शिक्षा-स्वास्थय

रायगढ : हीमोफिलिया के रोगी राहुल यादव की मौत शहर के सरकारी अस्पताल में इलाज में चूक का मामला आया सामने…

रायगढ से नीतिन सिन्हा की रिपोर्ट

रायगढ़ । जानकारी के अनुसार ग्राम पुसौर के हीमोफिलिया के रोगी राहुल यादव की मौत ईलाज में लापरवाही कारण से रायगढ़ सरकारी अस्पताल में हुई,जो हीमोफिलिया के रोगियों के लिए जीवन रक्षक दवा है,अस्पताल में दवा नही होने की दशा को दर्शाता है। 2018 की जनहित याचिका 110.78 के खिलाफ हाईकोर्ट सीजी के निर्देश के बाद भी सरकार मरीजों को दवा और इलाज देने में विफल है। सरकार के अधिकारियों की लापरवाही से एक और मरीज की मौत हो गई।

*आइये जाने हीमोफीलिया है क्या बला.और यह कितने प्रकार का होता है?*

हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है यानी यह बीमारी माता-पिता से बच्चे में भी हो सकती है. आमतौर पर यह बीमारी पुरुषों में अधिक पाई जाती है. गुणसूत्र (क्रोमोसोम) इस बीमारी के वाहक यानी बीमारी को आगे भेजने वाले होते हैं.

इस बीमारी से ग्रसित लोगों में रक्त का थक्का नहीं बनता है. इन मरीजों के रक्त में प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लौटिंग फैक्टर (clotting factor) भी कहते है.

यह प्रोटीन फैक्टर रक्त में थक्का जमा कर उसका बहना रोक देता है.रक्तस्राव अधिक हो तो जानलेवा हो सकता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि हीमोफीलिया कैसी बीमारी है, कितने प्रकार की होती है और इसे नियंत्रित किया जा सकता है या नहीं.
हीमोफीलिया रोग कितने प्रकार का होता है
मुख्यतौर पर हीमोफीलिया रोग दो प्रकार का होता है. हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी.
हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती है.

हीमोफीलिया बी में फैक्टर 9 की कमी होती है.यानी रक्त का थक्का या क्लॉट जमाने के लिए आवश्यक तत्व को फैक्टर कहा जाता है।

जो कि एक थक्केदार प्रोटीन है.
हीमोफीलिया ए (Hemophilia A) और हीमोफीलिया बी (Hemophilia B)
हेमोफिलिया ए एक ऐसा आनुवंशिक विकार है जो फैक्टर 8 प्रोटीन की कमी के कारण होता है और हीमोफीलिया बी, फैक्टर 9 की कमी से होता है. लगभग एक तिहाई मामलों में यह सहज-आनुवंशिक उत्परिवर्तन (spontaneous genetic mutation) के कारण होता है. रक्त विकार सभी जातीय समूहों को समान रूप से प्रभावित करता है।

यह जानलेवा बीमारी है…

प्रत्येक वर्ष के 17 अप्रैल को हमारे देश मे हीमोफीलिया दिवस के रूप में मनाया जाता है।। भारत में 10 हजार में एक बच्चा हिमोफीलिया की चपेट में
यह शाही बीमारी के नाम से प्रसिद्ध है।। जबकि हिमोफीलिया एक खतरनाक बीमारी है,जो आनुवंशिक बीमारी होने के कारण यह पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में पहुंचती है। बीमारी के लक्षण पुरूष में पाये जाते है। जबकि महिलाएं इसकी वाहक होती है। यह बीमारी सबसे पहले ब्रिटिश राजघराने में देखने को मिली थी। फिर यह पेरिस, चाइना आदि के राजघरानों में पाई गई। अब यह बीमारी भारत के लिए भी बड़ी समस्या है। जन्म लेने वाले दस हजार पुरूष बच्चों में एक बच्चा इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है।
जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. विनय कुमार सिंह यादव बताते है कि इस बीमारी के शिकार लोगों के रक्त का थक्का नहीं जमता, आम तौर पर रक्त श्राव ही इनकी मौत का कारण बनता है।

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