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रमन सिंह के चेहरे को चमकाने के खेल में लगी 21 निजी कंपनियों के खिलाफ जांच और लूटने में लगे कतिपय सलाहकार अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में.

राजकुमार सोनी / अपना मोर्चा. काम के लिये.

27.12.2018

रायपुर / जनसंपर्क विभाग और संवाद में पब्लिक रिलेशन की आड़ लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के चेहरे को चमकाने के खेल में लगी 21 निजी कंपनियों के खिलाफ जांच बैठ गई है. इसके अलावा जनता के खून-पसीने की कमाई को लुटने में लगे कतिपय सलाहकार अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में रखी गई है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के बाद जिन कंपनियों को जांच के दायरे में रखा गया है उनमें मुंबई की बैटर कम्युनिकेशन, एड फैक्टर, टच वुड, 77 इंटरटेनमेंट, एक्सेस माई इंडिया, दिल्ली की वीडियो वॉल, करात इंटरटेनमेंट, ग्रीन कम्युनिकेशन, सिल्वर टच, यूएनडीपी, गुजरात की वॉर रुम, मूविंग फिक्सल, रायपुर की ब्रांड वन, व्यापक इंटरप्राइजेस, क्यूबस मीडिया लिमिटेड, आईबीसी 24, कंसोल इंडिया, भिलाई की कंपनी क्राफ्ट, आसरा, कैकटस शामिल है. इसके अलावा आलोक नाम के एक प्रोफेसर ने भी संवाद में अपनी दुकान खोल रखी थी. जबकि क्यूब मीडिया के सीईओ श्री डोढ़ी का कारोबार भी संवाद से ही संचालित हो रहा था. हैरत की बात यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अफसर की पत्नी की जितनी सक्रियता मुख्यमंत्री निवास में बनी हुई थीं उससे कहीं ज्यादा वह संवाद में सक्रिय थीं. अफसर की पत्नी यही से पूर्व मुख्यमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के गरीब बच्चों की तस्वीरों को फेसबुक, वाट्सअप में शेयर करती थी और लिखती थीं- गरीब बच्चों को आशीष दे रहे हैं हमारे बड़े पापा…हम सबके बड़े पापा.

भाजपा के प्रचार का अड्डा बन गया था संवाद

शासन की नीतियों का प्रचार-प्रसार तो अमूमन सभी शासकीय विभाग करते हैं,लेकिन छत्तीसगढ़ के संवाद का दफ्तर भाजपा के प्रचार का अड्डा बन गया था. यहां विभिन्न निजी कंपनियों के लिए कार्यरत कर्मचारी सुबह से लेकर शाम तक सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में यही देखा करते थे कि विपक्ष की कौन सा मैटर ट्रोल हो रहा है. पाठकों को याद होगा कि कंसोल इंडिया से जुड़े कर्मचारियों ने ही सोशल मीडिया में किसानों की कर्ज माफी को लेकर झूठी पोस्ट वायरल की थी. इस मामले में कांग्रेस ने बकायदा थाने में लिखित शिकायत भी कर रखी है, मगर पुलिस ने अब तक जांच भी प्रारंभ नहीं की है. खबर है कि इस निजी कंपनी में एक कद्दावर अफसर की पत्नी का भाई कार्यरत था. वैसे तो इस कंपनी के कई जगहों पर कार्यालय थे लेकिन रायपुर के अंबुजा माल स्थित मुख्य दफ्तर में ही इस कंपनी ने प्रदेश के मूर्धन्य संपादकों, इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को धन बांटा था और उनका वीडियो भी बनाया था. फिलहाल इस दफ्तर पर ताला जड़ गया है.

सुपर सीएम का खास दखल

नाम न छापने की शर्त पर जनसंपर्क विभाग के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों ने बताया कि विभाग में सुपर सीएम की जबरदस्त दखलदांजी कायम थीं. वे हर पल यहीं देखते थे कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के चेहरे को कैसे प्रोजेक्ट किया जाए. सीएम को प्रोजक्ट करने के चक्कर में कई बार अन्य मंत्रियों की तस्वीरों को भी हटा दिया जाता था. जनसंपर्क विभाग और संवाद का दफ्तर उनके निर्देशों की पालना में ही लगा रहता था. एक कर्मचारी ने बताया कि जनसंपर्क और संवाद का काम सही आकंड़ों को प्रस्तुत करना है, लेकिन पूरा महकमा जनता के समक्ष झूठ परोसने के काम में ही लगा हुआ था. कर्मचारी के मुताबिक जनसंपर्क आयुक्त राजेश टोप्पो ने नियम-कानून से परे जाकर सैकड़ों ऐसे काम किए हैं जिसकी वजह से उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है. कर्मचारी ने बताया कि संवाद ने जिला विकास नाम की जो पुस्तिका प्रकाशित की है उसमें सारे के सारे आकंड़े झूठे हैं. सरकार के कामकाज को बेहद विश्वसनीय और अनोखा बताने के लिए कमजोर आकंड़ों को मजबूत बताने की कवायद की गई है.

कुछ ऐसे शुरू हुआ खेल

यह कम हैरत की बात नहीं है कि वर्ष 2003 के बाद से जनसंपर्क विभाग कभी भी जनता से सीधा संपर्क नहीं रख पाया। विभाग और उसकी सहयोगी संस्था संवाद में बट्टमार और उठाईगिर जगह बनाने में इसलिए सफल हो गए हैं क्योंकि निजी कंपनियों के लोग अफसरों और कर्मचारियों को बगैर किसी मध्यस्थता के सीधे घर पर जाकर कमीशन देने लगे थे. विभाग के कतिपय लोग यह भी कहते हैं कि कतिपय अफसर शराब और शबाब के शौकीन थे ( अब भी है ) जिसका फायदा निजी कंपनियों ने जमकर उठाया. इस विभाग में निजी कंपनियों की इंट्री तब सबसे ज्यादा हुई जब वर्ष 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बनने में सफल हुए. गुजरात से यह हवा चली कि मोदी को जिताने में सोशल मीडिया की अहम भूमिका है. मोदी ने एक टीम बनाकर काम किया और….

सर्वविदित है कि संवाद का काम केवल पब्लिसिटी मैटर क्रियेट करना है, लेकिन मोदी की जीत के बाद निजी कंपनियों को काम देने के लिए विज्ञापन निकाला गया. सबसे पहले मुंबई की एड फैक्टर ने इंट्री ली. यह कंपनी वर्ष 2015 से लेकर 2017 तक सक्रिय रही और इसे प्रत्येक माह लगभग साढ़े पांच लाख रुपए का भुगतान मिलता रहा. इसी कंपनी में कार्यरत तुषार नाम के एक शख्स ने कुछ ही दिनों में वॉर रुम नाम की एक नई संस्था खोली और जनसंपर्क आयुक्त राजेश टोप्पो के साथ मिलकर लंबा खेल खेला.

( इस खबर के साथ कुछ बिल भी चस्पा है जो संवाद ने जनसंपर्क के संचालक को प्रस्तुत किया है. संचालक ने यह बिल कंपनी को सौंपा था. छत्तीसगढ़ जैसे गरीब प्रदेश में बिल की यह राशि कह सकते हैं लूट की यह राशि हैरतअंगेज करने वाली है. )

रमन का चेहरा चमकाने वाली 21 कंपनियां जांच के दायरे में
रमन का चेहरा चमकाने वाली 21 कंपनियां जांच के दायरे में
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