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मोदी जी आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि..अपनी गरीबी की दुकानदारी अब बंद कीजिए! विष्णु नागर

आज भी आप उत्तर प्रदेश की एक जनसभा में अपनी गरीबी बेच रहे थे.

ऐसा है, अगर प्रधानमंत्री हो जाना ही सबकुछ हो जाना है तो लालबहादुर शास्त्री भले ही पिछड़े वर्ग से नहीं थे, मगर बेहद गरीबी में पलेबढ़े थे और प्रधानमंत्री होकर भी उनके पास दो जोड़ी कपड़े होते थे और कभी कुर्ते तथा कभी उनकी धोती में छेद होते थे.

अगर गरीब होना ही सबकुछ होना होता है तो हमारे कम से कम दो राष्ट्रपति बेहद गरीबी से निकले थे-
के आर नारायणन और एपीजे अब्दुल कलाम.

नारायणन तो दलित थे और अब्दुल कलाम भी बचपन में अखबार बेचकर गरीबी से लड़े थे.

और ये तीनों गरिमामय पदों पर बैठकर बेहद गरिमामय व्यवहार करते थे और अपनी गरीबी की बारहों महीने सेल नहीं लगाते थे.

ये छिछले लोग नहीं थे.

और संक्षेप में कुछ बातें और.

गरीबी से निकलकर राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री हो जाना ही सबकुछ नहीं होता.

लोग आपकी गरीबी को नही, आपके कारनामों को याद रखेंगे और आपके भक्तों की नाराजगी मोल लेते हुए कहूँगा कि….

आपने ऐसा कुछ नहीं किया है कि लोग आपको पद से हटने के पाँच साल बाद भी सम्मान से याद रखें.

एक और बात!

लिओ ताल्सताय और रवीन्द्रनाथ टैगोर गरीब नहीं थे, लेकिन आप उनके पाँव की धूल का एक कण भी नहीं हैं.

और महात्मा गांधी ने तो देश के करोड़ों लोगों की जिन्दगी देखकर गरीबी का वरण किया था.

नेहरू जी के नाम से आपकी प्रजाति को मिर्ची लगेगी, इसलिए फिलहाल उन्हें छोड़ता हूँ.

और अपनी गरीबी का रोना रोनेवाला शख्स, अमीरों को भी लजा देनेवाली अमीरी में जीता है और उनका ही असली हितचिंतक है,यह हम कैसे भूलें?

एक अंतिम बात.

महोदय हिंदुस्तान में तब आप ही नहीं करोड़ों लोग इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रहे थे और आज भी जूझ रहे हैं.

कहीं मत जाइए प्रधानमंत्री का तामझाम छोड़कर साधारण कार में सुबह सात बजे दिल्ली शहर के सैकड़ों लेबर चौक घूम जाइए.

अपनी मेहनत बेचने के लिए लोग खड़े- बैठे रहते हैं और ग्यारह- बारह बजे तक भी कइयों को काम नहीं मिलता. उनके पेट में उस दिन कुछ जाता है या नहीं,कौन जानता है?

आज भी कैसी भयानक गरीबी है,क्या बताएँ? और मोदीजी आप किसी यूरोपीय देश के नेता नहीं हैं,जिनकी दो -तीन पीढ़ियों ने हम जैसी गरीबी नहीं देखी है.

आप उन्हीं गरीबों को अपनी झूठी -सच्ची दास्तान सुना रहे हैं,जो आज भी आपसे कई गुना गरीबी और अपमान झेलकर जी रहे हैं.

इनके सामने अपनी गरीबी का रोना रोते हुए एक बार भी आपको शर्म नहीं आती?
झिझक तक नहीं होती?

कैसे गरीब थे आप और कैसे प्रधानमंत्री हैं आप!

विष्णु नागर ,वरिष्ठ साहित्यकार

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