कला साहित्य एवं संस्कृति

” रंग सरोवर , का अंतिम पूर्वाभ्यास , अश्लीलता से परे , लोककला का सार्थक मंचन.गरियाबंद .

किरीट ठक्कर


गरियाबंद। सुविख्यात छत्तीसगढ़ी फिल्मों व नाट्यमंच के निर्देशक , गीतकार, संगीतकार भूपेंद्र साहू की नाट्य संस्था ” रंग सरोवर ,के मंचन का फाइनल रिहर्सल बुधवार की रात ग्राम बारूका में किया गया , गिने चुने लोंगो की उपस्थिति में की गई ये प्रस्तुति बहुत ही शानदार रही , पूरी प्रस्तुति के दौरान भूपेंद्र साहू का छत्तीसगढ़ी लोककला के प्रति समर्पण भाव अनुभूत हुआ , एक छोटे से गांव में छत्तीसगढ़ के चुनिन्दा लोक कलाकारों को एकत्रित करना , नए कलाकारों को तराशना , उन्हें मंच देना ,मंचीय साधन सुविधाएं उपलब्ध कराना , निश्चित ही भूपेंद्र साहू का ये कार्य लोककला के प्रति सच्चा समर्पण है््


भारत भवन के मंझे हुए कलाकार भूपेंद्र साहू छत्तीसगढ़ी सफल फ़िल्म मया ले ले मया दे दे , जैसी कई फिल्मों के निर्देशक व गीतकार है।


रंग सरोवर की प्रस्तुति पारम्परिक छत्तीसगढ़ महतारी की आरती वंदना से प्रारम्भ होती है , आगे चलकर इसमे सुआ , करमा ,पंथी जैसे पारम्परिक छत्तीसगढ़ी नृत्य , सुमधुर गीतों के साथ प्रस्तुत किये जाते हैं , ” मोर मया के करण सुआ , मैं तोर मैना दीवानी रे। बोल रे मिट्ठू तपतकुरु … बोल मया के बानी रे ।।


तपतकुरु….तपतकुरु … जैसे गीत और नृत्य से दर्शक झूम उठतें है , गाड़ी वाला जहुरिया बइठे विलम्बले आमा छांव में .. इस गीत में नए गायक गायिका को अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर दिया गया है , ग्राम कोपरा के युवा गायक खिलेंद्र साहू , छत्तीसगढ़ी गीतों के सुप्रसिद्ध गायक मिथलेश साहू की आवाज का आभास कराते है।


प्रहसन ‘ मया के मड़वा , बेहतरीन अदाकारों के द्वारा प्रस्तुत किया गया मनोरंजक मंचन है, जिसमें लेड़गा ( मनोरोगी ) के चरित्र के साथ साथ इस प्रहसन में , बड़े लेड़गा पुत्र को लेकर बाप की विवषता , छोटे पुत्र के विवाह के बीच छत्तीसगढ़ी परम्परा में बिहाव के रीति-रिवाजों और बिहाव के दौरान गाये जाने वाले गीतों को खूबसूरती के साथ पिरोया गया है। बीच बीच में रिश्तेदारों की नोक झोंक के अलावा एक युवा प्रेम कहानी भी समानांतर में चलती रहती है , प्रहसन का अंत जहाँ एक क्षण में युवा प्रेमियों के मिलन की खुशी देता है तो वही दूसरे ही क्षण में लेड़गा की आत्महत्या दर्शको को द्रवित कर देती है।


पूरा मंचन अश्लीलता से परे ,सुमधुर गीत संगीत से भरपूर , लोक कला को समर्पित है।

Related posts

जनमुक्ति मोर्चा ने मनाया शहीद वीरनारायण. सिंह का शहादत दिवस .विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये .

News Desk

15. महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर गाँव में चोरी क्यों नहीं होती ? धर्म और जाति संबंधी दृष्टिकोण पर पुनर्विचार संदर्भ नरेन्द्र दाभोलकर.

News Desk

गिरौधपुरी से सोनाखान की एतिहासिक मैत्रीयात्रा 17 फरवरी को . मनुवादियों  के खिलाफ एक जनवादी साझा संघर्ष ,एतिहासिक सच्चाइयों की स्थापना फैलाये गये झूठ के खिलाफ़ः गुरू घासीदास सेवा संघ का गंभीर प्रयास . 

News Desk