आदिवासी महिला सम्बन्धी मुद्दे वंचित समूह

ये आत्महत्या नहीं, हत्या है.

उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

रोहित वेमुला की हत्या के बाद दूसरी बार आदिवासी छात्रा की संस्थानिक निर्मम हत्या की घटना प्रकाश में आई हैं। जो लोग जातिवाद और आरक्षण पर लगातार हमले कर रहे हैं उन्हें जान लेना चाहिए कि जिस तरह दमन और हमले दलितों और आदिवासियों पर हो रहे हैं इससे यह वर्ग विद्रोह करने मजबूर होगा और इस तरह आरक्षण और अधिकारों की लड़ाई में संविधान सहायक होगा। मुंबई के बीवाईएल नायर अस्पताल की 26 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर पायल तड़वी के परिवार का आरोप है कि तीन सीनियर डॉक्टर्स के प्रताड़ना से परेशान होकर 22 मई को उनकी बेटी पायल ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। परिवार वालों ने आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। पायल को उसकी तीन सीनियर डॉक्टर्स लगातार प्रताड़ित कर रही थीं। 6 महीने में यह इतना बढ़ा कि उसने अपनी जान देना बेहतर समझा यानी कि एक डॉक्टर की हत्या कर दी गई।

नायर अस्पताल के टॉपिकल नेशनल मेडिकल कॉलेज में गायनोकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स के सेकेंड ईयर में पढ़ने वाली पायल की शादी 2016 में डॉक्टर सलमान से हुई थी। सलमान मुंबई के ही बालासाहेब ठाकरे मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।इस हैरेसमेंट के बारे में वह बताते हैं, दिसबंर 2018 में एक शाम डिनर के बाद हम दोनों साथ थे और वो अचानक ही जोर-जोर से रोने लगी। कहने लगी कि अब उससे सहा नहीं जाता है। मैंने उसे कुछ दिन अस्पताल जाने नहीं दिया। घर पर रहकर वो ठीक हो गई थी। करीब एक सप्ताह बाद मैं उसके साथ हेड ऑफ डिपार्टमेंट से मिला। इसके बाद उन्होंने पायल को एक कोर्स के लिए दूसरी यूनिट में भेज दिया। फरवरी 2019 तक वो ठीक थी।

6 महीने लगातार हुए इस टॉर्चर के बारे में वो बताते हैं, उसके बाद उसे नए सेमेस्टर में वापस उसी यूनिट में आना पड़ा। वो कहते हैं मैं उसके साथ ज्यादा समय बिताने लगा। डिनर के बाद उसके साथ लेट तक रुकने लगा। मैंने हॉस्टल की तरफ एक कमरा भी ले लिया ताकि वो हॉस्टल में हो रहे शोषण से दूर रह सके। तब तक हम मुंह जुबानी ही शिकायतें करते रहे। क्योंकि हमारा मकसद उन लड़कियों का करियर खराब करना नहीं था। हम चाहते थे कि हमारी पायल उस हैरेसमेंट से बच जाए। पिछले 15 दिन पहले मेरे पिताजी का एक ऑपरेशन हुआ तो उसने मुझे फोन पर हॉस्टल की बातें बताना कम कर दिया था। मैं मिल भी नहीं पा रहा था। हमारी बातचीत भी उसकी आत्महत्या के एक दिन पहले हुई थी।

पायल के परिवार का आरोप है कि पायल को वाट्सऐप ग्रुप्स पर भी उसके आदिवासी होने को लेकर भगोड़ी जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए। पायल के माता-पिता ने अग्रीपाड़ा पुलिस थाने में डॉक्टर हेमा आहूजा, डॉक्टर भक्ति मेहर और डॉक्टर अंकिता खंडेलवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), एससी/एसटी एक्ट, एंटी रैगिंग एक्ट के तरत मामला दर्ज कर लिया है। इस घटना के बाद से ही तीनों आरोपी लड़कियां फरार हैं। फिलहाल किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।कॉलेज प्रशासन का कहना है कि एक पांच सदस्यों की एक आंतरिक कमेटी का गठन कर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। उनका आश्वासन है कि मामले की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली पायल ताडावी हमेशा से डॉक्टर ही बनना चाहती थीं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वो आदिवासी इलाक़े में काम करना चाहती थीं।

कॉलेज के डीन डॉ. रमेश भरमाल के मुताबिक घटना के अगले दिन ही एंटी रैगिंग समिति ने नियमानुसार जांच शुरू कर दी है। भरमाल के मुताबिक समिति ने 25 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।जांच रिपोर्ट निदेशक मेडिकल एजुकेशन को सौंप दी जाएगी। पायल की मां आबेदा ताडावी ने बीवाईएल नायर अस्पताल के डीन को इस संबंध में लिखित शिकायत भी दी है।आबेदा का कहना है कि कथित तौर पर पायल को उत्पीड़न को स्वयं भी देखा था।अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है, मैं उस समय भी शिकायत दर्ज कराने जा रही थी।लेकिन पायल ने मुझे रोक दिया। पायल को डर था कि अगर शिकायत की तो उसका और अधिक उत्पीड़न किया जाएगा। उसके कहने पर मैंने अपने आप को रोक लिया।

हालांकि डीन का कहना है कि इस विषय में कॉलेज से जुड़े किसी भी व्यक्ति को न ही लिखित में और न ही मौखिक रूप से कोई शिकायत दी गई थी।ग़रीब और पिछड़े परिवार से आने के बावजूद पायल मेडिकल शिक्षा हासिल करने में कामयाब रही थीं। यह कामयाबी निश्चित तौर से सवर्णों को खटकती है। पायल की मां का आरोप है कि वरिष्ठ महिला डॉक्टर मरीज़ों के सामने भी पायल की बेइज़्ज़ती करती थीं । पायल भारी मानसिक दबाव में थी। पायल की मां उसके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थीं । पायल ने अपना विभाग बदलने की अर्ज़ी भी दी थी।

पायल के साथ काम करने वाली अन्य बहुसंख्यक डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर अपने ग़ुस्से का इज़हार किया है और अभियुक्त बनाई गईं डॉक्टरों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की है।और इन हत्या का आरोप के तहत कार्यवाही होनी चाहिए।इस घटना के बाद से मेडिकल शिक्षा जगत से जुड़े लोग सदमे तथा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।पायल की मौत के बाद एक बार फिर भेदभाव और मानसिक तनाव का मुद्दा उठा है। ब्राह्मणवादी व्यवस्था नहीं चाहता कि हिन्दू धर्म दलित और हिन्दू धर्म से बाहर आदिवासी उच्च शिक्षा हासिल ना करें।

abhibilkulabhi007@gmail.com
dakshinkosal.mmagzine@gmail.com

Related posts

भारत बंद के समर्थन में ,SCST एक्ट को समाप्त कर दिये जाने से उत्पन्न संकट पर विचार करने एवं रणनीति बनाने हेतु बैठक / 29 को रायपुर मे .

News Desk

पत्थर गढी से क्यों भयभीत है सत्ता प्रतिष्ठान और मीडिया .यह तो घोषणा है कि सरकारेँ संविधान का पालन करें ,और आदिवासी भी कानून की रक्षा करेगा . पत्थल गढ़ी पर विस्तृत चर्चा .

News Desk

स्वच्छ भारत अभियान शौचालयों का कॉरपोरेटीकरण है- बेजवाड़ा विल्सन

News Desk