद , एनजीटी ने आदेश देते हुए तमनार में प्रदुषण को चरमपूर्ण माना हैं . पूर्व में एनजीटी द्वारा क्षेत्र के सर्वे के लिये कमेटी बनी हैं .अब अदालत ने उनके सुझावों को तत्काल लागू करने का आदेश दिया हैं , इस मामले में दो विशेषग्य भी साथ होंगे . , एनजीटी के सामने जो रिपोर्ट पेश की गई है उसमे जलवायु में केंसर कारक तत्व मिलने की पुष्टि की गई हैं.
कोयला खदानो से भरे हुए तमनार ब्लोक में निवासियों के लिए रहना दूभर हो गया हैं . हवा पानी मिट्टी तीनो पर प्रदूषण का ज़हर फ़ैल गया हैं. इन मुद्दे पर शिवपाल भगत ने , एनजीटी में याचिका दायर की थी. उन्होंने तमनार के 119 में से 90 गांवो में प्रदूषण के स्तर के बढ़ते आंकड़े पेश किये थे .साथ ही पूर्व और वर्तमान आवंटी कंपनियों द्वारा ग्रीन बेल्ट और पर्यावरण सरंक्षण के कार्यो पर भी प्रश्न उठाये थे . इस पर एनजीटी ने 18 अप्रेल 2017 को एक कमेटी गठित की थी. जिसमे आईआईटी और आईएसएस धनबाद के विशेषग्य डा. सतीश सिन्हा की सीएमपीडीआई रांची के चीफ मैनेजर अभिजीत सिन्हा ,पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के वैज्ञानिक पुर्शोत्तम सखारे और एमओआईएफ नागपुर के वैज्ञानिक डा. सुरेश कुमार शामिल थे .इस कमेटी में तमनार का दौरा किया और रिपोर्ट एनजीटी को प्रस्तुत की . उन्होंने अवलोकन के आधार पर सुझाव भी पेश किये . कमेटी ने खदानों से हो रहे प्रदुषण को बहुत खतरनाक बताया .

दिसंबर 2016 के बाद से पर्यावरण सुधार के लिये कोई गंभीरता पूर्वक कार्य नहीं किया गया .मायनिंग लीज से लेकर बह रहे बेंदरा नाला के डायवर्सन के लिये कुछ नहीं किया गया. केलो नदी और माइंस के बीच बहुत कम दूरी होने की वजह से भूजल स्रोत में बहुत प्रदुषण हो रहा हैं .पूर्व आवंटी को इसके लिये जिम्मेदार मान गया हैं, खदान में आग लगने के कारण हवा में कार्बनडाय ऑक्साड और हाड्रोसल्फाइड बहुत मात्र में बढ़ गया हैं.कमेटी ने दो पूर्व आवंटी जे एसपीएल के विरुद्ध सख्त टिपण्णी भी की हैं .कहा गया की जेएसपीएल ने पर्यावरण अनुमति को गंभीरत से नहीं लिया .

दो सदस्यों की कमेटी आएगी रायगढ़

एनजीटी ने रिपोर्ट में मिले सुझावों को लागू करने के लिए इंडियन इंस्टीट्युट ऑफ़ फोरेस्ट मेनेजमेंट भोपाल और आईएसएस धनवाद के दो प्रतिनिधि नियुक्त करने के आदेश दिए हैं. दोनों अधिकारी जिला प्रशाशन से मिलकर सुझावों पर अमल करेंगे और तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देंगे .

12 घातक तत्व मिले वातावरण में

अपीलार्थीं ने याचिका में क्षेत्र के प्रदूषण में उच्च स्तर के खतरे बढ़ने पर कई तथ्य प्रस्तुत किये हैं .119 में से 90 गाँवो का जल स्तर 250 फिट नीचे आ गया हैं. वहीँ नदी नाले सूखते जा रहे हैं. इलाके के जल हवा और मिटटी में 12 तरह के घातक तत्व पाए गए हैं. इनमे एलमुनियम आर्सोनिक , एंटीमोनी ,बोरेन ,कैडियम ,क्रोमियम ,लेड ,मैगनीज ,निकल ,सेलेनियम ,जिंक और वेदियम शामिल हैं .इनमे से आर्सोनिक और कैडमियम कैंसर करक हैं.

**

Related posts

एक दिवसीय बैठक दिनांक 15 जून 2017, रायपुर में . छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन 

News Desk

दमन के खिलाफ एकजुटता बयान .:  Solidarity Statement against Repression : 80 से भी ज़्यादा फिलिस्तीनी, लातिन अमरीकी और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने गिरफ्तार मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के लिए एकजुटता का एक सशक्त सन्देश.

News Desk

इलाहाबाद में दलित छात्र की हत्या औऱ छतीसगढ मे  दलितों,अल्पसंख्यको पर बढ़ते हिंसा के खिलाफ बिलासपुर में जॉइंट एक्शन कमेटी ने  किया प्रदर्शन , राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन .

News Desk