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मौजूदा समय की असाधारण शख्सियत नेल्सन मंडेला को उनकी 100 वीं सालगिरह पर याद करने की अनगिनत वजहें हो सकती हैं :  बादल सरोज

NELSON MANDELA at press conference 1991
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Photo by Adam Scull-Globe Photos, inc.

18.07.2018

रंगभेदी निज़ाम के चंगुल से अपने देश और नागरिकों को आजाद कराने के लिए एक वकील और आंदोलनकारी से लेकर कम्युनिस्ट गुरिल्ला तक के रूप में जूझना, रोबन आइलैंड की जेल में चूना खदानों में काम करते हुए 27 साल काटना, अपनी सदारत में नए दक्षिण अफ्रीका का निर्माण करना, लोकप्रियता के शिखर पर निर्विकल्पता के पर्याय होने के बावजूद अगली बार चुनाव न लड़ना, विश्व मानवता के लिए सक्रिय रहना आदि आदि इत्यादि ।
● इसके लिए भी याद किया जा सकता है कि वे इकलौते व्यक्ति थे जिन्हें भारत पाकिस्तान दोनों ने अपने शीर्ष सम्मान भारत रत्न और निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया । नोबल सम्मान भी मिला ।

किंतु
● सबसे प्यारी युवा दोस्त के सौजन्य से पिछली साल अप्रैल में मंडेला के देश को देखने-समझने और उनके और दक्षिण अफ्रीकी अवाम के संघर्षों से जुड़े म्यूजियम में जाने ने अभिभूत कर दिया और लगा कि पिछली सदी के कुछ शानदार व्यक्तित्वों में से एक मदीबा को याद किया जाना चाहिए ;

● गुलामी के दिनों के संत्रासों से देश को उबारने के उस अनूठे प्रयोग

#ट्रुथ_एंड_रिकॉन्सिलियेशन_कमीशन के लिए जिसने बिना किसी प्रतिहिंसा और प्रतिशोध के जख्मो को भरने और नया वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया । यह दुनिया मे संभवतः पहला उदाहरण था जब अतीत में किये की सजा देने की बजाय उसके अहसास, स्वीकारोक्ति और पश्चाताप पर ज्यादा जोर था ।

● उस असाधारण विनम्रता के लिए जिसने उन्हें अपने समय का ऑइकन होने के बावजूद बच्चों की तरह भोला और हर पल सीखने के लिए उत्सुक इंसान बनाये रखा ।
● उस अतुलनीय नैतिक साहस के लिए जिसका उदाहरण उन्होंने अपनी पत्नी विनी मंडेला के स्वाधीनता संग्राम के दौरान अनियमितताओं और ज्यादती का आरोपी पाये जाने पर उनसे तलाक लेकर दिया ।
● उस उत्कट प्रेम के लिए जिसका परिचय उन्होंने मोजाम्बिक के दिवंगत राष्ट्रपति की पत्नी के साथ विवाह करके दिया ।
● उन दो किताबो लांग वाक टू फ्रीडम Long Walk to Freedom (1994, Little, Brown and co.) और कन्वर्सेशन विथ माइसेल्फ Conversations with Myself (with Richard Stengl, 2010 MacMillan) के लिये : जिनमे मैं कम है हम और सब ज्यादा है ।
● उस अफ्रीकी नृत्य के लिए जो उन्होंने भारत यात्रा के दौरान कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान में हुए अपने सम्मान समारोह में किया था ।
● इस विश्वास के लिये कि उन्होंने दुनिया को दिखाया कि असंभव को भी सम्भव बनाना सम्भव है । कि :
“व्यर्थ नही जाता है बोया हुआ पसीना
अलबत्ता उगने में देर भले हो जाये
एक न एक रोज सुनवाई होगी श्रम की
मौजूदा युग मे अंधेर भले हो जाये ।”

#लाल_सलाम_मदीबा #लॉंगलिव_नेल्सन_मंडेला

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