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रायगढ: जिंदल सीमेंट प्लांट प्रबन्धन के वादा-खिलाफी के विरुद्ध ग्रामीण आर-पार की लड़ाई में.

खबर सार के लिये नितिन सिन्हा की रिपोर्ट

*सात सूत्रीय मांगो को लेकर जिंदल के विरुद्ध आर्थिक नाकेबंदी सफल, दिन भर न उद्योग में गाड़ियां लगी न कर्मचारी काम पर आए*

रायगढ़:– जिला मुख्यालय से करीब दस किमी दूर ग्राम कोसमपाली में स्थित जिंदल सीमेंट उद्योग प्रबन्धन के मुख्य गेट पर आज दोपहर करीब 12 बजे सैकड़ो की संख्या में ग्रामीणों के जमा हो जाने से तब अप्रिय स्थिति निर्मित हो गई। जब अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर नाराज ग्रामीणो ने प्रबन्धन के विरुद्ध *आर्थिक नाकेबंदी* की घोषणा कर दी और मुख्य मार्ग में धरना देकर बैठ गए।।

यहां नाराज ग्रामिणों के द्वारा कड़े विरोध और आर्थिक नाकेबंदी को रोकने आये जिंदल प्रबन्धन के कुछ अधिकारियों के द्वारा आंदोलनकारी ग्रामीणों से बदतमीजी किये जाने पर अप्रिय स्थिति निर्मित हो गई। जिसे सम्हालने के लिए पुलिस को दल-बल सहित घटना स्थल पर आना पड़ा। इधर ग्रामीणों ने मुख्यालय के मीडिया कर्मियों को घटना की सूचना दे दी। कुछ ही देर में जिंदल सीमेंट प्लांट के जिम्मेदार अधिकारियों ने बड़ी संख्या के उद्योग के निजी सुरक्षाकर्मियों को मौके पर बुला लिया। जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। हालांकि मीडिया कर्मियों के पहुंचने से पहले प्रबंधन के लोग एक-एक कर गायब हो गए। जबकि रायगढ़ पुलिस उद्योग की सुरक्षा मे मुस्तैदी से लगी रही ।

*प्रबन्धन के वादा खिलाफी और बेइंतेहा प्रदूषण से नाराज ग्रामीण*

इधर नाराज ग्रामीणों ने बताया कि जिंदल उद्योग प्रबन्धन की तानाशाही की वजह से यहाँ उनका जीवन पूरी तरह से नरकमय हो गया है। अपनी समश्याओं और मांगो को लेकर कई बार लिखित और मौखिक ज्ञापन दिए जाने के बाद प्रबंधन ने उनकी ओर ध्यान नही दिया। अंततः मजबूर हो कर आज उन्हें आर्थिक नाकेबंदी का निर्णय लेना पड़ा। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अब जब तक उनकी मांगें पूरी नही होगी *जिंदल सीमेंट प्लांट की नाकेबंदी* जारी रहेगी। इधर नाकेबंदी के कारण आमदिनों में काफी चहल-पहल रहने वाले इस उद्योग क्षेत्र में बिल्कुल सन्नाटा पसरा हुआ था। उद्योग के मुख्य गेट से लगने वाली प्रधानमंत्री सड़क में दोपहर बाद कोई वाहन नही चला,न ही कोई उद्योग कर्मी प्लांट आ पाया। इधर ग्रामीणों ने उनकी सात प्रमुख मांगो के विषय मे बताया कि उद्योग स्थापना के बाद से ही प्रबंधन उनसे सौतेला व्यवहार करते आ रहा है। सीमेंट प्लांट की स्थापना के बाद से ही उनके सहित आसपास के 6 गांवों में भयंकर प्रदूषण फैलने लगा है। उद्योग के राखड़ डेम की वजह पहले से ही गांव वालों को भारी समश्या का सामना करना पड़ रहा था । आज ये हालत है कि राखड़ डेम से फ्लाई एस उड़कर गांवों के घरों में सीधे घुसने लगा है। लोंगो को न केवल सांस लेने में बल्कि सामान्य दैनिक कार्यों में भी बड़ी परेशानियां हो रही है। यही नही उद्योग प्रबंधन अपने आश्रित गांवों को लेकर भी बड़ी लापरवाही बरत रहा है। उसने csr मद से छूट-पूट कामों को छोड़कर अपने आश्रित गांवों में कोई भी आवश्यक मूलभूत कार्य नही करवाए है।।

आंदोलनकारी ग्रामीणों ने बताया कि हमारी आस्था के केंद्र *गांव के देवलास (देवस्थल)* में उद्योग गंदगी फैला रहा है। सड़क पर लागातार भारी वाहन चलाये जाने से धूल और गंदगी के कारण देवलास पट गया है और धकसने लगा है।। इधर गांव तक आने वाली प्रधानमंत्री सड़क पर प्रबंधन के द्वारा नियमिय भारी वाहन चलाए जाने से सड़क भी बीते कई महीनों से खस्ताहाल हो चुकी है। जिसके निर्माण की तरफ प्रबन्धन कोई ध्यान नही दे रहा है। ऐसे में गांवों तक आवागमन इस बारिश में काफी मुश्किल हो गया है।

*भुविस्थापित परिवार के शिक्षित युवाओ को रोजगार नही*

वही स्थानीय युवाओ को रोजगार देने के मामले में भी प्रबंधन ने जबरदस्त बेईमानी की है।। गांवों में दर्जनों शिक्षित एवं योग्य युवाओ को उद्योग ने कोई काम(रोजगार) नही दिया है। जबकि बाहरी राज्यों के सैकड़ों कर्मचारी यहां काम कर रहे हैं। इन सभी मांगों को लेकर ग्रामीण पिछले एक वर्ष से प्रबन्धन और जिला प्रशासन को कई बार सूचना दिया गया परन्तु झूठे आश्वाशनों के अलावा उन्हें कुछ नही मिला। आखिरकार आज दिनांक 9 अगस्त 2019 को निराश और नाराज ग्रामीणों में जिंदल सीमेंट प्लांट की आर्थिक नाकेबंदी का फैसला लिया।

*उद्योग के मुख्य गेट पर जमे रहे ग्रामीण जमकर की नारेबाजी*

इधर जिंदल गेट के पास 40 से 50 की संख्या में जमा ग्रामीण युवा जमकर नारे बाजी कर रहे थे। ग्रामीणों की मांग थी कि जिंदल प्रबन्धन से मीडिया कर्मियों मुखातिब होकर उनसे पूछें कि उन्होंने ग्रामीणों की मांग को लेकर अब तक क्या किया है.? परन्तु उद्योग के मुख्य गेट पर मीडिया कर्मियों को निजी सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिया और प्रबंधक हेमंत वर्मा से बात कराई उन्होंने मीडिया को कुछ भी बताने से साफ-साफ इंकार कर दिया। जबकि घटना की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन की तरफ से तहसीलदार रायगढ़ मौके पर आ पहुंचे । उन्होंने ग्रामीणों की मांग जानी और उसे जायज पाये जाने के बाद उद्योग प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए आवश्यक रूप से कल उनकी मध्यस्थता और उपस्थिति में ग्रामीणों से विवाद का सुखद पटाक्षेप कर लेने का निर्देश दिया।

*तहसीलदार की समझाइस के बाद भी डटे रहे ग्रामीण*

इधर ढीठ और गैर जिमेम्दार उद्योग प्रबन्धन के खिलाफ ग्रामीण विरोध रोकने को तब तक तैयार नही दिखे जब तक प्रबन्धन लिखित में उनकी सभी मांगो को मनाते हुए समय सीमा निर्धारित न कर देता,जबकि तहसीलदार साहब के द्वारा मध्यसता कर कल तक मामले को निपटा लेने की बात कही गई। परन्तु आंदोलन रत ग्रामीण बिना मांग पूरी हुए जगह से हटने को तैयार नही हुए। उनका साफ कहना था कि उद्योग प्रबन्धन या तो तत्काल उनकी मांग माने और बुनयादी काम प्रारम्भ करवाये या तब तक के लिए लिखित में पत्र देकर नियत तिथी की सार्वजनिक घोषणा करे।

*ग्रामीणों की सात प्रमुख मांगें निम्नानुसार है* ..

1, उद्योग के द्वारा फैलाये जा रहे भारी-प्रदूषण को रोकने का स्थायी समाधान या उपाय किया जाए.

2, जिंदल के राखड़ डेम की ऊंचाई न बढाई जाए बल्कि उससे उड़ने वाले राख की स्थाई रोकथाम की व्यवस्था हो।

3,गांव तक सुगम यातायात के लिए बनाई गई प्रधानमंत्री सड़क पर उद्योग प्रबन्धन भारी वाहन न चलाये।

4,टूट-फुट चुकी सड़क का पक्का निर्माण करवाया जाए।

5,देवलास का उत्थान किया जाए।

6,स्थानीय युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार दिया जाये।

7, भु-विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर सुविधाएं दी जाए।

विशेष:- *समाचार संकलन के दौरान मीडिया कर्मियों ने पाया कि वास्तव में जिंदल उद्योग प्रबन्धन के द्वारा क्षेत्र में जबर्दस्त प्रदूषण फैलाया जा रहा है। उनके द्वारा पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्देषित प्लांट में E.S.P. का उपयोग नही किया जा रहा है। जिससे उद्योग की चिमनियों से गहरे काले रंगे के धुएं उठ कर वायुमंडल को बुरी तरह से दूषित कर रहे थे। चुकी समाचार संकलन के दौरान हल्की बूंदाबांदी हो रही थी,जिससे चिमनियों से निकलने वाले काले विषैले तत्व पानी की बूंदों के सांथ आसपास में गिर रहे थे। वही सड़क के किनारे या खेतों के गड्ढों में बारिश के पानी का काला रंग दिख रहा था,जबकि बरसात के काले बादलों के नीचे उद्योग की चिमनियों से निकलने वाले भूरे काले धुंए से दूसरा बादल बना दिख रहा था।*

*जिंदल उद्योग पर्यावरण में घोल रहा है जहर,भारी प्रदूषण की तरफ पर्यावरण विभाग का ध्यान नही*

जिसके विषय मे समाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण विद राजेश त्रिपाठी का कहना है कि जिंदल उद्योग प्रबन्धन के द्वारा ESP मशीन नही चलाये जाने के कारण चिमनियों से नियमित काले धुंए निकल रहे है। आमतौर पर esp मशीन के संचालन से होने वाले भारी खर्च से बचने के लिए उद्योग प्रबन्धन ऐसी चालाकियां करता है। जिनसे वायुमंडल बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट कहा गया हैं कि औद्योगिक प्रदूषण से बचने के लिए उद्योग आवश्यक रूप से esp मशीन का संचालन करें। जिंदल उद्योग में कम से कम 20 esp मशीन चलनी चाहिए। परन्तु हालात देखकर कतई नही लगता कि उद्योग प्रबन्धन ऐसा कर रहा है। ग्रामीणों की मांगे पूरी तरह से जायज है। जबकी उद्योग के द्वारा फैलाये जा रहे भारी प्रदूषण के प्रति जिला पर्यावरण और जिला प्रशासन आंखें मूंद कर बैठा हुआ है।। उसे आम लोगों की समश्याओं और जीवन मूल्यों की कोई चिंता नही है.

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